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झोलाछाप के इलाज से युवक का हाथ हुआ बेकार

Tue, 11 Feb 2020 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Feb 2020 12:12 AM IST
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फर्रुखाबाद। सीएमओ कार्यालय की लापरवाही से झोलाछापों के खेल पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। आलम ये कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी झोलाछाप लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। सोमवार को ऐसा ही एक मामला सामने आया। एक युवक के हाथ में दर्द होने पर झोलाछाप ने चार इंजेक्शन लगाकर 10 दिन के लिए पट्टी बांध दी। इससे खून का प्रवाह रुक गया और हाथ बेकार हो गया। अब युवक इलाज के लिए भटक रहा है, लेकिन किसी डाक्टर ने हाथ ठीक होने की उम्मीद नहीं जताई।
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नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव नवादा निवासी विशुन दयाल के 19 वर्षीय पुत्र रजनेश के दाएं हाथ में 11 नवंबर को दर्द हुआ। इस पर उसने मऊदरवाजा क्षेत्र के मोहल्ला द्वारिकाधाम स्थित झोलाछाप को दिखाया। उसने रजनेश के हाथ को मोड़कर 10 दिन के लिए पट्टी बांध दी। जब पट्टी खोली गई तो हाथ निष्क्रिय हो गया। विशुनदयाल ने बताया कि झोलाछाप ने पुत्र रजनेश के चार इंजेक्शन भी लगाए। हाथ के काम न करने पर उन्होंने आवास विकास कालोनी स्थित एक नर्सिंगहोम के डाक्टर को दिखाया।
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उन्होंने बताया कि हाथ की नसों में खून की दौड़ान बंद हो चुका है। ठीक होना संभव नहीं है। सोमवार को पीड़ित पुत्र रजनेश के साथ सीएमओ कार्यालय पहुंचा। उसने झोलाछाप पटल प्रभारी ऋषि गोपाल तिवारी को मऊदरवाजा क्षेत्र के झोलाछाप के बारे में जानकारी देकर कार्रवाई की मांग की। पता चला कि उस झोलाछाप पर तीन माह पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। इसके बावजूद झोलाछाप क्लीनिक संचालित कर रहा है। डिप्टी सीएमओ डॉ. राजीव शाक्य ने बताया कि शिकायत मिली है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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राजेपुर क्षेत्र के झोलाछापों के क्लीनिक फिर चलने लगे
राजेपुर क्षेत्र में झोलाछापों के क्लीनिक संचालित करने की शिकायत नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ. राजीव शाक्य से की गई थी। डिप्टी सीएमओ ने अपने कार्यालय के लिपिक ऋषिगोपाल को भेजकर जांच कराई। 20 जनवरी को डिप्टी सीएमओ ने राजेपुर थाने में 14 झोलाछापों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। स्वास्थ्य विभाग व पुलिस के खेल के चलते किसी भी झोलाछाप की गिरफ्तारी नहीं हुई। और तो और अधिकांश झोलाछाप फिर से क्लीनिक चलाने लगे हैं। झोलाछापों की हर माह हाजिरी लगने के बाद उन्हें क्लीनिक चलाने की अनुमति मिल जाती है। प्रशासन की सख्ती पर पहले से तैयार सूची के आधार पर दिखावे को एफआईआर करा दी जाती है।
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