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बाढ़ पीड़ितों की फीकी रहेगी दिवाली
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Sat, 07 Nov 2015 11:49 PM IST
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शमसाबाद। बाढ़ की चपेट में आए ग्रामीणों की दिवाली इस बार भी फीकी ही रहेगी। इन बाढ़ पीड़ितों का हालचाल लेने की प्रशासन ने कोई जहमत नहीं उठाई है। अमर उजाला ने सड़क किनारे बसे बाढ़ पीड़ितों का हालचाल लिया तो उनका दर्द छलक पड़ा। बाढ़ पीड़ितों का कहना था कि काहे की होली और काहे की दिवाली। उनके लिए तो हर त्योहार सूना ही रहता है।
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ढाईघाट पर सड़क किनारे झोपड़ी डालकर रह रहे गांव सुतिहार निवासी बालादीन कहते हैं कि पांच साल पहले बाढ़ में मकान और जमीन कट गई थी। पांच साल से सड़क किनारे झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। आज तक शासन-प्रशासन ने कोई मुआवजा नहीं दिया। सड़के किनारे झोपड़ी डालकर रह रहे शीशपाल कहते हैं कि आज तक न तो उन्हें बाढ़ पीड़ित का मुआवजा मिला और न ही बीते साल बेमौसम बरसात से हुई फसल बर्बादी की चेक अभी तक मिली है। मेहनत-मजदूरी कर परिवार का गुजर-बसर कर रहे हैं। त्योहार तो भूल ही गए हैं।
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नेकराम कहते हैं कि बाढ़ के दौरान कटी उनकी जमीन पर अवैध रूप से लोग कब्जा किए हैं। कई बार जिला प्रशासन को जमीन की पैमाइश कराए जाने को लेकर प्रार्थना पत्र दे चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसके चलते खेतीबाड़ी भी नहीं कर पा रहे हैं। मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन को उनके दुख-दर्द से कोई सरोकार नहीं है। सड़क किनारे झोपड़ी डालकर रह रहीं पुष्पा देवी पत्नी स्व. राजाराम कहती हैं कि न तो वृद्घावस्था और न ही विधवा पेंशन मिल रही है। बेटे मजदूरी कर भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसी स्थित में दीपावली का त्योहार तो फीका ही जाएगा।
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