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Farrukhabad News: भीषण गर्मी में बढ़ी पांच मिलियन यूनिट बिजली की खपत

Tue, 10 Jun 2025 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jun 2025 11:42 PM IST
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Electricity consumption increased by five million units in extreme heat
फर्रुखाबाद। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जून के प्रथम सप्ताह तक करीब पांच मिलियन यूनिट बिजली की खपत बढ़ी है। मांग बढ़ने के चलते ट्रिपिंग व लो वोल्टेज की समस्या से भीषण गर्मी में लोग जूझ रहे हैं। जिले के उपकेंद्रों की क्षमतावृद्धि अभी तक नहीं हो पाई है। रिवैंप योजना के तहत कई कार्य अधूरे पड़े हैं। वहीं, विभागीय अधिकारी गोलमोल जवाब देकर बच रहे हैं।
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जनपद में 41 उपकेंद्र हैं। इनमें 64 पावर ट्रांसफार्मर लगे हैं। जनपद में बिजली आपूर्ति के लिए 491 मेगा वोल्ट एंपियर (एमवीए) क्षमता निर्धारित है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि करीब दो माह से बिजली की खपत करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। यही वजह है कि उपकेंद्र ओवरलोड हो रहे हैं। ओवरलोडिंग के कारण ही बंच केबलों और ट्रांसफार्मरों में आग लग रही है। वर्ष 2023 में 84 मिलियन यूनिट तो वर्ष 2024 में जनपद में बिजली की खपत 96 मिलियन यूनिट हुई थी। वर्ष 2025 में अब तक करीब 101 मिलियन यूनिट बिजली खर्च हो चुकी है। यानी पिछले तीन सालों से बिजली की मांग में इजाफा हो रहा है।
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पिछले साल की अपेक्षा इस बार भी पांच मिलियन यूनिट बिजली की मांग ज्यादा हुई। एक मिलियन यूनिट में 10 लाख यूनिट होते हैं। यानी पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष 50 लाख यूनिट बिजली ज्यादा खर्च हुई।
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शहर के तीन विद्युत उपकेंद्रों की नहीं हो सकी क्षमतावृद्धि
शहर में लकूला उपकेंद्र, ठंडी सड़क और जसमई उपकेंद्र की क्षमतावृद्धि की जानी है। इन तीनों केंद्रों पर पांच-पांच एमवीए का एक-एक ट्रांसफार्मर रखा जाना है। तीनों उपकेंद्रों पर प्लिंथ तो बन गई है, लेकिन अभी तक सिर्फ ठंडी सड़क उपकेंद्र पर रखे जाने के लिए ही ट्रांसफार्मर आया है। एक्सईएन शहरी बृजभान सिंह ने बताया कि ठंडी सड़क उपकेंद्र पर रखे जाने के लिए पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर आ गया है। अन्य दोनों उपकेंद्रों के ट्रांसफार्मर भी जल्द आ जाएंगे। जल्द ही तीनों उपकेंद्रों की क्षमतावृद्धि हो जाएगी, जिससे ट्रिपिंग की समस्या से निजात मिलेगी।



पारा बढ़ने से लो वोल्टेज की आ रही दिक्कत
एक्सईएन शहरी बृजभान सिंह ने बताया कि विद्युत उपकरण आमतौर पर 40 डिग्री सेल्सियस के परिवेश तापमान के लिए डिजाइन किए जाते हैं। गर्मियों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाता है, जिसके चलते विद्युत उपकरणों की शक्ति कम हो जाती है। इसी वजह से लो वोल्टेज मिलने लगता है। बरसात में तापमान में गिरावट आने से लो वोल्टेज की समस्या खत्म हो जाएगी।



बोले जिम्मेदार
‘पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष भीषण गर्मी के बावजूद बिजली कटौती काफी कम हो रही है। रिवैंप व आरडीएसएस योजना से जिले में विद्युतीकरण के कार्य जारी है। बंच केबल के साथ ही ट्रांसफार्मरों और पावर ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि भी कराई जा रही है। इधर चार-पांच दिनों से बिजली की मांग में इजाफा जरूर हुआ है। जुलाई में ही जून में कितनी बिजली खपत हुई, इसका पता चल सकेगा।’
- अजय कुमार, अधीक्षण अभियंता।
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