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हर प्रत्याशी के लिए सिरदर्द बने भितरघाती

Sat, 18 Feb 2017 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद Updated Sat, 18 Feb 2017 12:36 AM IST
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Headache for each candidate made Bhitrgati
डेमो पिक
जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों में ऐसा कोई दल नहीं है जिसके लिए भितरघाती सिरदर्द न बने हों। टिकट के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के चक्कर लगाने वाले नेता ऐन मौके पर गच्चा खा जाने के बाद पाटी प्रत्याशी की चुनावी नैय्या डुबाने में ऐड़ी चोटी का जोर लगाए हैं।
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कहीं पार्टी हाईकमान तो कहीं प्रत्याशी व उनके चहेते रूठों को मनाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। विधायक बनने पर उन्हें भी पूरा सम्मान मिलने की बात कह रहे हैं। इसके बावजूद प्रत्याशी भितरघात से अनजान नहीं हैं। चुनाव के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। बूथ पर तैनात यूथ तक बस्ता व मेहनताना पहुंचाने की जिम्मेदारी अपने रिश्तेदारों व बेहद करीबियों को सौंपी है। प्रत्याशियों ने आखिरी दिन की पूरी रणनीति ही सीक्रेट कर दी है।
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इस सीट पर सपा व कांग्रेस गठबंधन से विजय सिंह प्रत्याशी हैं। कांग्रेस नेता लुईस खुर्शीद को टिकट न मिलने से खफा कांग्रेसी उनके विरोध में मोर्चा खोले हैं। बसपा ने मो. उमर खां को उतारा है, जबकि टिकट न मिलने पर बसपा से एमएलसी रहे मनोज अग्रवाल निर्दल ताल ठोंक रहे हैं। इससे तमाम बसपाई दोनों पालों में रहकर खेल करने में लगे हैं। भाजपा में मेजर सुनील दत्त को फिर प्रत्याशी बनाने के बाद टिकट न मिलने से रूठे लीडर अंदरखाने में चाल चलने में लगे हैं।
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कायमगंज विधानसभा क्षेत्र में सपा के एक कद्दावर नेता टिकट न मिलने से नाराज हैं पर नाराजगी जाहिर नहीं करते। सीएम के आगमन पर कायमगंज के बजाय दूसरे इलाके की जनसभा में प्रगट हुए। उनके समर्थक साइकिल को पंचर करने लगे हैं। भाजपा के कई नेता पिछली बार हारे अमर सिंह खटिक को फिर लड़ाने से नाराज होकर दूसरे दल के प्रत्याशी के लिए वोट मांग रहे हैं। वहीं रिटायर आईएएस रामस्वरूप गौतम को टिकट देना कई बसपाई हजम नहीं कर पा रहे हैं और हाथी की राह में ब्रेकर बनने में लगे हैं।


भोजपुर में सपा विधायक के बेटे अरशद जमाल सिद्दीकी को टिकट मिलने से खफा कुछ सपाई खुल्लमखुल्ला विरोध कर मैदान में हैं तो कुछ दूसरे दल के प्रत्याशियों के लिए वोट मांग रहे हैं। भाजपा में नागेंद्र सिंह राठौर को टिकट मिलने से असंतुष्ट कई भाजपाई साइकिल की सवारी कर रहे हैं। बसपा में जेमिनी राजपूत के उतरने से बुजुर्ग लाबी के कई नेता निष्क्रिय हैं। कोई बीमारी का बहाना बनाकर घर बैठा है तो कोई दिन में प्रचार करता है तो रात में भितरघात में लगा है।



अमृतपुर में सपा के दो नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग ने तमाम भितरघाती पैदा कर दिए हैं। यहां सपा के नरेंद्र सिंह यादव की राह रोकने के लिए उनके विरोधी सपाई दिन-रात एक किए हैं। वहीं भाजपा के सुशील शाक्य के लड़ने से विधायक बनने की महत्वाकांक्षा में तीन से चार सालों में सक्रिय हुए नेता विभीषण की भूमिका में सक्रिय हैं। यहां बसपा ने अरुण मिश्रा के रूप में नया चेहरा उतारा तो पुराने नेता भितरघाती के रोल में आ गए हैं।

 
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