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30 किमी पैदल चलकर हॉस्टल पहुंचा दिव्यांश

Sat, 26 Feb 2022 11:23 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Feb 2022 11:23 PM IST
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Divyansh reached the hostel by walking 30 km
मता-पिता के साथ वैभव व हिमांशु राजपूत। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। यूक्रेन पर रूसी हमले से वहां के हालात खराब हैं। रूसी सेना यूक्रेन की राजधानी कीव तक पहुंच चुकी है। कीव से कुछ दूर स्थित लिवीव शहर में फंसा फतेहगढ़ का दिव्यांश साथियों के साथ 15 किलोमीटर पैदल चलकर अपने हॉस्टल पहुंचा। ओडैसा में तनावपूर्ण शांति के बावजूद अन्य छात्रों वरुण, अभिनव, प्रतीक और वसुंधरा के परिजन चिंतित हैं। परिजन बच्चों के जल्द घर आने की राह देख रहे हैं।
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फतेहगढ़ के शीशमबाग कैंट निवासी डॉ. अनुपम वर्मा का पुत्र दिव्यांश दो दिन परेशान रहा। लिवीव में जब धमाका हुआ तो वह पैदल ही 15 किलोमीटर दूर एयरपोर्ट के लिए भागा, मगर पहुंच नहीं पाया। पिता डॉ. अनुपम ने बताया कि दिव्यांश ने एक रात रास्ते में गुजारी। वहां से पैदल कुछ दूर स्थित एक देश के रास्ते से निकलने की कोशिश की, मगर कई घंटे के जद्दोजहद के बावजूद नहीं निकलने दिया गया।
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इसके बाद दोस्तों के साथ किराये की बस से पोलैंड के बार्डर पहुंचा। वहां वीजा लगाकर देश के बाहर निकलने की कोशिश की, मगर नाकामी हाथ लगी। इसी दौरान भारतीय दूतावास ने आदेश जारी कर दिया, जिसमें कहा कि सभी भारतीय जहां रह रहे हैं, वहीं रहें। कोई भी देश न छोड़े। आदेश का पता चलने के बाद दिव्यांश दोस्तों के साथ करीब 15 किलोमीटर पैदल चला। इसके बाद बस से वह लिवीव स्थित अपने हॉस्टल पहुंच गया। अनुपम ने बताया कि फिलहाल अब ज्यादा दिक्कत नहीं है, मगर घर आने पर ही तसल्ली होगी।
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वहीं, ओडैसा में फंसे वरुण गंगवार के पिता अखिलेश गंगवार ने बताया कि बेटे से शनिवार को दो बार बात हुई। फिलहाल कोई परेशानी नहीं है। युद्ध चल रहा है तो चिंता लाजिमी है। वरुण, अभिनव, प्रतीक, वसुंधरा के परिजन भी चिंतित हैं।
शहर के बीबीगंज निवासी डॉ. सुनील शाक्य की बेटी ईशा भी यूक्रेन के जयपुरैशिया यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा है। चार साल पहले वहां गई थी। पिता डॉ. सुनील ने बताया कि वह सात फरवरी को शादी में आई थी। इसके बाद वापस चली गई थी। तनाव की स्थिति देख 21 फरवरी को 26 फरवरी के लिए वापसी का टिकट कराया था, लेकिन हमले के बाद उसको बंकर में ही रोक दिया गया है। उसने बताया कि वहां के लोगों ने रोमानिया बॉर्डर पहुंचने के लिए कहा है। केंद्र सरकार शीघ्र बच्चों कोे लाने का ठोस उपाय करे।
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ के मोहल्ला आंबेडकर नगर निवासी फार्मासिस्ट के दोनों बेटों के यूक्रेन से निकलने के चार घंटे बाद ही बम धमाके शुरू हो गए थे। 24 फरवरी को दोनों भाई घर पहुंचे तब माता-पिता को तसल्ली मिली।
सीएचसी फतेहगढ़ में तैनात आयुष फार्मासिस्ट विजय वर्मा के बेटे हिमांशु राजपूत व वैभव राजपूत यूक्रेन में ओडैसा स्थित नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। 14 फरवरी को मां पूनम सिंह व विजय वर्मा ने समाचार सुना कि 16 फरवरी को यूक्रेन में हमला होगा। इससे दोनों परेशान हो गए और बेटों को फोन कर घर आने को कहा। उधर यूक्रेन में भाइयों को मेडिकल कालेज से छुट्टी नहीं दी गई और ऑनलाइन क्लासेस शुरू कर दी गईं।

इधर माता-पिता के परेशान होने की वजह से दोनों 23 फरवरी की शाम सात बजे यूक्रेन से अंतिम फ्लाइट से घर को चल दिए। इसके चार घंटे बाद ही यूक्रेन में बम धमाके होने लगे। इससे फ्लाइट सेवा भी बंद कर दी गई। 24 फरवरी को सुबह 7 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। वहां से कार से घर आ गए। मां पूनम सिंह ने बताया कि दोनों बेटों के आ जाने से उन्हें तसल्ली है, लेकिन अन्य बच्चों के यूक्रेन में फंसे होने से वह चिंतित भी हैं।
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