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गौस-ए-आजम के दरबार में झुके सिर
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद।
Updated Fri, 22 Jan 2016 11:42 PM IST
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फर्रुखाबाद। गंगा जमुनी तहजीब की प्रतीक दरगाह झंडा शरीफ में हजरत गौस-ए-आजम के दरबार में अकीदतमंदों के सिर झुके। सुबह कुल व फातिहा की रस्म अदा हुई। सायंकाल दरगाह हुसैनिया मुजीबिया से गागर जुलूस उठा। जुलूस की जियारत को जनसमूह उमड़ा। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। जुलूस के आगे-आगे कव्वाली गाते लोग चलते रहे। देर रात तक महिलाओं ने दरगाह में चिरागा किया।
11वीं शरीफ के मौके पर शुक्रवार को जज्ब-ए-अकीदत का सैलाब हजरत गौस-ए-आजम यानी बड़े पीर साहब की याद में रमा दिखा। सुबह से ही मुस्लिम मोहल्लों में चहल-कदमी शुरू हो गई। घरों में कुरानख्वानी के आयोजन किए गए। सायंकाल दरगाह हुसैनिया मुजीबिया से सज्जादानशीन की सरपरस्ती में धूमधाम से गागर जुलूस निकाला गया। कटरी बख्शी से लेकर दरगाह झंडा शरीफ तक मार्गों पर भव्य सजावट की गई।
जुलूस आगे बढ़ा तो भीड़ भी बढ़ती गई। कटरा बख्शी का रास्ता भीड़ से तंग हो गया। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। जुलूस के आगे कव्वालियों की धुनें गूंजीं। इत्र, गुलाब और फूलों की वर्षा होती रही। समापन पर दरगाह झंडा शरीफ अकीदतमंदों से खचाखच भर गया। यहां जुलूस में शामिल लोगों ने सलामी देकर कुल व फातिहा में शिरकत की। सज्जादा नशीन शाह फसीह मुजीबी ने मुल्क की तरक्की व खुशहाली की अल्लाह से दुआ मांगी। इस अवसर पर हाजी वारिस अली, नाजिम अली, चांद मोहम्मद खां, अख्तर अली, राशिद, हाजी इस्लाम अली, असलम शेर खां, नासिर अली, जावेद खां, मोहम्मद अकरम, परवेज अली, शाहवेज अली, छोटे खां, हाजी आफाक और प्यारेमियां आदि मौजूद रहे।
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कव्वाली की महफिल सजी
दरगाह झंडा शरीफ में इंतजामियां कमेटी की ओर से आयोजित जश्ने गौस-ए-आजम में फातिहा से पहले कव्वाली हुई। लंगर का दौर भी चला। फातिहा में भाग लेने के लिए सुबह से ही अकीदतमंदों की भीड़ दरगाह झंडी शरीफ में उमड़ने लगी। कव्वालों ने सूफियों को समर्पित कलाम पेश किए। इस अवसर पर हाजी खलील खां, असलम खां, वसीम खां, हाफिज हसीन, मतीन खां, भुल्लन खां और शमीम खां आदि मौजूद रहे।
मेला जैसा माहौल रहा
दरगाह झंडा शरीफ में मेले जैसा माहौल रहा। यहां बच्चों ने खिलौने खरीदे और झूलों का लुत्फ उठाया। चढ़ावे के लिए चादरें, चिरांगा व मिठाई की जमकर लोगों ने खरीददारी की। दुकानदारों ने बताया कि चांदी का चिरांगा 100 और सोने का चिरांगा 300 से लेकर 600 रुपये तक बेचा।
शाम होते ही पहुंचने लगीं महिलाएं
