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सामुदायिक शौचालय बंद होने पर प्रधान दें नोटिस
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सामुदायिक शौचालय बंद होने पर प्रधान दें नोटिस
फर्रुखाबाद। ग्राम पंचायत में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए अधिकांश सामुदायिक शौचालयों में ताले लटके हैं। भुगतान लेने के बाद भी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं काम नहीं कर रही हैं। ऐसे समूहों को अब प्रधान नोटिस जारी कर उनकी छुट्टी करेंगे।
जनपद की सभी 594 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बन रहे हैं। इनमें करीब 540 का निर्माण पूरा होने से संचालन के लिए स्वयं सहायता समूहों को सौंप दिए गए हैं। उन्हें अप्रैल से सितंबर तक 9000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान भी किया जा चुका है। इसके बावजूद अधिकांश शौचालयों में ताले लगे हैं। एक शौचालय के निर्माण में करीब 5.50 से 6 लाख रुपये तक की लागत आई है।
शासन से संचालित शौचालयों की रिपोर्ट मांगी गई तो अधिकारियों ने समूहों को हस्तांतरित कराकर रिपोर्ट भेज दी। फिर भुगतान का दबाव बनाया गया। इससे शौचालय चालू न होने के बाद भी सचिव व प्रधानों ने समूहों को भुगतान भी कर दिया।
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कुछ जागरूक प्रधानों ने समूह को मात्र एक माह का भुगतान किया और कहा कि जब शौचालय चालू होगा तभी भुगतान किया जाएगा। फिलहाल अधिकांश ग्राम पंचायतों में लोगों को सामुदायिक शौचालय का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
डीसी एनआरएलएम योगेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि जिले में करीब 540 समूहों को सामुदायिक शौचालय हस्तांतरित कर उन्हें प्रधान व सचिव भुगतान कर चुके हैं। समूहों से काम लेने की भी जिम्मेदारी भी प्रधानों की है। जो समूह शौचालय में ताला लगाए हैं, उन्हें ग्राम प्रधान नोटिस दें। उस समूह को हटाकर दूसरे की महिला को लगाया जाएगा। जिससे शौचालय का ग्रामीणों को लाभ मिल सके।
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फर्रुखाबाद। ग्राम पंचायत में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए अधिकांश सामुदायिक शौचालयों में ताले लटके हैं। भुगतान लेने के बाद भी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं काम नहीं कर रही हैं। ऐसे समूहों को अब प्रधान नोटिस जारी कर उनकी छुट्टी करेंगे।
जनपद की सभी 594 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बन रहे हैं। इनमें करीब 540 का निर्माण पूरा होने से संचालन के लिए स्वयं सहायता समूहों को सौंप दिए गए हैं। उन्हें अप्रैल से सितंबर तक 9000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान भी किया जा चुका है। इसके बावजूद अधिकांश शौचालयों में ताले लगे हैं। एक शौचालय के निर्माण में करीब 5.50 से 6 लाख रुपये तक की लागत आई है।
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शासन से संचालित शौचालयों की रिपोर्ट मांगी गई तो अधिकारियों ने समूहों को हस्तांतरित कराकर रिपोर्ट भेज दी। फिर भुगतान का दबाव बनाया गया। इससे शौचालय चालू न होने के बाद भी सचिव व प्रधानों ने समूहों को भुगतान भी कर दिया।
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कुछ जागरूक प्रधानों ने समूह को मात्र एक माह का भुगतान किया और कहा कि जब शौचालय चालू होगा तभी भुगतान किया जाएगा। फिलहाल अधिकांश ग्राम पंचायतों में लोगों को सामुदायिक शौचालय का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
डीसी एनआरएलएम योगेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि जिले में करीब 540 समूहों को सामुदायिक शौचालय हस्तांतरित कर उन्हें प्रधान व सचिव भुगतान कर चुके हैं। समूहों से काम लेने की भी जिम्मेदारी भी प्रधानों की है। जो समूह शौचालय में ताला लगाए हैं, उन्हें ग्राम प्रधान नोटिस दें। उस समूह को हटाकर दूसरे की महिला को लगाया जाएगा। जिससे शौचालय का ग्रामीणों को लाभ मिल सके।