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असम की मंडी पर फर्रुखाबादी आलू की पकड़ ढीली
Tue, 01 Jan 2019 11:24 PM IST
मनोज कुमार
farrukhabad
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Published by: मनोज कुमार
Updated Tue, 01 Jan 2019 11:24 PM IST
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आलू की खपत की प्रमुख मंडी असम पर यहां के आलू की पकड़ ढीली होती जा रही है। असम की मंडी पर बंगाल और बिहार ने अपना कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। असम को बिहार और बंगाल की मंडियां 100 रुपये प्रति क्विंटल सस्ता आलू उपलब्ध करा रही हैं। मांग न होने से आलू का भाव एक सप्ताह से 400-450 रुपये प्रति क्विंटल पर ही अटका है। इससे किसान चिंतित हैं।
असम को फर्रुखाबाद के आलू की खपत का प्रमुख मंडी माना जाता रहा है। जब तक बंगाल और बिहार में आलू नहीं होता था तो यहां के व्यापारियों के लिए असम सबसे अधिक कमाई की मंडी थी। पड़ोसी राज्य बंगाल और बिहार में आलू की पैदावार होने से वहां के व्यापारियों ने असम को आलू भेजना शुरू कर दिया। जानकारों की मानें तो क्वालिटी में फर्रुखाबादी आलू को असम में पसंद किया जाता है, लेकिन यहां से मोटर द्वारा भेजे जाने वाले आलू का भाड़ा अधिक पड़ता है। इससे भाव में बंगाल और बिहार बाजी मार लेता है।
20 दिसंबर के बाद मोटर से भेजे जाने वाले आलू पर व्यापारियों को 100 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाना पड़ रहा है। आढ़ती जयंती राजपूत ने बताया कि बिहार के गुलाबबाग और बंगाल के धूबगुड़ी के आलू ने फर्रुखाबादी आलू को भाव में पीटना शुरू कर दिया है। इससे यहां के आलू का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। वहीं, पंजाब भी असम को सस्ता आलू उपलब्ध कराने में पीछे नहीं है। इससे यहां के आलू की मांग असम में घटी है।
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असम को फर्रुखाबाद के आलू की खपत का प्रमुख मंडी माना जाता रहा है। जब तक बंगाल और बिहार में आलू नहीं होता था तो यहां के व्यापारियों के लिए असम सबसे अधिक कमाई की मंडी थी। पड़ोसी राज्य बंगाल और बिहार में आलू की पैदावार होने से वहां के व्यापारियों ने असम को आलू भेजना शुरू कर दिया। जानकारों की मानें तो क्वालिटी में फर्रुखाबादी आलू को असम में पसंद किया जाता है, लेकिन यहां से मोटर द्वारा भेजे जाने वाले आलू का भाड़ा अधिक पड़ता है। इससे भाव में बंगाल और बिहार बाजी मार लेता है।
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20 दिसंबर के बाद मोटर से भेजे जाने वाले आलू पर व्यापारियों को 100 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाना पड़ रहा है। आढ़ती जयंती राजपूत ने बताया कि बिहार के गुलाबबाग और बंगाल के धूबगुड़ी के आलू ने फर्रुखाबादी आलू को भाव में पीटना शुरू कर दिया है। इससे यहां के आलू का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। वहीं, पंजाब भी असम को सस्ता आलू उपलब्ध कराने में पीछे नहीं है। इससे यहां के आलू की मांग असम में घटी है।
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