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बदायूं मार्ग पर भरा पानी, मवेशियों के चारे का संकट

Tue, 03 Aug 2021 10:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 Aug 2021 10:48 PM IST
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Ganga is 10 cm from the danger mark. Away, over 55 villages submerged
फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर गांव चित्रकूट के पास बहते बाढ़ के पानी से गुजरते वाहन। - फोटो : FARRUKHABAD
गंगा खतरे के निशान से 10 सेमी. दूर, 55 से अधिक गांव जलमग्न
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फर्रुखाबाद। गंगा का जलस्तर मंगलवार को 136.95 मीटर पर स्थिर रहा। इसके बाद भी पानी फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर पहुंच गया। देर शाम जलस्तर बढ़कर 137 मीटर पर पहुंच गया। ये खतरे के निशान से 10 सेमी. दूर है। जनपद के 55 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। परिषदीय स्कूलों में पानी भरने से वहां के शिक्षकों को पानी के बीच से होकर जाना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या मवेशियों के चारे की है।
गंगा का जलस्तर मंगलवार को 136.95 मीटर पर स्थिर रहा लेकिन देर शाम ये बढ़कर 137 मीटर हो गया। नरौरा बांध से एक लाख 14,152 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे बुधवार को गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। पांचाल घाट पर बंधा के उस पार तक पानी ही पानी नजर आ रहा है।
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फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर गांव चित्रकूट के पास डिप (सड़क कटने से रोकने के लिए बनाई गई ढलान) पर दो फीट पानी बह रहा है। इससे दोपहिया वाहन चालकों को खासी दिक्कत हो रही है। उधर, शमसाबाद क्षेत्र में गांव चौरा के पास दूसरे दिन भी शाहजहांपुर मार्ग पर दो फीट पानी बहता रहा। इसके अलावा कटरी तौफीक गांव से रूपपुर मंगलीपुर मार्ग पर भी डेढ़ फीट पानी बह रहा है।
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जनपद के 55 से अधिक गांवों में पानी भरा है। इससे कई गांवों के लोगों ने ऊंचे स्थानों पर डेरा डाल दिया है। वहीं कई गांवों में लोग छतों पर डटे हैं। महिलाएं छतों पर ही भोजन बना रहीं हैं। सबसे अधिक समस्या मवेशियों के चारे की हो रही है। धान, मेंथा व मक्का की फसलें जलमग्न होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उधर रामगंगा का जलस्तर 134.65 से बढ़कर 134.75 मीटर पर पहुंच गया है। खो हरेली, रामनगर से रामगंगा में 4,813 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंगा व रामगंगा में चेतावनी बिंदु 136.60 और खतरे का निशान 137.10 मीटर पर है।
हैवतपुर गढ़िया के खेतों में पहुंचा पानी
बढ़पुर ब्लॉक के गांव पंखियन की मड़ैया, प्रथ्वीपुर की मड़ैया, दौली की मड़ैया, गया दीन की मड़ैया, छटा की मड़ैया, मातादीन की मड़ैया पहाड़पुर, धर्मपुर कटरी, ढिलावलपुर में पानी भर गया है। शहर सटे गांव हैवतपुर गढ़िया की तरफ पानी तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो दो दिन में कांशीराम कालोनी में गंगा का पानी घुस जाएगा।
आठ गांवों के ग्रामीणों को नाव का सहारा
अमृतपुर। गंगा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों में पानी भर है। वहीं गंगा का पानी बदायूं मार्ग चित्रकूट के पास डिप पर करीब दो फीट से अधिक पर बह रहा है। राजेपुर से होकर निविया चौराहे पर होकर बरेली मार्ग से जिला मुख्यालय आ जा रहे हैं। गंगा का पानी गांव व खेतों में भरने से पशुओं के चारे का संकट गहरा गया है।
गांव में पानी भर जाने से सभी रास्ते बंद हो गए हैं। इसलिए हरसिंहपुर कायस्थ, रामपुर, जोगराजपुर, उदयपुर, करनपुर घाट, कुड़री सारंगपुर, सैदापुर, तीसराम की मड़ैया के ग्रामीणों के आने-जाने का मात्र एक साधन नाव ही बनी हुई है। गांव में बाढ़ का पानी भरे होने से खाने पीने की सामग्री लेने जाने के लिए नाव का ही सहारा है। कानून गो महेंद्र पांडेय ने बताया कि बाढ़ से घिरे गांवों में 11 नावें लगा दी गईं हैं।
जान जोखिम में डाल कर आवागमन
हमीरपुर माखन नागला को जाने वाली सड़क ग्रामीणों द्वारा काट दिए जाने से पानी की धार तेज हो गई है। माखन नागला, फुलाह, रामप्रसाद नागला, जटपुरा कहिलियाई के ग्रामीणों के लिए यह मुख्य मार्ग है। ग्रामीण तहसील, ब्लॉक मुख्यालय पर दवा लेने के लिए अस्पताल आते जाते हैं।
कटी सड़क पर बह रहे पानी से ही गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीण रमेशचंद्र, सुरेश, रामहरी, सुखदेव रामनिवास आदि का कहना है कि नाव की कोई व्यवस्था तहसील प्रशासन ने अभी नहीं की है। लोग जानजोखिम में डाल कर निकल रहे हैं।
केरोसिन न होने से बाढ़ पीड़ितों को रात में दिक्कत
शमसाबाद। गांवों में बाढ़ का पानी भरने से एक दर्जन गांवों की बिजली काट दी गई है। इससे गांव के लोगों के सामने और समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि केरोसिन न मिलने से रात को गांव में अंधेरा रहता है। मोबाइल भी चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने केरोसिन दिलाने की मांग की है।
बाढ़ पीड़ित सुरक्षित स्थानों की ओर जाकर समय गुजारने के लिए मजबूर हैं। लोग सड़कों के किनारे पन्नी तानकर गुजर-बसर कर रहे हैं। कई परिवारों के पास गैस सिलिंडर न होने से वे ईंटों का चूल्हा बनाकर भोजन बना रहे हैं।

गांव कटरी तौफीक के परिषदीय विद्यालय को जाने वाले मार्ग पर पानी भरा होने से शिक्षक जान जोखिम में डालकर वहां पहुंच रहे हैं। गन्ना व धान की फसलें जलमग्न हैं। उप जिलाधिकारी सुनील कुमार यादव ने बताया कि केरोसिन की व्यवस्था जल्द कराई जाएगी। गांव में जो समस्याएं हैं, उन का भी निस्तारण कराया जाएगा।
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