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कुएं में मिट्टी धंसने से दो लोग दबे, एक मरा, दूसरा गंभीर
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गांव अलेपुर में कुएं से अशरफ को निकलते पुलिस कर्मी व अन्य। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
शमसाबाद। कई साल से बंद नलकूप के कुएं से ईंटें निकालने घुसे दो लोगों पर मिट्टी धंस गई। दोनों दब गए। चार जेसीबी, ट्रैक्टरों के तीन घंटे प्रयास के बाद दोनों को निकाला गया। एक की मौत हो गई। दूसरे की हालत गंभीर है। परिजनों ने एंबुलेंस में ऑक्सीजन न होने का आरोप लगाकर हंगामा किया। एसडीएम सदर के समझाने पर परिजन शांत हुए।
थाना क्षेत्र के गांव अलेपुर निवासी अशरफ खां (60) का नलूकप कई वर्ष पहले ठप हो गया था। उसकी ईंटें निकालने के लिए अशरफ गुरुवार सुबह आठ बजे गांव के नंदन राजपूत (55) के साथ वहां पहुंचे। दोनों ईंटें निकालने के लिए कुएं में उतर गए। अशरफ का दामाद ऊपर खड़ा ईंटें खींच रहा था। कुएं में अशरफ व नंदन ईंटें निकाल ही रहे थे कि नौ बजे कुएं की मिट्टी धंस गई। दोनों उसमें दब गए। कुएं में ससुर और नंदन के दब जाने पर अलहेपुर निवासी सेना के जवान दामाद सफरुद्दीन ने शोर मचा। पड़ोसी खेत में काम कर रहे नंदन के चचेरे भाई श्यामसुंदर भागकर पहुंचे। वे भी कुएं में रस्सी डालकर घुसने लगे। तब तक कई लोग पहुंच गए। कुएं में कुछ नीचे उतरे ही थे कि फिर से मिट्टी की बढ़ी ढांग धंस गई। इससे श्याम सुंदर भी दब गए। ऊपर खड़े लोगों ने आनन-फानन में श्यामसुंदर को खींच लिया।
इतनी ही देर में गांव के तमाम लोग पहुंच गए। सूचना पर थाना पुलिस भी पहुंच गई और चार जेसीबी और ट्रैक्टरों को लगाकर तीन घंटे बाद दोनों को बाहर निकाला गया। पहले से खड़ी एंबुलेंस से नंदन राजपूत और अशरफ खां को लोहिया अस्पताल लाया गया। यहां डा. प्रदीप कुमार ने नंदन राजपूत को मृत घोषित कर दिया। नंदन के बेटे पंकज और शिवम, बेटी पूजा और शिवानी, पत्नी रामप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
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कुएं से निकालकर नंदन राजपूत और अशरफ खां को दोपहर 12 बजे लोहिया अस्पताल लाया गया। डॉ. प्रदीप सिंह ने नंदन राजपूत को मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजन आग बबूला हो और उन्होंने एंबुलेंस में ऑक्सीजन न लगाने का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर आवास विकास चौकी प्रभारी विशेष कुमार ने समझाने का प्रयास किया, तो परिजन बिफर गए। कुछ ही देर में घुमना चौकी प्रभारी शिवशंकर प्रसाद तिवारी पहुंचे, तो उनसे भी परिजनों की तूतू-मैंमैं हो गई। आधा घंटे बाद एसडीएम सदर अनिल कुमार अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एंबुलेंस मंगवाई और ऑक्सीजन के सिलिंडर दिखाए। एंबुलेंस स्टाफ ने बताया कि उन्होंने एंबुलेंस में दोनों को चेक किया था। नंदन की सांसें न आने की वजह से ऑक्सीजन नहीं लगाया गया। एबुलेंस में एक ही सिलेंडर होता है, सो अशरफ को लगाना जरूरी समझा। एसडीएम के समझाने पर परिजन मान गए।
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थाना क्षेत्र के गांव अलेपुर निवासी अशरफ खां (60) का नलूकप कई वर्ष पहले ठप हो गया था। उसकी ईंटें निकालने के लिए अशरफ गुरुवार सुबह आठ बजे गांव के नंदन राजपूत (55) के साथ वहां पहुंचे। दोनों ईंटें निकालने के लिए कुएं में उतर गए। अशरफ का दामाद ऊपर खड़ा ईंटें खींच रहा था। कुएं में अशरफ व नंदन ईंटें निकाल ही रहे थे कि नौ बजे कुएं की मिट्टी धंस गई। दोनों उसमें दब गए। कुएं में ससुर और नंदन के दब जाने पर अलहेपुर निवासी सेना के जवान दामाद सफरुद्दीन ने शोर मचा। पड़ोसी खेत में काम कर रहे नंदन के चचेरे भाई श्यामसुंदर भागकर पहुंचे। वे भी कुएं में रस्सी डालकर घुसने लगे। तब तक कई लोग पहुंच गए। कुएं में कुछ नीचे उतरे ही थे कि फिर से मिट्टी की बढ़ी ढांग धंस गई। इससे श्याम सुंदर भी दब गए। ऊपर खड़े लोगों ने आनन-फानन में श्यामसुंदर को खींच लिया।
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इतनी ही देर में गांव के तमाम लोग पहुंच गए। सूचना पर थाना पुलिस भी पहुंच गई और चार जेसीबी और ट्रैक्टरों को लगाकर तीन घंटे बाद दोनों को बाहर निकाला गया। पहले से खड़ी एंबुलेंस से नंदन राजपूत और अशरफ खां को लोहिया अस्पताल लाया गया। यहां डा. प्रदीप कुमार ने नंदन राजपूत को मृत घोषित कर दिया। नंदन के बेटे पंकज और शिवम, बेटी पूजा और शिवानी, पत्नी रामप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
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कुएं से निकालकर नंदन राजपूत और अशरफ खां को दोपहर 12 बजे लोहिया अस्पताल लाया गया। डॉ. प्रदीप सिंह ने नंदन राजपूत को मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजन आग बबूला हो और उन्होंने एंबुलेंस में ऑक्सीजन न लगाने का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर आवास विकास चौकी प्रभारी विशेष कुमार ने समझाने का प्रयास किया, तो परिजन बिफर गए। कुछ ही देर में घुमना चौकी प्रभारी शिवशंकर प्रसाद तिवारी पहुंचे, तो उनसे भी परिजनों की तूतू-मैंमैं हो गई। आधा घंटे बाद एसडीएम सदर अनिल कुमार अस्पताल पहुंचे। उन्होंने एंबुलेंस मंगवाई और ऑक्सीजन के सिलिंडर दिखाए। एंबुलेंस स्टाफ ने बताया कि उन्होंने एंबुलेंस में दोनों को चेक किया था। नंदन की सांसें न आने की वजह से ऑक्सीजन नहीं लगाया गया। एबुलेंस में एक ही सिलेंडर होता है, सो अशरफ को लगाना जरूरी समझा। एसडीएम के समझाने पर परिजन मान गए।