फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   District hospital OPD also on the brink of closure

जिला अस्पताल की ओपीडी भी बंद होने की कगार पर

Mon, 29 Feb 2016 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद Updated Mon, 29 Feb 2016 01:20 AM IST
विज्ञापन
District hospital OPD also on the brink of closure
जिला अस्पताल (लोहिया अस्पताल) बहुत ही खराब दौर से गुजर रहा है। यहां दवाओं की तो कमी है ही, डाक्टरों का भी जबरदस्त अभाव है। इसी से यहां हड्डी के मरीजों के अलावा बाकी सर्जरी पूरी तरह बंद है। अब ओपीडी भी बंद होने की कगार पर है। अस्पताल के जिम्मेदारों का कहना है कि दवाएं और डाक्टर न मिले तो मार्च में ओपीडी चलाना मुश्किल हो जाएगा।
विज्ञापन


डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हर दिन करीब 700 मरीज आते हैं। इन मरीजों का इलाज एक ही डाक्टर के भरोसे है। अस्पताल में डाक्टरों के पद 29 हैं किंतु तैनात 11 ही हैं। इनमें डॉ. धर्मेंद्र कुमार पीजी करने के लिए दो साल के अवकाश पर हैं। एक डॉक्टर सस्पेंड है। नौ डाक्टरों में से पांच इमरजेंसी ड्यूटी पर चले जाते हैं। यदि कोई हड्डी टूटने का मरीज आ जाता है तो एनाथेटिक्स और हड्डी रोग विशेषज्ञ ओटी में चले जाते हैं। एक डाक्टर कोर्ट में मुकदमों की पैरवी में बना रहता है। ओपीडी में केवल एक डाक्टर बचता है।
विज्ञापन


इंडोर के लिए एंटीबायटिक दवाओं की भी कमी है। दवाएं सरकार के फार्मेसी से आती हैं। छह महीने पहले इंडेंट भेजा गया था लेकिन अभी तक दवाएं नहीं आईं हैं। इससे दवाएं एलपी (लोकल परचेज) से खरीदी जा रही हैं। अस्पताल में डाक्टर न होने से मरीज निराश लौट रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


शनिवार को यहां आईं अमृतपुर की ईश्वरी बेगम ने बताया कि सुबह से अस्पताल में बैठी हैं लेकिन डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी है। किराये में 80 रुपये खर्च हो गए, बिना दवा लौटना पड़ रहा है। अस्पताल आईं गांव रामलाल कुड़रिया की स्मिता पत्नी शिवराज का कहना है कि सुबह से इंतजार कर रही हैं लेकिन डॉक्टर नहीं आए।


लोहिया अस्पताल के -सीएमएस डा. बीबी पुष्कर ने कहा कि मार्च से ओपीडी ‘सफर’ कर सकता है। मौजूदा समय में ओपीडी में केवल एक डाक्टर बचता है। सर्जरी का काम बंद हो गया है। केवल हड्डी टूटने वाले रोगियों को ओटी में ले जाया जाता है। इंडोर के लिए छह माह पहले सिफराडेक्शन एंटीबायटिक की मांग की गई थी लेकिन अभी तक नहीं आई। बाजार से खरीदकर काम चला रहे हैं। बजट कम होने से एंटीबायटिक बाजार से ज्यादा खरीदना संभव नहीं है। कई बार शासन को लिख चुका हूं लेकिन डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed