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गांवों से बाढ़ का पानी निकलने से 12 सौ अधिक ग्रामीणों को बीमारियों ने घेरा
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अमृतपुर। गंगा और रामगंगा का जलस्तर कम होने के बाद बाढ़ प्रभावित गांव के लोग बीमार होने लगे हैं। दस गांवों में करीब 1200 लोग खांसी, बुखार, खुजली और आंखों की बीमारी से पीड़ित हैं। गलियों व रास्तों में कीचड़ से आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं।
शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 136.75 मीटर से घटकर चेेतावनी बिंदु 136.60 आ गया है। नरौरा बांध से 33 हजार 805 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 136.00 से 135.95 मीटर पर आ गया है। गंगा का जलस्तर कम होने से ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, सुंदरपुर, नगला दुगू, कछुआ गाढ़ा, भुड़रा, तीसराम की मडै़या, माखन नगला, रामप्रसाद नगला, मिघन नगला, कालिका नगला, जटपुरा समेत अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों में भरा पानी निकलना शुरू हो गया है। पानी निकलने से गांवों की गलियों व मुख्य मार्ग पर कीचड़ हो गया है। इससे गांव के लोगों को आने जाने में दिक्कत उठानी पड़ रही है। पानी कम होने के बाद से ग्रामीणों को बीमारियों ने घेरना शुरू कर दिया है। दस गांवों के करीब 1200 ग्रामीण खांसी, बुखार, जुकाम, खुजली की बीमारी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य टीमों के न जाने से ग्रामीणों को दवा नसीब नहीं हो रही है। इससे गांव के लोग परेशान हैं।
पशुओं में भी फैलने लगी बीमारी
बाढ़ प्रभावित गांवों से पानी उतरने के बाद पशुओं में भी बीमारियां फैलने लगी हैं। ग्रामीणों को पशुओं के स्वास्थ्य की चिंता सताने लगी है। पशुओं में खुरपका, मुंहपका बीमारी फैली हुई है। कई पशु बीमार हैं। पशु विभाग की ओर से टीकाकरण के लिए अभी तक कोई टीम नहीं भेजी गई है।
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हरसिंहपुर कायस्थ में 165 लोगों को दी गई दवा
बाढ़ प्रभावित गांव हरसिंहपुर कायस्थ में कई लोग खांसी, बुखार, जुकाम व खुजली से पीड़ित हैं। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को डॉ. गौरव वर्मा, डॉ. सुधीर सिंह व वार्ड ब्वाय राकेश कुमार की टीम गांव पहुंची। करीब 165 ग्रामीणों को दवा दी गई।
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शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 136.75 मीटर से घटकर चेेतावनी बिंदु 136.60 आ गया है। नरौरा बांध से 33 हजार 805 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 136.00 से 135.95 मीटर पर आ गया है। गंगा का जलस्तर कम होने से ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, सुंदरपुर, नगला दुगू, कछुआ गाढ़ा, भुड़रा, तीसराम की मडै़या, माखन नगला, रामप्रसाद नगला, मिघन नगला, कालिका नगला, जटपुरा समेत अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों में भरा पानी निकलना शुरू हो गया है। पानी निकलने से गांवों की गलियों व मुख्य मार्ग पर कीचड़ हो गया है। इससे गांव के लोगों को आने जाने में दिक्कत उठानी पड़ रही है। पानी कम होने के बाद से ग्रामीणों को बीमारियों ने घेरना शुरू कर दिया है। दस गांवों के करीब 1200 ग्रामीण खांसी, बुखार, जुकाम, खुजली की बीमारी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य टीमों के न जाने से ग्रामीणों को दवा नसीब नहीं हो रही है। इससे गांव के लोग परेशान हैं।
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पशुओं में भी फैलने लगी बीमारी
बाढ़ प्रभावित गांवों से पानी उतरने के बाद पशुओं में भी बीमारियां फैलने लगी हैं। ग्रामीणों को पशुओं के स्वास्थ्य की चिंता सताने लगी है। पशुओं में खुरपका, मुंहपका बीमारी फैली हुई है। कई पशु बीमार हैं। पशु विभाग की ओर से टीकाकरण के लिए अभी तक कोई टीम नहीं भेजी गई है।
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हरसिंहपुर कायस्थ में 165 लोगों को दी गई दवा
बाढ़ प्रभावित गांव हरसिंहपुर कायस्थ में कई लोग खांसी, बुखार, जुकाम व खुजली से पीड़ित हैं। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को डॉ. गौरव वर्मा, डॉ. सुधीर सिंह व वार्ड ब्वाय राकेश कुमार की टीम गांव पहुंची। करीब 165 ग्रामीणों को दवा दी गई।