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रेफर के पौन घंटे लोहिया में पड़ा रहा बंदी
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फर्रुखाबाद। जिला जेल में बवाल में घायल बंदी शिवम को लोहिया अस्पताल के डॉक्टर ने सैफई रेफर कर दिया। सैफई ले जाने की जिम्मेदारी से पुलिसकर्मी और जेल कर्मी बचते रहे। इससे करीब पौन घंटे तक बंदी लोहिया में पड़ा रहा। इस दौरान उसकी हालत और बिगड़ गई। सैफई अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
घायल बंदी शिवम को जिला जेल से 10:35 बजे लोहिया अस्पताल की इमजरेंसी लाया गया। बंदी के साथ आए दरोगा से फार्मासिस्ट ने नाम पूछा। दरोगा ने जेल कर्मी की जिम्मेदारी बताकर अपना नाम बताने से इनकार कर दिया। इसके बाद जेल के एंबुलेंस चालक सुनील कुमार सैनी ने अपना नाम लिखवाया।
डॉ. अभिषेक चतुर्वेदी ने गंभीर हालत होने से बंदी को सैफई रेफर कर दिया। बंदी को सैफई कौन लेकर जाएगा, इसकी जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं हुआ। दरोगा ने जेल एंबुलेंस चालक को अस्पताल में रोक लिया और जेल से बंदी रक्षक व अन्य किसी के आने की बात कही। करीब पौन घंटे तक बंदी तक खींचतान चलती रही।
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11:15 बजे सीओ सोहराब आलम लोहिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने जेल की एंबुलेंस पर बंदी को लिटवाया और एंबुलेंस चालक को जिम्मेदारी सौंपी। बंदी के साथ पुलिस कमियों को जाने के निर्देश दिए। जेल एंबुलेंस की स्थिति ठीक नहीं थी, इस पर 108 एंबुलेंस बुलाई गई। 11:25 बजे 108 एंबुलेंस आई। उससे बंदी शिवम को लिटाया गया। उसी समय उसकी हालत नाजुक हो गई थी। उसके हाथ पैर झूल गए थे। सैफई अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर ने बंदी को मृत घोषित कर दिया गया। शाम को शव लोहिया अस्पताल लाया गया। सीओ सोहराब आलम पुलिस बल के साथ लोहिया अस्पताल में मौजूद रहे।
माता-पिता का इकलौता पुत्र था शिवम
बंदी शिवम माता-पिता का इकलौता पुत्र था। मां की बचपन में ही मौत हो गई थी। उसके पिता को लकवा मार गया है। वह अकेले ही घर में रहते हैं। वह चोरी व गैंगस्टर के मुकदमे में जेल में बंद था। राजेपुर थाना क्षेत्र के गांव जैनापुर निवासी मुन्ना राठौर का पुत्र शिवम (22) शहर के मोहल्ला अंगूरीबाग में किराए के मकान में रहता था। वह चोरी के आरोप में जिला जेल में बंद था। शहर कोतवाली पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर का मुकदमा भी दर्ज कराया था। रविवार को जिला जेल में पथराव के दौरान पेट फटने से शिवम गंभीर रूप से घायल हो गया था। सैफई अस्पताल में डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। शिवम माता-पिता का इकलौता पुत्र था। मां की बचपन में ही मौत हो गई थी। पिता को कुछ दिन पहले लकवा मार गया था। वह गांव में अकेले रहते हैं। बहन की बेवर में ससुराल है। पुलिस ने पिता को सूचना भिजवाई, लेकिन शाम तक कोई परिजन लोहिया अस्पताल नहीं पहुंचा था।
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घायल बंदी शिवम को जिला जेल से 10:35 बजे लोहिया अस्पताल की इमजरेंसी लाया गया। बंदी के साथ आए दरोगा से फार्मासिस्ट ने नाम पूछा। दरोगा ने जेल कर्मी की जिम्मेदारी बताकर अपना नाम बताने से इनकार कर दिया। इसके बाद जेल के एंबुलेंस चालक सुनील कुमार सैनी ने अपना नाम लिखवाया।
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डॉ. अभिषेक चतुर्वेदी ने गंभीर हालत होने से बंदी को सैफई रेफर कर दिया। बंदी को सैफई कौन लेकर जाएगा, इसकी जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं हुआ। दरोगा ने जेल एंबुलेंस चालक को अस्पताल में रोक लिया और जेल से बंदी रक्षक व अन्य किसी के आने की बात कही। करीब पौन घंटे तक बंदी तक खींचतान चलती रही।
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11:15 बजे सीओ सोहराब आलम लोहिया अस्पताल पहुंचे। उन्होंने जेल की एंबुलेंस पर बंदी को लिटवाया और एंबुलेंस चालक को जिम्मेदारी सौंपी। बंदी के साथ पुलिस कमियों को जाने के निर्देश दिए। जेल एंबुलेंस की स्थिति ठीक नहीं थी, इस पर 108 एंबुलेंस बुलाई गई। 11:25 बजे 108 एंबुलेंस आई। उससे बंदी शिवम को लिटाया गया। उसी समय उसकी हालत नाजुक हो गई थी। उसके हाथ पैर झूल गए थे। सैफई अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर ने बंदी को मृत घोषित कर दिया गया। शाम को शव लोहिया अस्पताल लाया गया। सीओ सोहराब आलम पुलिस बल के साथ लोहिया अस्पताल में मौजूद रहे।
माता-पिता का इकलौता पुत्र था शिवम
बंदी शिवम माता-पिता का इकलौता पुत्र था। मां की बचपन में ही मौत हो गई थी। उसके पिता को लकवा मार गया है। वह अकेले ही घर में रहते हैं। वह चोरी व गैंगस्टर के मुकदमे में जेल में बंद था। राजेपुर थाना क्षेत्र के गांव जैनापुर निवासी मुन्ना राठौर का पुत्र शिवम (22) शहर के मोहल्ला अंगूरीबाग में किराए के मकान में रहता था। वह चोरी के आरोप में जिला जेल में बंद था। शहर कोतवाली पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर का मुकदमा भी दर्ज कराया था। रविवार को जिला जेल में पथराव के दौरान पेट फटने से शिवम गंभीर रूप से घायल हो गया था। सैफई अस्पताल में डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। शिवम माता-पिता का इकलौता पुत्र था। मां की बचपन में ही मौत हो गई थी। पिता को कुछ दिन पहले लकवा मार गया था। वह गांव में अकेले रहते हैं। बहन की बेवर में ससुराल है। पुलिस ने पिता को सूचना भिजवाई, लेकिन शाम तक कोई परिजन लोहिया अस्पताल नहीं पहुंचा था।