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कायमगंज के सुबूर ने आईएएस बनकर जिले का नाम रोशन किया
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मोहम्मद सुबूर खान। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कायमगंज। बैनामा लेखक सलीम खान का बेटा मोहम्मद सुबूर खान संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 125वीं रैंक पाकर आईएएस बन गया है। उन्होंने गांव का ही नहीं बल्कि अपने जिले का भी नाम रोशन किया है। इससे उनके घर में ही नहीं, पूरे गांव में जश्न का माहौल है। वह इन दिनों मुरादाबाद में होमगार्ड कमांडेंट का प्रशिक्षण ले रहे थे। रिजल्ट की जानकारी होने के बाद वह मुरादाबाद से घर के लिए रवाना हो गए हैं।
गांव कुबेरपुर सरैया निवासी मोहम्मद सुबूर खान शुरू से ही आईएएस बनना चाहते थे। सुबूर पहले 2020 में पीसीएस की परीक्षा पास कर होमगार्ड कमांडेंट बने। इसके बाद भी वे अपनी मंजिल पाने में लगे रहे। फिलहाल 25 अप्रैल से मुरादाबाद ट्रेनिंग कर रहे थे। सुबूर ने 17 मार्च को संघ लोकसेवा आयोग की लिखित परीक्षा दी। यह पास करने के बाद 25 मई को साक्षात्कार दिया।
सोमवार को परिणाम आया तो उनके परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई। सुबूर के घर तमाम रिश्तेदार व अन्य संबंधी पहुंचे और मिठाई खिलाकर एक-दूसरे को बधाई दी। उनकी मां सबीहा बेगम, पिता सलीम खान, बहन ऐमन सभा व आमना खान ने भी मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। पिता ने बताया कि सुबूर ट्रेनिंग छोड़कर घर के लिए निकल चुके हैं।
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डीएम की गाड़ी देखकर बेटे को आईएएस बनाने की ठानी
आईएएस बने सुबूर के पिता सलीम खान इंटरमीडिएट पास हैं। सलीम ने बताया कि वे अक्सर तहसील में डीएम की गाड़ी आते देखते थे तो मन में जिज्ञासा होती थी कि क्यों न अपने बेटे को आईएएस बनाएं। इसीलिए जो भी कमाया उसे बच्चों की पढ़ाई पर लगाया।
अगर चाहते तो वे भी अन्य लोगों की तरह संपत्ति बनाते, मगर इस ओर कभी नहीं सोचा। बेटे को कामयाब बनाने के लिए प्रयास में जुटे रहे। दो भाइयों से सुबूर हैं और छोटा भाई मोहम्मद सऊद खां अलीगढ़ से एमबीए कर रहा है। बहन ऐमन ने जामिया से बीए किया है। आमना खान सीपी स्कूल में कक्षा आठ की पढ़ाई कर रही है। मां सबीहा बेगम कक्षा आठ तक पढ़ी हैं।
तहसीलदार से मिली आईएएस बनने की प्रेरणा
संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर आईएएस बने मोहम्मद सुबूर खान ने मोबाइल पर बताया कि 10 वर्ष पहले उनके यहां तत्कालीन तहसीलदार नासिर हुसैन का आना-जाना था। तब वे इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे थे। तब उन्होंने आईएएस बनने के टिप्स दिए। उन्होंने तभी से यह तय कर लिया था कि कुछ भी हो आईएएस बनकर समाज के लिए जरूर कुछ करना है। इसके अलावा मां की दुआ और पिता के संघर्ष ने उन्हें कामयाबी दिलाई है और आगे उनकी यह प्राथमिकता रहेगी कि समाज के हर वर्ग को सरकार की हर योजना का लाभ मिले। इसके लिए हमेशा काम करना है।
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गांव कुबेरपुर सरैया निवासी मोहम्मद सुबूर खान शुरू से ही आईएएस बनना चाहते थे। सुबूर पहले 2020 में पीसीएस की परीक्षा पास कर होमगार्ड कमांडेंट बने। इसके बाद भी वे अपनी मंजिल पाने में लगे रहे। फिलहाल 25 अप्रैल से मुरादाबाद ट्रेनिंग कर रहे थे। सुबूर ने 17 मार्च को संघ लोकसेवा आयोग की लिखित परीक्षा दी। यह पास करने के बाद 25 मई को साक्षात्कार दिया।
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सोमवार को परिणाम आया तो उनके परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई। सुबूर के घर तमाम रिश्तेदार व अन्य संबंधी पहुंचे और मिठाई खिलाकर एक-दूसरे को बधाई दी। उनकी मां सबीहा बेगम, पिता सलीम खान, बहन ऐमन सभा व आमना खान ने भी मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। पिता ने बताया कि सुबूर ट्रेनिंग छोड़कर घर के लिए निकल चुके हैं।
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डीएम की गाड़ी देखकर बेटे को आईएएस बनाने की ठानी
आईएएस बने सुबूर के पिता सलीम खान इंटरमीडिएट पास हैं। सलीम ने बताया कि वे अक्सर तहसील में डीएम की गाड़ी आते देखते थे तो मन में जिज्ञासा होती थी कि क्यों न अपने बेटे को आईएएस बनाएं। इसीलिए जो भी कमाया उसे बच्चों की पढ़ाई पर लगाया।
अगर चाहते तो वे भी अन्य लोगों की तरह संपत्ति बनाते, मगर इस ओर कभी नहीं सोचा। बेटे को कामयाब बनाने के लिए प्रयास में जुटे रहे। दो भाइयों से सुबूर हैं और छोटा भाई मोहम्मद सऊद खां अलीगढ़ से एमबीए कर रहा है। बहन ऐमन ने जामिया से बीए किया है। आमना खान सीपी स्कूल में कक्षा आठ की पढ़ाई कर रही है। मां सबीहा बेगम कक्षा आठ तक पढ़ी हैं।
तहसीलदार से मिली आईएएस बनने की प्रेरणा
संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर आईएएस बने मोहम्मद सुबूर खान ने मोबाइल पर बताया कि 10 वर्ष पहले उनके यहां तत्कालीन तहसीलदार नासिर हुसैन का आना-जाना था। तब वे इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे थे। तब उन्होंने आईएएस बनने के टिप्स दिए। उन्होंने तभी से यह तय कर लिया था कि कुछ भी हो आईएएस बनकर समाज के लिए जरूर कुछ करना है। इसके अलावा मां की दुआ और पिता के संघर्ष ने उन्हें कामयाबी दिलाई है और आगे उनकी यह प्राथमिकता रहेगी कि समाज के हर वर्ग को सरकार की हर योजना का लाभ मिले। इसके लिए हमेशा काम करना है।