{"_id":"6254726d9d7dd7370b7c0e22","slug":"farrukhabad-news-farrukhabad-news-knp690664395","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिश्वत के मामले में फंसे डीपीओ ने नहीं दिया जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिश्वत के मामले में फंसे डीपीओ ने नहीं दिया जवाब
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को और सहायिकाओं की भर्ती में रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल होने के मामले में डीपीओ फंसे हैं। जिलाधिकारी के मांगने के आदेश के बाद भी डीपीओ ने अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। इससे अब तीन दिन बाद शासन को जांच रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
जनपद में नवंबर 2021 में शुरू हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती के दौरान सहायिकाओं से प्रमोशन के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शमसाबाद के गांव सुल्तानगंज खरेटा निवासी सहायिका वसुधा के पति विजय शर्मा से भी रिश्वत मांगी गई।
डीपीओ कार्यालय से संबद्ध रहीं संविदा पर तैनात महिला अधिकारी व उनके भाई से फोन पर रिश्वत मांगने के संबंध में हुई बातचीत का ऑडियो विजय शर्मा ने वायरल कर दिया था। बाद में हलफनामा देकर शिकायत भी की थी। डीएम ने डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक की अध्यक्षता में वरिष्ठ कोषाधिकारी अतुल तिवारी व एसडीएम नरेंद्र सिंह की कमेटी बनाकर जांच कराई।
विज्ञापन
इसमें आरक्षण में शासनादेश का उल्लंघन, रिक्त पदों के केंद्रों के नाम न खोलने, 32 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मनमाने ढंग से मानदेय रोकने में डीपीओ दोषी पाए गए हैं। महिला अधिकारी व उसके भाई पर कार्रवाई न करने पर जांच कमेटी ने सवाल उठाए और कार्रवाई की संस्तुति की है।
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर डीपीओ ने कोई जवाब नहीं दिया। तीन दिन में डीपीओ का पक्ष न मिलने पर कार्रवाई के लिए पत्रावली शासन को भेज दी जाएंगी।
विज्ञापन
जनपद में नवंबर 2021 में शुरू हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती के दौरान सहायिकाओं से प्रमोशन के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शमसाबाद के गांव सुल्तानगंज खरेटा निवासी सहायिका वसुधा के पति विजय शर्मा से भी रिश्वत मांगी गई।
विज्ञापन
डीपीओ कार्यालय से संबद्ध रहीं संविदा पर तैनात महिला अधिकारी व उनके भाई से फोन पर रिश्वत मांगने के संबंध में हुई बातचीत का ऑडियो विजय शर्मा ने वायरल कर दिया था। बाद में हलफनामा देकर शिकायत भी की थी। डीएम ने डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक की अध्यक्षता में वरिष्ठ कोषाधिकारी अतुल तिवारी व एसडीएम नरेंद्र सिंह की कमेटी बनाकर जांच कराई।
विज्ञापन
इसमें आरक्षण में शासनादेश का उल्लंघन, रिक्त पदों के केंद्रों के नाम न खोलने, 32 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मनमाने ढंग से मानदेय रोकने में डीपीओ दोषी पाए गए हैं। महिला अधिकारी व उसके भाई पर कार्रवाई न करने पर जांच कमेटी ने सवाल उठाए और कार्रवाई की संस्तुति की है।
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर डीपीओ ने कोई जवाब नहीं दिया। तीन दिन में डीपीओ का पक्ष न मिलने पर कार्रवाई के लिए पत्रावली शासन को भेज दी जाएंगी।