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Farrukhabad News: निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों के सहारे स्वास्थ्य विभाग, मेडिकोलीगल भी ठप
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फोटो-05,,जिला अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़,संवाद
फर्रुखाबाद। जिले में स्वास्थ्य विभाग की हालत यह है कि लोहिया अस्पताल को छोड़ किसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध नहीं है। नौ सीएचसी में कहीं भी अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं लगी है। कायमगंज सीएचसी में वर्षों पहले लगी मशीन 10 साल से खराब पड़ी है, जिसे दोबारा चालू कराने की कोशिश भी नहीं हुई।
लोहिया पुरुष अस्पताल ही एकमात्र विकल्प था, लेकिन वहां भी डॉ. योगेंद्र सिंह के दो अगस्त से चिकित्सीय अवकाश पर जाने के बाद अल्ट्रासाउंड पूरी तरह बंद हो गया है। हालात ऐसे हैं कि जिले में एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इससे मेडिकोलीगल रिपोर्ट तक नहीं बन पा रही। मारपीट या अन्य मामलों में घायलों को अब कन्नौज मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।
डॉक्टर जब अल्ट्रासाउंड लिखते हैं, तो मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का रुख करना पड़ता है, जिससे उनकी जेब पर असर पड़ता है। जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास पुरुषों के अल्ट्रासाउंड की कोई भी व्यवस्था नहीं बची है।
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गर्भवती महिलाओं के निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर संबद्ध
शासन प्रसव सरकारी अस्पतालों में कराने पर जोर दे रहा है, लेकिन किसी भी सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण 12 निजी सेंटरों को शासन से जोड़ा गया है। राजेपुर जैसी सीएचसी से जुड़ी महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए 25 किमी दूर जाना पड़ता है, जो अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।
जटिल प्रक्रिया पार करना चुनौती
गर्भवती महिलाओं के निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए उन्हें पहले सीएचसी या पीएचसी पर तय तारीख 1, 9, 16, 24 को दिखाना होता है। इसके बाद नाम की सूची बनती है, जो मुख्यालय भेजी जाती है। फिर यह सूची एसबीआई की वेबसाइट पर अपलोड, क्यूआर कोड जनरेट, सीएचसी पर भेजना और ओटीपी स्वीकृति तक पहुंचती है। कई बार साइट पर तकनीकी खामी से ओटीपी स्वीकार नहीं होता, जिससे महिलाएं बार-बार चक्कर काटने को मजबूर हो जाती हैं। थक-हारकर कई महिलाएं सरकारी प्रक्रिया छोड़ निजी सेंटरों में पैसा खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना ही बेहतर समझती हैं।
- सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीनें लगाने के लिए मांग पत्र भेजा जा चुका है। रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश के होने से मेडिकोलीगल के मामले कन्नौज मेडिकल कॉलेज भेजे जा रहे हैं।
डॉ. अवनींद्र कुमार, सीएमओ
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लोहिया पुरुष अस्पताल ही एकमात्र विकल्प था, लेकिन वहां भी डॉ. योगेंद्र सिंह के दो अगस्त से चिकित्सीय अवकाश पर जाने के बाद अल्ट्रासाउंड पूरी तरह बंद हो गया है। हालात ऐसे हैं कि जिले में एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इससे मेडिकोलीगल रिपोर्ट तक नहीं बन पा रही। मारपीट या अन्य मामलों में घायलों को अब कन्नौज मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।
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डॉक्टर जब अल्ट्रासाउंड लिखते हैं, तो मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का रुख करना पड़ता है, जिससे उनकी जेब पर असर पड़ता है। जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास पुरुषों के अल्ट्रासाउंड की कोई भी व्यवस्था नहीं बची है।
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गर्भवती महिलाओं के निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर संबद्ध
शासन प्रसव सरकारी अस्पतालों में कराने पर जोर दे रहा है, लेकिन किसी भी सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन न होने के कारण 12 निजी सेंटरों को शासन से जोड़ा गया है। राजेपुर जैसी सीएचसी से जुड़ी महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए 25 किमी दूर जाना पड़ता है, जो अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।
जटिल प्रक्रिया पार करना चुनौती
गर्भवती महिलाओं के निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए उन्हें पहले सीएचसी या पीएचसी पर तय तारीख 1, 9, 16, 24 को दिखाना होता है। इसके बाद नाम की सूची बनती है, जो मुख्यालय भेजी जाती है। फिर यह सूची एसबीआई की वेबसाइट पर अपलोड, क्यूआर कोड जनरेट, सीएचसी पर भेजना और ओटीपी स्वीकृति तक पहुंचती है। कई बार साइट पर तकनीकी खामी से ओटीपी स्वीकार नहीं होता, जिससे महिलाएं बार-बार चक्कर काटने को मजबूर हो जाती हैं। थक-हारकर कई महिलाएं सरकारी प्रक्रिया छोड़ निजी सेंटरों में पैसा खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना ही बेहतर समझती हैं।
- सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीनें लगाने के लिए मांग पत्र भेजा जा चुका है। रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश के होने से मेडिकोलीगल के मामले कन्नौज मेडिकल कॉलेज भेजे जा रहे हैं।
डॉ. अवनींद्र कुमार, सीएमओ