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Farrukhabad News: फिर उफनाईं गंगा, खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर पानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतपुर। गंगा में फिर उफान पर होने से जलस्तर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर (सेमी.) ऊपर पहुंच गया है। बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें और बढ़ गई हैं। घरों में बाढ़ का पानी भरा होने के साथ भोजन के लिए राशन कमी और बनाने के इंतजाम न होने से जीवन दुखदाई होता जा रहा है। बिजली न होने से रात भी अंधेरे में गुजर रही है।
गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को जलस्तर पांच सेमी बढ़कर खतरे के निशान 137.10 मीटर से 20 सेमी. ऊपर 137.30 मीटर पर पहुंच गया। नरौरा बांध से एक लाख 44 हजार 582 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। वहीं रामगंगा का जलस्तर पांच सेमी घटकर 134.80 मीटर पर आ गया है। रामनगर बैराज से 10687 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
20 दिन से झेल रहे बाढ़ का प्रकोप
गंगा में आई बाढ़ का प्रकोप ग्रामीण करीब 20 दिन से झेल रहे हैं। इससे तहसील क्षेत्र के करीब 100 से अधिक गांव के ग्रामीण मुसीबत में हैं। घरों में बाढ़ का पानी भरा होने से रहने के लिए जगह नहीं बची। इससे ग्रामीण सड़क के किनारे या छतों पर रह रहे हैं। बारिश में मुसीबत और बढ़ जाती है। बाढ़ व बारिश से लकड़ी, कंडा भीग चुका है, गैस सिलिंडर भराने के लिए रुपये नहीं है। इससे रोटी के भी लाले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बाढ़ आती थी, एक सप्ताह बाद गांवों से पानी निकल जाता था। इस बार तो पानी कम ही नहीं हो रहा है।
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बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने कोई जनप्रतिनिधि भी नहीं आ रहा है। तहसील प्रशासन से मिली राहत सामग्री समाप्त होने लगी है। सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारे की है। राहत सामग्री के साथ एक-एक मोमबत्ती का पैकट मिला था। वह भी खत्म हो गया। बाढ़ के पानी से लगातार घुसकर निकलने से ग्रामीणों के पैर की अंगुलियां सड़ने लगी हैं। इससे उन्हें चलने में भी दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी फैल रही है। जुखाम, बुखार, खुजली व आंखों की बीमारी से लोग परेशान हैं। इसके बावजूद गांव में स्वास्थ्य टीमें नहीं आ रही हैं।
शिविर लगाने नहीं पहुंची रैपिड रिस्पांस टीम
बाढ़ पीड़ितों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए ब्लाक राजेपुर क्षेत्र में आठ रैपिड रिस्पांस टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक टीम में डॉक्टर सहित चार स्वास्थ्य कर्मी लगाए गए। बुधवार को शेड्यूल के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांव खुशहाली नगला, अंबरपुर, सुभानपुर, फकरपुर, जिठौली, सुंदरपुर व चाचूपुर में स्वास्थ्य शिविर लगाने के आदेश थे। किसी भी गांव में रैपिड रिस्पांस टीम शिविर लगाने नहीं पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्लोरीन की गोलियों का भी वितरण नहीं किया गया। इससे बाढ़ पीड़ित दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य सेवाएं कागजों पर ही चल रही हैं।
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बाढ़ के पानी से मुख्य मार्ग पर हुआ गड्ढा, कई बाइक सवार चोटिल
शमसाबाद। शाहजहांपुर-शमशाबाद मुख्य मार्ग पर चौराहार गांव के सामने कई दिनों से गंगा की बाढ़ का पानी भरा है। मुख्य मार्ग पर गड्ढा हो गया। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने ट्रैक्टरों का आवागमन बंद करा दिया। सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी भरा होने के कारण छोटे वाहनों का आवागमन रोेक दिया गया। मिर्जापुर गांव के निवासी तथा रुपापुर चीनी मिल के गन्ना ग्राम सेवक धनपाल सुबह बाइक से आ रहे थे। गड्ढे में फंस कर बाढ़ के पानी में गिर गए। पैदल निकल रहे राहगीरों ने गन्ना ग्रामसेवक की बाइक को बाढ़ के पानी से निकाला।
