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पीपा पुल बनने से दूरी हुई कम पर जान खतरे में
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अमृतपुर। रामगंगा के महुलिया घाट पर पीपा पुल बनने से क्षेत्र के लोगों के लिए शाहजहांपुर व हरदोई की दूरी तो कम हुई है लेकिन खतरा बढ़ गया है। जरा सी लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। दरअसल, पुल पर डाले गए पटरे बोल्टों से ठीक से कसे नहीं गए हैं। पुल के दोनों ओर रस्सी या तार से बैरीकेडिंग की गई है। इससे हादसे का डर बना हुआ है।
तहसील क्षेत्र में रामगंगा के महुलिया घाट पर पीपा पुल बनाने के आदेश शासन ने पिछले वर्ष दिया था, लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते पुल का निर्माण नहीं हो सका था। इसकी शिकायत भी अधिकारियों से की गई थी। इसके चलते इस बार अप्रैल के प्रथम सप्ताह में ही विभाग ने पुल बनाकर तैयार कर दिया है।
इससे आवागमन तो शुरू हो गया है लेकिन खतरा भी बढ़ गया है। पुल पर जो पटरे डाले गए हैं, उसमें कई तो पुराने घुने हुए हैं। पटरे कम पड़े तो बल्लियां डाल दी गई हैं। वह इधर-उधर भागे न और एक जगह बनी रहें, इसके लिए उन्हें आपस में बांधा तक नहीं गया है।
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न ही पटरों पर लोहे की चादरें डाली गई हैं। इससे बाइक आदि वाहन निकलने पर पटरे इधर-उधर भागते हैं। इसके अलावा पुल के दोनों ओर बैरीकेडिंग भी नहीं की गई है। इस तरह कभी हादसा हो सकता है।
किसानों को मिल रहा खासा लाभ
अमृतपुर क्षेत्र के कई किसानों के खेत रामगंगा के दूसरी तरफ हैं। पीपा पुल के बनने से इन किसानों को खास लाभ हुआ है। वह आसानी से अब अपने खेतों में पहुंच जाते हैं। पहले नाव आदि से रामगंगा पार करते थे। किसानों का कहना है कि ठेकेदार ने मनमाने तरीके से पुल बनाया है। किसान अपनी फसलों को काट कर घर ले जाने के लिए इसी रास्ते से आते जाते हैं। कभी कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
पुल बनने से किसानों के साथ कायमगंज के लोगों को भी लाभ
पीपा पुल बनने से अमृतपुर क्षेत्र के लिए लोगों को शाहजहांपुर के अल्लाहगंज जाने में आसानी हो गई है। उन्हें 10 किलोमीटर दूरी कम तय करनी पड़ रही है। पहले अल्लाहगंज जाने के लिए अमृतपुर के लोगों को राजेपुर, हुल्लापुर होते हुए 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी।
अल्लागंज होते हुए हरदोई जाने के लिए इस मार्ग को कायमगंज क्षेत्र के लोग भी उपयोग कर सकते हैं। वह ढाई घाट होते हुए महुलिया घाट पहुंचने के बाद अल्लाहगंज पहुंचकर हरदोई व शाहजहांपुर जा सकते हैं।
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तहसील क्षेत्र में रामगंगा के महुलिया घाट पर पीपा पुल बनाने के आदेश शासन ने पिछले वर्ष दिया था, लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते पुल का निर्माण नहीं हो सका था। इसकी शिकायत भी अधिकारियों से की गई थी। इसके चलते इस बार अप्रैल के प्रथम सप्ताह में ही विभाग ने पुल बनाकर तैयार कर दिया है।
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इससे आवागमन तो शुरू हो गया है लेकिन खतरा भी बढ़ गया है। पुल पर जो पटरे डाले गए हैं, उसमें कई तो पुराने घुने हुए हैं। पटरे कम पड़े तो बल्लियां डाल दी गई हैं। वह इधर-उधर भागे न और एक जगह बनी रहें, इसके लिए उन्हें आपस में बांधा तक नहीं गया है।
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न ही पटरों पर लोहे की चादरें डाली गई हैं। इससे बाइक आदि वाहन निकलने पर पटरे इधर-उधर भागते हैं। इसके अलावा पुल के दोनों ओर बैरीकेडिंग भी नहीं की गई है। इस तरह कभी हादसा हो सकता है।
किसानों को मिल रहा खासा लाभ
अमृतपुर क्षेत्र के कई किसानों के खेत रामगंगा के दूसरी तरफ हैं। पीपा पुल के बनने से इन किसानों को खास लाभ हुआ है। वह आसानी से अब अपने खेतों में पहुंच जाते हैं। पहले नाव आदि से रामगंगा पार करते थे। किसानों का कहना है कि ठेकेदार ने मनमाने तरीके से पुल बनाया है। किसान अपनी फसलों को काट कर घर ले जाने के लिए इसी रास्ते से आते जाते हैं। कभी कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
पुल बनने से किसानों के साथ कायमगंज के लोगों को भी लाभ
पीपा पुल बनने से अमृतपुर क्षेत्र के लिए लोगों को शाहजहांपुर के अल्लाहगंज जाने में आसानी हो गई है। उन्हें 10 किलोमीटर दूरी कम तय करनी पड़ रही है। पहले अल्लाहगंज जाने के लिए अमृतपुर के लोगों को राजेपुर, हुल्लापुर होते हुए 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी।
अल्लागंज होते हुए हरदोई जाने के लिए इस मार्ग को कायमगंज क्षेत्र के लोग भी उपयोग कर सकते हैं। वह ढाई घाट होते हुए महुलिया घाट पहुंचने के बाद अल्लाहगंज पहुंचकर हरदोई व शाहजहांपुर जा सकते हैं।