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धान की फसल पर गंधी बग का भी हमला
ब्यूरो/ अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Tue, 15 Sep 2015 11:08 PM IST
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धान की फसल में पत्ता लपेटक सूड़ी के साथ ही गंधी बग का भी हमला हुआ है।
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मंगलवार को धान की फसल का जायजा लेने इलाके में पहुंचे जिला कृषि अधिकारी
और कृषि वैज्ञानिक ने इसकी तस्दीक की है। इन हालातों में किसानों को धान की
50 फीसदी फसल बचने की उम्मीद भी टूटती लग रही है।
अमृतपुर व राजेपुर इलाके में 800 हेक्टेयर में धान की फसल बोई जाती है। इस समय धान बाली पर है। पत्ता लपेटक सूड़ी ने फसल पर हमला बोल दिया है। यह पत्ती को लपेटकर खुद को उसमें बंद कर पत्ती का हरा रंग चूसकर पौधे को सुखा देती है। इसकी चपेट में करीब 50 फीसदी फसल है। मंगलवार को जिला कृषि अधिकारी एके सचान, कृषि वैज्ञानिक डा. जगदीश किशोर,
एडीओ कृषि रामनंदन लाल व कृषि रक्षा पर्यवेक्षक रामशब्द इलाके में पहुंचे। इन्होंने खानपुर, अंबरपुर व ताजपुर में धान की फसल का जायजा लिया। डा. जगदीश किशोर ने बताया कि पत्ता लपेटक सूड़ी के साथ ही गंधी बग ने भी हमला बोल दिया है। यह भी फसल को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है।
एक बीघा में अब तक 6 हजार खर्च
एक बीघा धान की फसल में किसान अब तक 6 हजार रुपये के करीब खर्च कर चुके हैं। फसल में 10 सिंचाई की जा चुकी हैं। किसानों को एक बीघा में 5 से 6 क्विंटल धान की पैदावार की उम्मीद थी। ताजा हालातों में 2 क्विंटल पैदावार की उम्मीद भी नहीं लग रही है। किसानों का कहना है कि पिछली बार धान की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई थी। आलू की मंदी ने भी घाटा दिया था। इसी फसल से उम्मीद बची थी। यह भी टूटने लगी हैं।
अमृतपुर व राजेपुर इलाके में 800 हेक्टेयर में धान की फसल बोई जाती है। इस समय धान बाली पर है। पत्ता लपेटक सूड़ी ने फसल पर हमला बोल दिया है। यह पत्ती को लपेटकर खुद को उसमें बंद कर पत्ती का हरा रंग चूसकर पौधे को सुखा देती है। इसकी चपेट में करीब 50 फीसदी फसल है। मंगलवार को जिला कृषि अधिकारी एके सचान, कृषि वैज्ञानिक डा. जगदीश किशोर,
एडीओ कृषि रामनंदन लाल व कृषि रक्षा पर्यवेक्षक रामशब्द इलाके में पहुंचे। इन्होंने खानपुर, अंबरपुर व ताजपुर में धान की फसल का जायजा लिया। डा. जगदीश किशोर ने बताया कि पत्ता लपेटक सूड़ी के साथ ही गंधी बग ने भी हमला बोल दिया है। यह भी फसल को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है।
एक बीघा में अब तक 6 हजार खर्च
एक बीघा धान की फसल में किसान अब तक 6 हजार रुपये के करीब खर्च कर चुके हैं। फसल में 10 सिंचाई की जा चुकी हैं। किसानों को एक बीघा में 5 से 6 क्विंटल धान की पैदावार की उम्मीद थी। ताजा हालातों में 2 क्विंटल पैदावार की उम्मीद भी नहीं लग रही है। किसानों का कहना है कि पिछली बार धान की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई थी। आलू की मंदी ने भी घाटा दिया था। इसी फसल से उम्मीद बची थी। यह भी टूटने लगी हैं।