{"_id":"57925ea54f1c1b3859c4bd1c","slug":"ganga-was-alert-crossing-point","type":"story","status":"publish","title_hn":"चेतावनी बिंदु पार कर गई गंगा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चेतावनी बिंदु पार कर गई गंगा
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Fri, 22 Jul 2016 11:27 PM IST
विज्ञापन
कटरी तौफीक में बैलगाडी पर खाना बनाती महिला।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गंगा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा कम होने से गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार करने के बाद ठहर गया है। रामगंगा में अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की और बढ़ोत्तरी हो गई है। दोनों नदियों में आई बाढ़ से लगभग 40 गांव प्रभावित हो गए है। अधिकांश गांवों में पानी भर गया है।
गंगा और रामगंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को गंगा में नरौरा से 137906 क्यूसेक, हरिद्वार से 43268 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इस कारण गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 के ऊपर 136.70 पर पहुंचने के बाद ठहर गया है। गंगा के पानी से कई गांवों का कटान तेज हो गया। लगातार पानी छोड़े जाने के कारण गंगा के जलस्तर में अभी और बढ़ोत्तरी होगी।
रामगंगा का जलस्तर गुरुवार को 135.50 मीटर था। जो शुक्रवार को बढ़कर 135.55 मीटर हो गया। इसमें खो हरेली बैराज से 10748 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस नदी के जलस्तर में दो दिन में बढ़ोत्तरी होना तय है।
विज्ञापन
दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर से अमृतपुर तहसील क्षेत्र के गांव माखन नगला, रामप्रकाश नगला, जटपुरा, कैलयाई, कुडरी सारंगपुर, वनासीपुर, फकरपुर, करनपुरघाट, मंझा प्रथम व द्वितीय, कालिका नगला, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, लायकपुर, नगरिया जवाहर, कुसुमापुर, कुवेरपुर, भाऊपुर चौरासी, कलक्टरगंज, वलीपट्टी, आसमपुर, सबलपुर, कंचनपुर, रामपुर जोगराजपुर, उदयपुर, आशा की मढैया, तीसराम की मढैया गौटिया, चाचूपुर, मैदा की मढैया, जसूपुर, कछुआ गाड़ा, सुंदरपुर, मुड़रा, अलादपुर भटौली, कोलासोता, खरगपुर तथा शमसाबाद ब्लाक क्षेत्र के गांव कटरी तौफीक, परसादी की मढैया, रुपपुर मंगलीपुर, समौचीपुर तराई, समौचीपुर चितार, कमथरी गांव बाढ़ से प्रभावित है।
कटरी तौफीक में बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है। लोगों की झोपड़ियों में पानी घुस गया है। मजबूरी में महिलाएं बैलगाड़ी या फिर ईंटों के चट्टों पर मिट्टी के चूल्हे रखकर भोजन बनाने को मजबूर हैं। बच्चे बुखार से पीड़ित हैं लेकिन डाक्टर नहीं आ रहे हैं। पेश है कटरी तौफीक गांव की पड़ताल करती रपट:-।
शुक्रवार सुबह करीब 7.30 बजे गांव कटरी तौफीक में महेशचंद्र की झोपड़ी में पानी भरा था। चारपाई पर उसके बच्चे चमेली, सचित बुखार में लेटे थे। महेशचंद्र की पत्नी मिथलेश देवी बैलगाड़ी पर मिट्टी का चूल्हा रखकर भोजन बना रही थीं। पूछने पर मिथलेश देवी ने कहा कि हर साल वह लोग बाढ़ की विभीषिका से जूझते हैं। लेकिन जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि आज तक बाढ़ से निजात नहीं दिलवा सका।
महेशचंद्र कहते हैं कि उनके बच्चों को तीन-चार दिन से बुखार आ रहा है लेकिन चिकित्सीय टीम देखने तक नहीं आई है। लेखपाल और कानूनगो ने पॉलीथिन तक उपलब्ध नहीं कराई है। जानवरों के बांधने तक की जगह नहीं है
गंगा और रामगंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को गंगा में नरौरा से 137906 क्यूसेक, हरिद्वार से 43268 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इस कारण गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 के ऊपर 136.70 पर पहुंचने के बाद ठहर गया है। गंगा के पानी से कई गांवों का कटान तेज हो गया। लगातार पानी छोड़े जाने के कारण गंगा के जलस्तर में अभी और बढ़ोत्तरी होगी।
विज्ञापन
रामगंगा का जलस्तर गुरुवार को 135.50 मीटर था। जो शुक्रवार को बढ़कर 135.55 मीटर हो गया। इसमें खो हरेली बैराज से 10748 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस नदी के जलस्तर में दो दिन में बढ़ोत्तरी होना तय है।
विज्ञापन
दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर से अमृतपुर तहसील क्षेत्र के गांव माखन नगला, रामप्रकाश नगला, जटपुरा, कैलयाई, कुडरी सारंगपुर, वनासीपुर, फकरपुर, करनपुरघाट, मंझा प्रथम व द्वितीय, कालिका नगला, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, लायकपुर, नगरिया जवाहर, कुसुमापुर, कुवेरपुर, भाऊपुर चौरासी, कलक्टरगंज, वलीपट्टी, आसमपुर, सबलपुर, कंचनपुर, रामपुर जोगराजपुर, उदयपुर, आशा की मढैया, तीसराम की मढैया गौटिया, चाचूपुर, मैदा की मढैया, जसूपुर, कछुआ गाड़ा, सुंदरपुर, मुड़रा, अलादपुर भटौली, कोलासोता, खरगपुर तथा शमसाबाद ब्लाक क्षेत्र के गांव कटरी तौफीक, परसादी की मढैया, रुपपुर मंगलीपुर, समौचीपुर तराई, समौचीपुर चितार, कमथरी गांव बाढ़ से प्रभावित है।
कटरी तौफीक में बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है। लोगों की झोपड़ियों में पानी घुस गया है। मजबूरी में महिलाएं बैलगाड़ी या फिर ईंटों के चट्टों पर मिट्टी के चूल्हे रखकर भोजन बनाने को मजबूर हैं। बच्चे बुखार से पीड़ित हैं लेकिन डाक्टर नहीं आ रहे हैं। पेश है कटरी तौफीक गांव की पड़ताल करती रपट:-।
शुक्रवार सुबह करीब 7.30 बजे गांव कटरी तौफीक में महेशचंद्र की झोपड़ी में पानी भरा था। चारपाई पर उसके बच्चे चमेली, सचित बुखार में लेटे थे। महेशचंद्र की पत्नी मिथलेश देवी बैलगाड़ी पर मिट्टी का चूल्हा रखकर भोजन बना रही थीं। पूछने पर मिथलेश देवी ने कहा कि हर साल वह लोग बाढ़ की विभीषिका से जूझते हैं। लेकिन जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि आज तक बाढ़ से निजात नहीं दिलवा सका।
महेशचंद्र कहते हैं कि उनके बच्चों को तीन-चार दिन से बुखार आ रहा है लेकिन चिकित्सीय टीम देखने तक नहीं आई है। लेखपाल और कानूनगो ने पॉलीथिन तक उपलब्ध नहीं कराई है। जानवरों के बांधने तक की जगह नहीं है