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Farrukhabad News: सेना में लेफ्टिनेंट बनी हवलदार की बेटी आकांक्षा
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फर्रुखाबाद। शहर के मोहल्ला अंडियाना निवासी हवलदार क्लर्क की बेटी आकांक्षा तिवारी ने सेना में क्लास वन लेफ्टिनेंट बनकर जिले का नाम रोशन किया है। वह अपने परिवार की चौथी सदस्य हैं, जो देश की सेवा के लिए सेना में गई हैं।
मूल रूप से जहानगंज थाने के गांव झसी निवासी आकांक्षा के पिता रतनेश तिवारी की देश के कई प्रदेशों तैनाती रही, मगर बेटी की पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया। उसे दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में रखकर पढ़ाया। हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय लखनऊ कैंट से की। 12वीं के बाद ही देश भर में सिर्फ 220 पदों के लिए आई मिलेट्री नर्सिंग सर्विस के लिए आवेदन किया। लिखित परीक्षा, मेडिकल एवं इंटरव्यू पास करके दिल्ली में सेना के सबसे उच्चस्तरीय अस्पताल में ट्रेनिंग का मौका मिला।
24 अक्तूबर गुरुवार को दिल्ली के कैंट में पासिंग परेड हुई। उसमें अफसरों के अलावा माता-पिता ने क्लास वन सर्विस लेफ्टिनेंट के स्टार लगाए। उसको पहली तैनाती कमांड हॉस्पिटल बंगलुरू में पहली तैनाती मिली है।
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स्कूली शिक्षा से सेना तक चार घंटे में ही पूरी करनी होती है नींद
लेफ्टिनेंट आकांक्षा बताती हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि सेना की ट्रेनिंग हर कठिनाई को जीतने वाली होती है। पहले दो साल सुबह चार बजे उठना और रात एक बजे सोना होता था।
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मूल रूप से जहानगंज थाने के गांव झसी निवासी आकांक्षा के पिता रतनेश तिवारी की देश के कई प्रदेशों तैनाती रही, मगर बेटी की पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया। उसे दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में रखकर पढ़ाया। हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय लखनऊ कैंट से की। 12वीं के बाद ही देश भर में सिर्फ 220 पदों के लिए आई मिलेट्री नर्सिंग सर्विस के लिए आवेदन किया। लिखित परीक्षा, मेडिकल एवं इंटरव्यू पास करके दिल्ली में सेना के सबसे उच्चस्तरीय अस्पताल में ट्रेनिंग का मौका मिला।
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24 अक्तूबर गुरुवार को दिल्ली के कैंट में पासिंग परेड हुई। उसमें अफसरों के अलावा माता-पिता ने क्लास वन सर्विस लेफ्टिनेंट के स्टार लगाए। उसको पहली तैनाती कमांड हॉस्पिटल बंगलुरू में पहली तैनाती मिली है।
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स्कूली शिक्षा से सेना तक चार घंटे में ही पूरी करनी होती है नींद
लेफ्टिनेंट आकांक्षा बताती हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि सेना की ट्रेनिंग हर कठिनाई को जीतने वाली होती है। पहले दो साल सुबह चार बजे उठना और रात एक बजे सोना होता था।

फोटो संख्या:67- गांव दौंगडा अहीर में लंबी कूद में हिस्स लेता खिलाड़ी--संवाद