जश्ने गौस-ए-आजम में सूरज ढलते ही हाथ में सजी चढ़ावे की थालियों को लेकर महिलाओं की टोलियां शाम होते ही दरगाह झंडा शरीफ में पहुंचने लगीं। भीड़ को संभालने के लिए इंतजामियां कमेटी के लोगों को मशक्कत करनी पड़ी। धक्का-मुक्की के बीच महिलाओं ने आस्था के अनुरूप सोने-चांदी के चिरांगा चढ़ाए और मन्नत मांगी। अकीदतमंद यास्मीन और राबिया आदि ने बताया कि झंडा शरीफ में मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है।
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11वीं शरीफ के मौके पर शुक्रवार को जज्ब-ए-अकीदत का सैलाब हजरत गौस-ए-आजम यानी बड़े पीर साहब की याद में रमा दिखा। सुबह से ही मुस्लिम मोहल्लों में चहल-कदमी शुरू हो गई। घरों में कुरानख्वानी के आयोजन किए गए। सायंकाल दरगाह हुसैनिया मुजीबिया से सज्जादानशीन की सरपरस्ती में धूमधाम से गागर जुलूस निकाला गया। कटरी बख्शी से लेकर दरगाह झंडा शरीफ तक मार्गों पर भव्य सजावट की गई।
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जुलूस आगे बढ़ा तो भीड़ भी बढ़ती गई। कटरा बख्शी का रास्ता भीड़ से तंग हो गया। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। जुलूस के आगे कव्वालियों की धुनें गूंजीं। इत्र, गुलाब और फूलों की वर्षा होती रही। समापन पर दरगाह झंडा शरीफ अकीदतमंदों से खचाखच भर गया। यहां जुलूस में शामिल लोगों ने सलामी देकर कुल व फातिहा में शिरकत की। सज्जादा नशीन शाह फसीह मुजीबी ने मुल्क की तरक्की व खुशहाली की अल्लाह से दुआ मांगी। इस अवसर पर हाजी वारिस अली, नाजिम अली, चांद मोहम्मद खां, अख्तर अली, राशिद, हाजी इस्लाम अली, असलम शेर खां, नासिर अली, जावेद खां, मोहम्मद अकरम, परवेज अली, शाहवेज अली, छोटे खां, हाजी आफाक और प्यारेमियां आदि मौजूद रहे।
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कव्वाली की महफिल सजी
दरगाह झंडा शरीफ में इंतजामियां कमेटी की ओर से आयोजित जश्ने गौस-ए-आजम में फातिहा से पहले कव्वाली हुई। लंगर का दौर भी चला। फातिहा में भाग लेने के लिए सुबह से ही अकीदतमंदों की भीड़ दरगाह झंडी शरीफ में उमड़ने लगी। कव्वालों ने सूफियों को समर्पित कलाम पेश किए। इस अवसर पर हाजी खलील खां, असलम खां, वसीम खां, हाफिज हसीन, मतीन खां, भुल्लन खां और शमीम खां आदि मौजूद रहे।
मेला जैसा माहौल रहा
दरगाह झंडा शरीफ में मेले जैसा माहौल रहा। यहां बच्चों ने खिलौने खरीदे और झूलों का लुत्फ उठाया। चढ़ावे के लिए चादरें, चिरांगा व मिठाई की जमकर लोगों ने खरीददारी की। दुकानदारों ने बताया कि चांदी का चिरांगा 100 और सोने का चिरांगा 300 से लेकर 600 रुपये तक बेचा।
शाम होते ही पहुंचने लगीं महिलाएं
जश्ने गौस-ए-आजम में सूरज ढलते ही हाथ में सजी चढ़ावे की थालियों को लेकर महिलाओं की टोलियां शाम होते ही दरगाह झंडा शरीफ में पहुंचने लगीं। भीड़ को संभालने के लिए इंतजामियां कमेटी के लोगों को मशक्कत करनी पड़ी। धक्का-मुक्की के बीच महिलाओं ने आस्था के अनुरूप सोने-चांदी के चिरांगा चढ़ाए और मन्नत मांगी। अकीदतमंद यास्मीन और राबिया आदि ने बताया कि झंडा शरीफ में मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है।