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Farrukhabad News: कायमगंज की देवांशी सक्सेना बनीं आईएएस, यूपीएससी में पाई 124वीं रैंक
Wed, 23 Apr 2025 11:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:51 PM IST
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गांव नरैनामऊ में परिवार और बच्चों के साथ खुशियां मनाते दिव्यांशी के बाबा व अन्य।
- फोटो : रामलखन गुर्जर। स्रोत: स्वयं
कायमगंज। कौन कहता है आसमां में छेद हो नही सकता,एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों,कुछ ऐसा ही कर दिखाया है गांव नरैनामऊ की बेटी दिव्यांशी सक्सेना ने जिन्होंने यूपीएससी 2024 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 124वीं रैंक हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने आईएएस बनने का सपना साकार कर लिया है। उनकी सफलता से पूरे परिवार, गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है।
दिव्यांशी सक्सेना वर्तमान में बरेली निवासी हैं, लेकिन उनका मूल निवास कायमगंज के गांव नरैनामऊ में है। उनके बाबा कौशल किशोर सक्सेना गांव में ही रहते हैं और 80 वर्ष की उम्र में अपनी पौत्री की इस ऐतिहासिक सफलता से बेहद गौरवान्वित हैं। जैसे ही यह खुशखबरी गांव में पहुंची, परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया।
दिव्यांशी के पिता अखिलेश कुमार सक्सेना बरेली में पुलिस वायरलेस विभाग में एसपी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुजाता एक गृहिणी हैं। उनके भाई अक्षत सक्सेना बीटेक कर निजी कंपनी में कार्यरत हैं।
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दिव्यांशी की प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने स्नातक की पढ़ाई श्रीराम लेडी कॉलेज, दिल्ली से और परास्नातक की पढ़ाई आईआईटी अहमदाबाद से पूरी की। यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले दो बार वे यूपीएससी में चयनित नहीं हो सकीं, लेकिन हार नहीं मानी और मेहनत जारी रखी।
दिव्यांशी ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अध्ययन और सकारात्मक सोच को दिया। उन्होंने कहा, अगर कोई नियमित रूप से चार से छह घंटे पढ़ाई करे और अखबारों का अध्ययन करे तो सफलता जरूर मिलती है। खासकर हिंदी और अंग्रेजी के अखबारों से समसामयिक ज्ञान मजबूत होता है।
उनकी इस उपलब्धि पर न केवल परिवार, बल्कि बरेली से लेकर उनके पैतृक गांव तक उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीणों ने कहा कि दिव्यांशी जैसी प्रतिभाशाली युवती आज के बच्चों के लिए प्रेरणा हैं। दिव्यांशी के बाबा सेवानिवृत्त अध्यापक हैं।चाचा धर्मेश व अरुणेश चीनी मिल में केमिस्ट के पद पर हैं।
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दिव्यांशी सक्सेना वर्तमान में बरेली निवासी हैं, लेकिन उनका मूल निवास कायमगंज के गांव नरैनामऊ में है। उनके बाबा कौशल किशोर सक्सेना गांव में ही रहते हैं और 80 वर्ष की उम्र में अपनी पौत्री की इस ऐतिहासिक सफलता से बेहद गौरवान्वित हैं। जैसे ही यह खुशखबरी गांव में पहुंची, परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया।
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दिव्यांशी के पिता अखिलेश कुमार सक्सेना बरेली में पुलिस वायरलेस विभाग में एसपी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुजाता एक गृहिणी हैं। उनके भाई अक्षत सक्सेना बीटेक कर निजी कंपनी में कार्यरत हैं।
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दिव्यांशी की प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने स्नातक की पढ़ाई श्रीराम लेडी कॉलेज, दिल्ली से और परास्नातक की पढ़ाई आईआईटी अहमदाबाद से पूरी की। यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले दो बार वे यूपीएससी में चयनित नहीं हो सकीं, लेकिन हार नहीं मानी और मेहनत जारी रखी।
दिव्यांशी ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अध्ययन और सकारात्मक सोच को दिया। उन्होंने कहा, अगर कोई नियमित रूप से चार से छह घंटे पढ़ाई करे और अखबारों का अध्ययन करे तो सफलता जरूर मिलती है। खासकर हिंदी और अंग्रेजी के अखबारों से समसामयिक ज्ञान मजबूत होता है।
उनकी इस उपलब्धि पर न केवल परिवार, बल्कि बरेली से लेकर उनके पैतृक गांव तक उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीणों ने कहा कि दिव्यांशी जैसी प्रतिभाशाली युवती आज के बच्चों के लिए प्रेरणा हैं। दिव्यांशी के बाबा सेवानिवृत्त अध्यापक हैं।चाचा धर्मेश व अरुणेश चीनी मिल में केमिस्ट के पद पर हैं।