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डॉक्टरों की हड़ताल, मरीज बेहाल
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
Updated Tue, 06 Jun 2017 11:37 PM IST
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ख्ााली पड़ा अस्पताल।
- फोटो : amarujala
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आईएमए के आह्वान पर कई नर्सिंग होम में मंगलवार को ओपीडी पूरी तरह से ठप रही। चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे। नए रोगी न तो भर्ती किए और न ही उन्हेें परामर्श दिया। वहीं दूसरी तरफ जिलाध्यक्ष डॉ. अरविंद गुप्ता ने दिल्ली जाकर आईएमए के इस आंदोलन में हिस्सा लिया।
पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार डॉक्टर्स आईएमए मेडिकल स्टेबलेस एक्ट के लागू न होने को लेकर आंदोलित है। उनका कहना है कि निजी नर्सिंग होम के जो मानक हैं। उनके अनुसार ही कार्य किया जाए।
पहले मानक में क्वॉलीफाइड स्टाफ, नर्सिंग होम का स्पेस, दमकल पहुंचने की जगह तथा अन्य मानक होने पर ही नर्सिंग होमो को मंजूरी दी जाए। क्लीनिक स्टेबलेस एक्ट व डॉक्टरों की सुरक्षा संबंधी एक्ट लागू किया जाए।
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आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. केएम द्विवेदी का कहना है कि नर्सिंग होमों में कुछ मरीज अंतिम स्टेज पर आते हैं। इसके बाद भी नर्सिंग होम के डॉक्टर उन्हें भर्ती कर लेते हैं। मरीज के साथ अनहोनी होने पर डॉक्टर पर दबाव बनाया जाता है, जिसे मुक्त किया जाए।
डॉक्टरों को इलाज करने का मौका दिया जाए।
आईएमए की यह भी मांग है कि भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए लिंग परीक्षण के लिए अल्ट्रासाउंड पर रोक लगाई जाए लेकिन जरूरत पड़ने पर जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए अल्ट्रासाउंड करने वालों को अनावश्यक रूप से तंग न किया जाए।
अक्सर जरूरत पर अल्ट्रासाउंड कराया जाता है लेकिन बाद में रोगी के कहने पर उसके खिलाफ एफआईआर कर दी जाती है। इन्हीं मांगों को लेकर जिले भर के सभी नर्सिंग होम बंद रहे। उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों का ही उपचार किया। बाहर से आए किसी भी रोगी को नहीं देखा गया।
पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार डॉक्टर्स आईएमए मेडिकल स्टेबलेस एक्ट के लागू न होने को लेकर आंदोलित है। उनका कहना है कि निजी नर्सिंग होम के जो मानक हैं। उनके अनुसार ही कार्य किया जाए।
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पहले मानक में क्वॉलीफाइड स्टाफ, नर्सिंग होम का स्पेस, दमकल पहुंचने की जगह तथा अन्य मानक होने पर ही नर्सिंग होमो को मंजूरी दी जाए। क्लीनिक स्टेबलेस एक्ट व डॉक्टरों की सुरक्षा संबंधी एक्ट लागू किया जाए।
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आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. केएम द्विवेदी का कहना है कि नर्सिंग होमों में कुछ मरीज अंतिम स्टेज पर आते हैं। इसके बाद भी नर्सिंग होम के डॉक्टर उन्हें भर्ती कर लेते हैं। मरीज के साथ अनहोनी होने पर डॉक्टर पर दबाव बनाया जाता है, जिसे मुक्त किया जाए।
डॉक्टरों को इलाज करने का मौका दिया जाए।
आईएमए की यह भी मांग है कि भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए लिंग परीक्षण के लिए अल्ट्रासाउंड पर रोक लगाई जाए लेकिन जरूरत पड़ने पर जच्चा-बच्चा की जान बचाने के लिए अल्ट्रासाउंड करने वालों को अनावश्यक रूप से तंग न किया जाए।
अक्सर जरूरत पर अल्ट्रासाउंड कराया जाता है लेकिन बाद में रोगी के कहने पर उसके खिलाफ एफआईआर कर दी जाती है। इन्हीं मांगों को लेकर जिले भर के सभी नर्सिंग होम बंद रहे। उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों का ही उपचार किया। बाहर से आए किसी भी रोगी को नहीं देखा गया।