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Farrukhabad News: आढ़तियों को औने-पौने दाम पर धान बेचने को मजबूर किसान
Thu, 30 Oct 2025 12:20 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 30 Oct 2025 12:20 AM IST
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फोटो -14 मोहम्मदाबाद मंडी में आढ़त पर होती धान की तौल। संवाद
मोहम्मदाबाद। कस्बा स्थित मंडी में किसान औने-पौने दामों में आढ़तियों को धान बेचने को मजबूर हैं। इससे किसानों को बड़ा घाटा हो रहा है।
किसानों का कहना है कि धान की सरकारी खरीद एक नवंबर से होगी, जबकि उन्हें आलू व गेहूं की बोआई और अन्य काम के लिए उन्हें अभी रुपयों की जरूरत है, मजबूरी में उन्हें सस्ते में धान बेचना पड़ रहा है।
धान की सरकारी खरीद एक नवंबर से शुरू होगी। इस वर्ष सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। वहीं खुली मंडी में धान की बिक्री तेजी से चल रही है। नवीन मंडी मोहम्मदाबाद में प्रतिदिन करीब 10000 पैकेट धान की आवक है। आढ़तों पर किसान का धान 1600 रुपये से लेकर 2100 रुपये क्विंटल खरीदा जा रहा है।
मंडी में मोटा धान 1600 रुपये से लेकर 2000 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है। वहीं ताज महीन धान 2000 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल, 1692 प्रजाति का धान 2400 रुपये प्रति क्विंटल और 1718 प्रजाति का धान 2600 रुपये क्विंटल तक है। हालांकि सरकारी खरीद में मोटा धान ही लिया जाता है। इसका समर्थन मूल्य 2369 रुपये क्विंटल है। इस हिसाब से किसान को करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल घाटा हो रहा है।
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वहीं, मंडी परिसर में जगह कम होने से अक्सर जाम लगता है। किसान को धान बेचने के बाद भुगतान के लिए कई दिन इंतजार भी करना पड़ रहा है। तुरंत भुगतान के लिए किसान से दो कटौती की जा रही है। 15 दिन बाद पैसे लेने पर कटौती नहीं होती।
नकद भुगतान पर दो प्रतिशत कटौती किए जाने के सवाल पर मंडी सचिव नागेंद्र सिंह चुप्पी साध गए। बाद में जानकारी से इन्कार करते हुए कहा कि वह इस मामले की पुष्टि कराएंगे। नाजायज कटौती करने वाले आढ़ती के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी।
बोले किसान-पहले खोले जाएं सरकारी खरीद केंद्र
1900 क्विंटल बेचा
मंडी में धान लेकर आए नगला बाग निवासी किसान सुभाष चंद्र ने बताया कि उन्होंने 1900 रुपये क्विंटल धान बेचा। सात बीघा आलू बोने के लिए खाद की जरूरत है। इससे धान बेचना पड़ा।
काफी नुकसान हुआ
नगला घुरुआ निवासी किसान रामवीर ने बताया कि उनका 25 बीघा का धान था। 18 बीघा धान काटकर बेच चुके हैं। ताज धान 2000 रुपये क्विंटल बिका। सस्ता धान बिकने से काफी नुकसान हो रहा है।
बेटी की शादी है
किसान प्रेमचंद ने बताया कि तीन बीघा धान किया था। बेटे की शादी होने से धान बेचना पड़ा। धान के सही भाव नहीं मिल रहे हैं।
सरकारी खरीद पहले शुरू होनी चाहिए।
बोले आढ़ती- गंदा धान अधिक आ रहा
भाव घट-बढ़ रहे
आढ़ती आकाश गुप्ता ने बताया कि इस समय गंदा धान अधिक आ रहा है। कंपाइन से कटाई हो रही है। इससे धान के सही भाव नहीं मिल पा रहे। वह करीब 1000 पैकेट प्रतिदिन धान खरीद रहे हैं। धान के भाव घट-बढ़ रहे हैं। बाहर से पार्टी भुगतान देरी से दे रही हैं।
कोई रेट तय नहीं
आढ़ती शोभित अग्निहोत्री ने बताया कि वह करीब 600 पैकेट धान प्रतिदिन खरीद रहे हैं। ताज धान अधिक आ रहा है। धान का कोई एक रेट नहीं है। जैसा धान उसी हिसाब से भाव तय होता है।
