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स्नान करना तो दूर, आचमन लगने लायक नहीं है गंगा जल

Tue, 03 Jan 2017 11:18 PM IST
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
अमर उजाला/फर्रुखाबाद Updated Tue, 03 Jan 2017 11:18 PM IST
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Far from the bath, rinse Ganga water is not worth getting
गंगा में गिर रहा गंदा नाला - फोटो : amarujala
जीवनदायिनी गंगा में गंदे नाले का पानी बिना किसी ट्रीटमेंट प्लांट के गिराने से गंगाजल और भी दूषित हो गया है। चिकित्सा विभाग के एक सर्वे में पाया गया कि इस जल में स्नान करने से तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं। सबसे ज्यादा चर्म रोग हो रहे है।
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नौ दिन बाद गंगा तट पांचाल घाट पर मेला रामनगरिया लगने जा रहा है। इस मेले में आने वाले कल्पवासी इस प्रदूषित जल का यदि सेवन और स्नान करेंगे तो वह बीमारियों के शिकार होंगे। गंगा पर पड़ताल करती चंद्रपाल सिंह सेंगर की रिपोर्ट:-
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गंदगी 20 हैजन
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम की जांच के बाद इसके क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सिकंदर ने बताया कि गंगाजल का सामान्य कलर (गंदगी) 10 हैजन होती है, जबकि सोमवार को जांच में गंदगी 20 हैजन मिली।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उप क्षेत्रीय अधिकारी शिप्रा ने बताया कि नदी का बहाव कम होने से भी पानी गंदा और उसमें से बदबू आने लगती है क्योंकि उसमें घास-फूस आदि सड़ती है। क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार 20 हैजन कलर वाला पानी पीने लायक नहीं होता। ऐसे पानी में नहाने या देर तक खड़ा रहना स्किन के लिए नुकसानदायक होता है।

ज्यादा पानी छोड़ा
माघ मेले और 12 जनवरी को पहले स्नान के मद्देनजर ऊपर (हरिद्वार) से गंगा में रोज 4000 क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया है।

इससे चलते सोमवार को बैराज में 600 क्यूसेक ज्यादा पानी आया, पर गंदगी जस की तस रही। गंगाजल कत्थई-काला झागदार होने और उससे बदबू आने की वजह से सोमवार को भी बैराज में खड़ा होना मुश्किल रहा।  उधर, सिंचाई विभाग ने बैराज में जलस्तर 112.90 मीटर बरकरार रखते हुए 4600 क्यूसेक पानी छोड़ा

। इससे पहले रोज औसतन 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता रहा है।



 गंगा नदी के जिस जल के आचमन और स्नान से चर्म रोग खत्म हो जाता था। रोगी गंगातटों पर रहकर स्नान करते थे लेकिन मौजूदा समय में सब कुछ उल्टा हो गया है। अब गंगा में स्नान करने से सबसे ज्यादा चर्म रोगी हो रहे हैं।

ना किसी ट्रीटमेंट प्लांट के मेला रामनगरिया में गंदे नाले और वस्त्र छपाई का जहरीला पानी मिलाए जाने से गंगाजल बेहद खतरनाक हो गया है। डाक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डा. बीबी पुष्कर ने बताया कि लोहिया अस्पताल में आने वाले चर्म रोग, डायरिया, पेंचिस, आंत्रशोध, पीलिया और टाइफाइड से पीड़ित रोगियों का सर्वे किया गया तो अधिकांश इन बीमारियों से पीड़ित रोगी ऐसे पाए गए, जो गंगा स्नान करते हैं।

उनका कहना है कि चिकित्सा विभाग के एक सर्वे में सर्वाधिक कुष्ठ रोगी गंगा नदी के आसपास रहने वाले लोग पाए गए हैं। इन घाटों पर निवास करने वाले लोग पीलिया के भी शिकार हो रहे हैं। डा. पुष्कर का कहना है कि मौजूदा समय में गंगाजल न तो नहाने योग्य रह गया है और न ही आचमन के योग्य रह गया है।




गंगा नदी में गिर रहे गंदे नालों की वजह से अभी फिलहाल गंगाजल निश्चित रूप से प्रदूषित है लेकिन 12 जनवरी से लगने जा रहे मेला रामनगरिया से पहले नाले का बहाव दूसरी तरफ  करने के लिए पालिकाध्यक्ष से बातचीत चल रही है।

उनका कहना है कि गंगा में गिर रहे इन नालों को लेकर यहां आने वाले संत-महात्मा भी आक्रोशित हैं।
 
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