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अमृतपुर। गंगा में फिर उफान पर होने से जलस्तर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर (सेमी.) ऊपर पहुंच गया है। बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें और बढ़ गई हैं। घरों में बाढ़ का पानी भरा होने के साथ भोजन के लिए राशन कमी और बनाने के इंतजाम न होने से जीवन दुखदाई होता जा रहा है। बिजली न होने से रात भी अंधेरे में गुजर रही है।
गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को जलस्तर पांच सेमी बढ़कर खतरे के निशान 137.10 मीटर से 20 सेमी. ऊपर 137.30 मीटर पर पहुंच गया। नरौरा बांध से एक लाख 44 हजार 582 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। वहीं रामगंगा का जलस्तर पांच सेमी घटकर 134.80 मीटर पर आ गया है। रामनगर बैराज से 10687 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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20 दिन से झेल रहे बाढ़ का प्रकोप
गंगा में आई बाढ़ का प्रकोप ग्रामीण करीब 20 दिन से झेल रहे हैं। इससे तहसील क्षेत्र के करीब 100 से अधिक गांव के ग्रामीण मुसीबत में हैं। घरों में बाढ़ का पानी भरा होने से रहने के लिए जगह नहीं बची। इससे ग्रामीण सड़क के किनारे या छतों पर रह रहे हैं। बारिश में मुसीबत और बढ़ जाती है। बाढ़ व बारिश से लकड़ी, कंडा भीग चुका है, गैस सिलिंडर भराने के लिए रुपये नहीं है। इससे रोटी के भी लाले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बाढ़ आती थी, एक सप्ताह बाद गांवों से पानी निकल जाता था। इस बार तो पानी कम ही नहीं हो रहा है।
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बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने कोई जनप्रतिनिधि भी नहीं आ रहा है। तहसील प्रशासन से मिली राहत सामग्री समाप्त होने लगी है। सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारे की है। राहत सामग्री के साथ एक-एक मोमबत्ती का पैकट मिला था। वह भी खत्म हो गया। बाढ़ के पानी से लगातार घुसकर निकलने से ग्रामीणों के पैर की अंगुलियां सड़ने लगी हैं। इससे उन्हें चलने में भी दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी फैल रही है। जुखाम, बुखार, खुजली व आंखों की बीमारी से लोग परेशान हैं। इसके बावजूद गांव में स्वास्थ्य टीमें नहीं आ रही हैं।
शिविर लगाने नहीं पहुंची रैपिड रिस्पांस टीम
बाढ़ पीड़ितों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए ब्लाक राजेपुर क्षेत्र में आठ रैपिड रिस्पांस टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक टीम में डॉक्टर सहित चार स्वास्थ्य कर्मी लगाए गए। बुधवार को शेड्यूल के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांव खुशहाली नगला, अंबरपुर, सुभानपुर, फकरपुर, जिठौली, सुंदरपुर व चाचूपुर में स्वास्थ्य शिविर लगाने के आदेश थे। किसी भी गांव में रैपिड रिस्पांस टीम शिविर लगाने नहीं पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्लोरीन की गोलियों का भी वितरण नहीं किया गया। इससे बाढ़ पीड़ित दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य सेवाएं कागजों पर ही चल रही हैं।
बाढ़ के पानी से मुख्य मार्ग पर हुआ गड्ढा, कई बाइक सवार चोटिल
शमसाबाद। शाहजहांपुर-शमशाबाद मुख्य मार्ग पर चौराहार गांव के सामने कई दिनों से गंगा की बाढ़ का पानी भरा है। मुख्य मार्ग पर गड्ढा हो गया। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने ट्रैक्टरों का आवागमन बंद करा दिया। सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी भरा होने के कारण छोटे वाहनों का आवागमन रोेक दिया गया। मिर्जापुर गांव के निवासी तथा रुपापुर चीनी मिल के गन्ना ग्राम सेवक धनपाल सुबह बाइक से आ रहे थे। गड्ढे में फंस कर बाढ़ के पानी में गिर गए। पैदल निकल रहे राहगीरों ने गन्ना ग्रामसेवक की बाइक को बाढ़ के पानी से निकाला।