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अवकाश होने से रविवार को नहीं हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
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कंपिल के गांव पट्टी मदारी में ध्वस्त पड़ा कंपिल चेयरमैन का गेस्ट हाउस। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कंपिल। गांव पट्टी मदारी में तालाब की भूमि पर बने चेयरमैन उदयपाल सिंह यादव के गेस्ट हाउस के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अवकाश होने और पर्याप्त संसाधन न होने से रविवार को नहीं हो सकी, जबकि ध्वस्त हो चुके भवन के मलबे की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रही।
गांव कमलाईपुर निवासी मुकेश चंद्र यादव ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन में कंपिल चेयरमैन उदयपाल सिंह यादव के खिलाफ गांव पट्टी मदारी के तालाब की भूमि पर गेस्ट हाउस बनाकर कब्जा करने की शिकायत की थी। इस पर जांच हुई तो पता चला कि पूर्व में हुई शिकायत पर वर्ष 2021 में राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट पर कब्जे को हटाने के आदेश हुए थे। साथ ही 57 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था।
इस पर शनिवार को एसडीएम गौरव शुक्ला और तहसीलदार कर्मवीर सिंह ने पुलिस फोर्स के साथ गेस्टहाउस के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। दो मंजिल आलीशान गेस्टहाउस को गिराने के लिए दो जेसीबी कम पड़ गई थीं। इस पर शाम को काम रोक दिया गया था।
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मौके पर पुलिस लगा दी गई थी। तहसीलदार ने बताया कि रविवार को अवकाश होने से कर्मचारियों की कमी रही। गेस्टहाउस के पिछले हिस्से की ऊंचाई ज्यादा होने से बड़ी मशीनों की व्यवस्था की गई है। सोमवार को कब्जा हटाने की कार्रवाई फिर शुरू होगी।
कंपिल। गांव पट्टी मदारी में सरकारी तालाब पर बने गेस्टहाउस को लेकर शिकायतकर्ताओं और चेयरमैन के बीच शाह और मात का खेल चलता रहा। गेस्टहाउस को कार्रवाई से बचाने के लिए पहले नगर पंचायत का स्कूल बताया गया, फिर सार्वजनिक गेस्टहाउस। इससे लोगों में संशय बना रहा। सपा सरकार में वर्ष 2015 में गांव पट्टी मदारी में तालाब की भूमि पर चेयरमैन उदयपाल सिंह ने आलीशान दो मंजिला भवन का निर्माण कराया था। राजनीतिक कद बढ़ने के साथ चेयरमैन के विरोधी भी बढ़े। इसके बाद तालाब की भूमि पर कब्जे की शिकायतें हुईं। शिकायतों को चेयरमैन ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया।
भवन को नगर पंचायत का स्कूल बताया गया, जिससे जांच ठंडे बस्ते में चली गई। बाद में फिर से शिकायत हुई तो भवन पर सार्वजनिक गेस्टहाउस का बोर्ड लगा दिया गया। जांच होने पर चेयरमैन ने तर्क दिया कि गेस्टहाउस का निर्माण चंदे से हुआ है, और जनहित में है, जबकि दूसरे पक्ष का आरोप था कि मामला सरकारी जमीन पर कब्जे का और वोटों के खेल का है। इस बार राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट पर मामला फंस गया और कार्रवाई के आदेश भी हो गए, लेकिन चेयरमैन के प्रभाव से मामला लटका रहा। आखिरकार योगी सरकार की सख्ती से कार्रवाई का जिन्न बाहर आ ही गया और गेस्टहाउस को ध्वस्त कराने की कार्रवाई हो गई।
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गांव कमलाईपुर निवासी मुकेश चंद्र यादव ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन में कंपिल चेयरमैन उदयपाल सिंह यादव के खिलाफ गांव पट्टी मदारी के तालाब की भूमि पर गेस्ट हाउस बनाकर कब्जा करने की शिकायत की थी। इस पर जांच हुई तो पता चला कि पूर्व में हुई शिकायत पर वर्ष 2021 में राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट पर कब्जे को हटाने के आदेश हुए थे। साथ ही 57 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था।
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इस पर शनिवार को एसडीएम गौरव शुक्ला और तहसीलदार कर्मवीर सिंह ने पुलिस फोर्स के साथ गेस्टहाउस के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। दो मंजिल आलीशान गेस्टहाउस को गिराने के लिए दो जेसीबी कम पड़ गई थीं। इस पर शाम को काम रोक दिया गया था।
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मौके पर पुलिस लगा दी गई थी। तहसीलदार ने बताया कि रविवार को अवकाश होने से कर्मचारियों की कमी रही। गेस्टहाउस के पिछले हिस्से की ऊंचाई ज्यादा होने से बड़ी मशीनों की व्यवस्था की गई है। सोमवार को कब्जा हटाने की कार्रवाई फिर शुरू होगी।
कंपिल। गांव पट्टी मदारी में सरकारी तालाब पर बने गेस्टहाउस को लेकर शिकायतकर्ताओं और चेयरमैन के बीच शाह और मात का खेल चलता रहा। गेस्टहाउस को कार्रवाई से बचाने के लिए पहले नगर पंचायत का स्कूल बताया गया, फिर सार्वजनिक गेस्टहाउस। इससे लोगों में संशय बना रहा। सपा सरकार में वर्ष 2015 में गांव पट्टी मदारी में तालाब की भूमि पर चेयरमैन उदयपाल सिंह ने आलीशान दो मंजिला भवन का निर्माण कराया था। राजनीतिक कद बढ़ने के साथ चेयरमैन के विरोधी भी बढ़े। इसके बाद तालाब की भूमि पर कब्जे की शिकायतें हुईं। शिकायतों को चेयरमैन ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया।
भवन को नगर पंचायत का स्कूल बताया गया, जिससे जांच ठंडे बस्ते में चली गई। बाद में फिर से शिकायत हुई तो भवन पर सार्वजनिक गेस्टहाउस का बोर्ड लगा दिया गया। जांच होने पर चेयरमैन ने तर्क दिया कि गेस्टहाउस का निर्माण चंदे से हुआ है, और जनहित में है, जबकि दूसरे पक्ष का आरोप था कि मामला सरकारी जमीन पर कब्जे का और वोटों के खेल का है। इस बार राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट पर मामला फंस गया और कार्रवाई के आदेश भी हो गए, लेकिन चेयरमैन के प्रभाव से मामला लटका रहा। आखिरकार योगी सरकार की सख्ती से कार्रवाई का जिन्न बाहर आ ही गया और गेस्टहाउस को ध्वस्त कराने की कार्रवाई हो गई।