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किसानों का कहना है कि धान की सरकारी खरीद एक नवंबर से होगी, जबकि उन्हें आलू व गेहूं की बोआई और अन्य काम के लिए उन्हें अभी रुपयों की जरूरत है, मजबूरी में उन्हें सस्ते में धान बेचना पड़ रहा है।
धान की सरकारी खरीद एक नवंबर से शुरू होगी। इस वर्ष सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। वहीं खुली मंडी में धान की बिक्री तेजी से चल रही है। नवीन मंडी मोहम्मदाबाद में प्रतिदिन करीब 10000 पैकेट धान की आवक है। आढ़तों पर किसान का धान 1600 रुपये से लेकर 2100 रुपये क्विंटल खरीदा जा रहा है।
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मंडी में मोटा धान 1600 रुपये से लेकर 2000 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है। वहीं ताज महीन धान 2000 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल, 1692 प्रजाति का धान 2400 रुपये प्रति क्विंटल और 1718 प्रजाति का धान 2600 रुपये क्विंटल तक है। हालांकि सरकारी खरीद में मोटा धान ही लिया जाता है। इसका समर्थन मूल्य 2369 रुपये क्विंटल है। इस हिसाब से किसान को करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल घाटा हो रहा है।
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वहीं, मंडी परिसर में जगह कम होने से अक्सर जाम लगता है। किसान को धान बेचने के बाद भुगतान के लिए कई दिन इंतजार भी करना पड़ रहा है। तुरंत भुगतान के लिए किसान से दो कटौती की जा रही है। 15 दिन बाद पैसे लेने पर कटौती नहीं होती।
नकद भुगतान पर दो प्रतिशत कटौती किए जाने के सवाल पर मंडी सचिव नागेंद्र सिंह चुप्पी साध गए। बाद में जानकारी से इन्कार करते हुए कहा कि वह इस मामले की पुष्टि कराएंगे। नाजायज कटौती करने वाले आढ़ती के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी।
बोले किसान-पहले खोले जाएं सरकारी खरीद केंद्र
1900 क्विंटल बेचा
मंडी में धान लेकर आए नगला बाग निवासी किसान सुभाष चंद्र ने बताया कि उन्होंने 1900 रुपये क्विंटल धान बेचा। सात बीघा आलू बोने के लिए खाद की जरूरत है। इससे धान बेचना पड़ा।
काफी नुकसान हुआ
नगला घुरुआ निवासी किसान रामवीर ने बताया कि उनका 25 बीघा का धान था। 18 बीघा धान काटकर बेच चुके हैं। ताज धान 2000 रुपये क्विंटल बिका। सस्ता धान बिकने से काफी नुकसान हो रहा है।
बेटी की शादी है
किसान प्रेमचंद ने बताया कि तीन बीघा धान किया था। बेटे की शादी होने से धान बेचना पड़ा। धान के सही भाव नहीं मिल रहे हैं।
सरकारी खरीद पहले शुरू होनी चाहिए।
बोले आढ़ती- गंदा धान अधिक आ रहा
भाव घट-बढ़ रहे
आढ़ती आकाश गुप्ता ने बताया कि इस समय गंदा धान अधिक आ रहा है। कंपाइन से कटाई हो रही है। इससे धान के सही भाव नहीं मिल पा रहे। वह करीब 1000 पैकेट प्रतिदिन धान खरीद रहे हैं। धान के भाव घट-बढ़ रहे हैं। बाहर से पार्टी भुगतान देरी से दे रही हैं।
कोई रेट तय नहीं
आढ़ती शोभित अग्निहोत्री ने बताया कि वह करीब 600 पैकेट धान प्रतिदिन खरीद रहे हैं। ताज धान अधिक आ रहा है। धान का कोई एक रेट नहीं है। जैसा धान उसी हिसाब से भाव तय होता है।

फोटो -14 मोहम्मदाबाद मंडी में आढ़त पर होती धान की तौल। संवाद

फोटो -14 मोहम्मदाबाद मंडी में आढ़त पर होती धान की तौल। संवाद

फोटो -14 मोहम्मदाबाद मंडी में आढ़त पर होती धान की तौल। संवाद

फोटो -14 मोहम्मदाबाद मंडी में आढ़त पर होती धान की तौल। संवाद

फोटो -14 मोहम्मदाबाद मंडी में आढ़त पर होती धान की तौल। संवाद