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गंगा का पानी चेतावनी बिंदु के पार

Wed, 12 Aug 2015 11:19 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Wed, 12 Aug 2015 11:19 PM IST
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Ganga water warning point across
गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से पार पहुंच गया है। अब खतरे के निशान की ओर
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बढ़ रहा है। इससे कटरी इलाके के गांवों में पानी घुसने लगा है। ग्रामीण बाढ़ के विकराल होने की आशंका से भयभीत हैं। गंगा चेतावनी बिंदु से 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं।

गंगा व रामगंगा का चेतावनी बिंदु 136.35 मीटर पर है। बुधवार को गंगा 136.75 व रामगंगा 136.25 मीटर पर बह रही हैं। गंगा का जलस्तर और भी बढ़ने के आसार हैं। बुधवार को गंगा में नरौरा से 109841 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह शुक्रवार को पहुंचेगा। रामगंगा में 11765 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ। 11 अगस्त को गंगा में 113465 व रामगंगा में 15587 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।

जल स्तर (मीटर में)
तारीख    गंगा         रामगंगा
12 अगस्त  136.75    136.25
11 अगस्त  136.50    135.10
10  अगस्त  136.10    135.0
9 अगस्त    135.95     135.0          

गंगा का कहर, कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
तहसील अमृतपुर और ब्लाक शमसाबाद में गंगा का कहर जारी है। बुधवार को दोनों जगह करीब एक दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। इससे ग्रामीणों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव के लोग पलायन कर रहे हैं। तहसील अमृतपुर क्षेत्र के गांव करनपुर घाट, कुडनी सारंगपुर और फकरपुर में लेखपाल ने पहुंचकर बाढ़ का जायजा लिया।

तहसील अमृतपुर क्षेत्र के गांव कुडनी सारंगपुर, करनपुर घाट, हरसिंगपुर कायस्थ, मंझा और ऊगरपुर गांव को चारों ओर से गंगा के पानी ने घेर लिया है। इन गांवों में रहने वाले अजयपाल, ऋषिपाल, रामविलास, रक्षपाल, मुनीश कुमार, संजू, धर्मजीत, जवाहर लाल, मुन्नू, अशोक कुमार, रामबाबू, जोगराज और देवेंद्र की झोपड़ियों के अंदर पानी घुस गया है। इससे

ग्रामीणों के आगे जानवर के चारे और उन्हें बांधने की दिक्कत आ रही है। रास्तों में पानी भरने से आवागमन मुश्किल भरा हो गया है। कुडनी सारंगपुर संपर्क मार्ग पर कमर तक पानी भरा है। ग्रामीणों का कहना है कि मिट्टी डालकर चबूतरे बना लिए हैं। उस पर भोजन बनाने को मजबूर हैं। इसी चबूतरे पर चारपाई डालकर लेटते हैं। एक चारपाई पर दो-दो-तीन-तीन

लोग लेट रहे हैं। गांव मंझा का भी आवागमन ठप है। इस गांव के संपर्क मार्ग पर पानी भरा है। यहां के ग्रामीण गंगा सोता नाला में चल रही नाव से आवागमन कर रहे हैं। लेखपाल विकास कुमार वर्मा ने करनपुर घाट, कुडनी सारंगपुर, फकरपुर में जाकर बाढ़ का जायजा लिया। लेखपाल ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन से आर्थिक मदद उपलब्ध करवाई जाएगी।

शमसाबाद प्रतिनिधि के अनुसार बुधवार को कटरी तौफीक की मढ़ैया में गंगा का पानी घुस गया। गांव के श्रीकृष्ण, मुनेश, सुंदरलाल, जय सिंह, अतर सिंह, भूरे, रामचंद्र और कल्लू के कच्चे घरों में पानी भरा है। घरों में पानी भरा होने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।  सबसे ज्यादा दिक्कत पीने के पानी की है। गांव में लगे हैंडपंप डूबे हैं। पीने का पानी

सड़क पर लगे हैंडपंप से भरकर ग्रामीण ला रहे हैं। ऊगरपुर गांव भी पानी से घिर गया है। गांव के पिंटू ने बताया कि उनके कच्चे मकान में पानी घुस गया है। वह ट्रैक्टर-ट्राली पर गृहस्थी का सामान लादकर परिवार समेत गांव सिरमौरा में रह रहीं अपनी मौसी के यहां जा रहे हैं।

रास्तों में पानी भरा, दो सरकारी स्कूल बंद
 प्राथमिक विद्यालय कुडनी और प्राथमिक विद्यालय मंझा के लिए जाने वाले रास्ते में बाढ़ का पानी भरा है। इसके चलते बच्चे और शिक्षक स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल के रास्ते में पानी भरा होने के चलते दो दिन से दोनों स्कूल बंद हैं।

खेतों में भरा पानी, फसल खराब होने की आशंका
बलीपट्टी रानीगांव, आसमपुर, फकरपुर, बनासीपुर, हमीरपुर परतापुर, भावपुर चौरासी, कुतलूपुर, कुसमापुर, कुबेरपुर, लायकपुर, ईमादपुर सोमवंशी, कंचनपुर, सबलपुर, बरुआ, बमियारी, जगतपुर, गौटिया, सुंदरपुर, नगला दुर्गू, राजाराम की मढ़ैया, आंतर और भुडना आदि गांव में गंगा का पानी खेतों में भर गया है। इससे तिल, उर्द, मूंग, मक्का, धान और बाजरा

की फसलें खराब होने की कगार पर पहुंच गई हैं। अशोक कुमार, राजेश कुमार, अवधेश कुमार, देवेंद्र सिंह और शशिपाल आदि का कहना है कि खेतों में बाढ़ का पानी भरने से फसल खराब होने का डर है। अगर पांच-छह दिन तक पानी इसी तरह भरा रहा तो फसल बर्बाद हो सकती है।

तहसीलदार ने लिया जायजा
तहसीलदार शेख आलम गीर ने बुधवार को अलादपुर भटौली और कोला सोता गांव में बाढ़ का जायजा लिया। उन्होंने रामगंगा का कटान देखा। उन्होंने बताया कि अभी तहसील क्षेत्र में किसी भी गांव में ज्यादा बाढ़ नहीं आई है। सभी लेखपालों को सूचना दे दी है कि वह अपने-अपने क्षेत्र के गांवों में जाकर बाढ़ का जायजा लें और प्रतिदिन रिपोर्ट दें। गांव छोड़कर आने वाले ग्रामीणों को आर्थिक मदद उपलब्ध करवाई जाएगी।
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