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Farrukhabad News: जिले में डिप्थीरिया के दोगुने बढ़े मरीज

Wed, 09 Oct 2024 12:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2024 12:06 AM IST
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Diphtheria patients doubled in the district
फर्रुखाबाद। जनपद में बच्चों के टीकाकरण में बरती जा रही लापरवाही के चलते डिप्थीरिया के मरीजों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो गई है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष 21 बच्चे डिप्थीरिया की चपेट में आए। वहीं, गत वर्ष डिप्थीरिया के 10 मरीज मिले थे।
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जनपद के सभी 234 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर एएनएम की तैनाती है। इसके अलावा 161 हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर सीएचओ तैनात हैं। अधिकारियों के संरक्षण के चलते मनमानी ड्यूटी चल रही है। इसका सीधा प्रभाव टीकाकरण पर पड़ता है। जिलाधिकारी डॉ.वीके सिंह समीक्षा के दौरान कई बार टीकाकरण की धीमी प्रगति पर चेतावनी भी दे चुके, लेकिन सुधार नहीं हुआ।
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डिप्थीरिया जैसी घातक बीमारी से बचाव के लिए बच्चे को जन्म के डेढ़ माह बाद पेंटा का पहला टीका, ढाई माह में दूसरा व साढ़े तीन माह में तीसरा टीका लगाया जाता है। टीकाकरण में ही सबसे अधिक लापरवाही बरती जा रही है। इसका नतीजा यह है कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से 30 सितंबर तक जिले में डिप्थीरिया संभावित 21 मरीज मिल चुके हैं। इनमें पांच वर्ष से 20 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। छह बच्चों को इलाज कानपुर व लखनऊ में किया गया, हालांकि उनकी जान बच गई और अब वह स्वस्थ हैं। चार बच्चों का अभी इलाज चल रहा है।
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बच्चे के गले में हो दिक्कत तो डॉक्टर से करें संपर्क
यदि बच्चे के गले में दर्द हो, पानी पीने या कुछ खाने में दिक्कत हो तो तत्काल डाक्टर से संपर्क करें। बच्चे को डिप्थीरिया हो सकता है। यह गले की ही बीमारी है। शुरुआती लक्षण गले में सफेद जाला जैसा दिखाई देता है। इसमें यदि लापरवाही की तो यह बीमारी बढ़ती जाती है और सफेद जाला जैसा दिखने वाले फंगस का आकार बढ़कर गला अवरुद्ध कर देता है। इससे सांस लेने में दिक्कत होने के साथ बच्चे की जान भी जा सकती है। बच्चे के गले में दिक्कत होने पर डिप्थीरिया की आशंका रहती है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
इनसेट
इस वर्ष डिप्थीरिया के 21 संभावित मरीज मिल चुके हैं। टीकाकरण की धीमी प्रगति की रिपोर्ट भी दे चुके हैं और कुछ एएनएम के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की गई। किसी बच्चे के गले में दिक्कत हो तो वह तत्काल लोहिया अस्पताल में ईएनटी सर्जन से जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर बच्चे को डिप्थीरिया एंटी टॉक्सिन टीका लगाने की भी निशुल्क व्यवस्था है। समय रहते इलाज मिलने से बच्चे की जान बचाई जा सकती है। इलाज में कोई भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
डॉ.सर्वेश यादव, एसीएमओ, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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