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चीखता रहा दीपांशु, देखने नहीं आए डाक्टर

Fri, 11 Jun 2021 10:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jun 2021 10:00 PM IST
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Deepanshu kept crying, the doctor did not come to see
रोता रहा दीपांशु, देखने नहीं आए डॉक्टर
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फर्रुखाबाद। सरकारी अस्पताल में संवेदनहीनता की हदें पार हो गईं हैं। डीएम के निर्देश पर भर्ती हुए बच्चे का शुक्रवार को पेट फूलता रहा। गिड़गिड़ाने के बाद भी आठ घंटे तक डॉक्टर उसे देखने नहीं पहुंचे। दोपहर ढाई बजे खून चढ़ना शुरू हुआ। बच्चा चुप नहीं हुआ तो नर्स ने खून चढ़ाना बंद कर दिया। शाम पांच बजे बच्चे के रेफर होने की बात कही गई। इस पर माता पिता उसे लेकर निजी अस्पताल चले गए।
शमसाबाद क्षेत्र के गांव ऊगरपुर निवासी अरुण कुमार पाठक के पुत्र दीपांशु (7 माह) की गुरुवार को हालत खराब हो गई। पिता अरुण और मां अंजली उसे लेकर लोहिया पुरुष अस्पताल पहुंचे। यहां उन्हें ओपीडी में करीब दो घंटे तक दौड़ाया गया। डीएम से गुहार लगाई, तब इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इसके बाद मगर ड्यूटी डॉ. गौरव मिश्रा और फार्मासिस्ट सचींद्र द्विवेदी करीब ढाई घंटे तक वीगो नहीं लगा सके।
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बच्चे के शरीर में तमाम जगह नीडिल चुभोई गई। बाल रोग विशेषज्ञ/महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कैलाश दुल्हानी व डॉ. विवेक सक्सेना भी वीगो नहीं लगा पाए। इसके बाद परिजनों ने एक निजी अस्पताल ले जाकर 450 रुपये खर्च करके वीगो लगवाई। फिर उसे इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में भर्ती किया गया।
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यहां डॉ. कैलाश दुल्हानी ने गुरुवार को 100 एमएल खून चढ़वाया। शुक्रवार सुबह 9 बजे बच्चे को देखने पहुंचे। उन्होंने बाजार से लाने के लिए दवाएं लिखीं और शेष खून भी चढ़ाने को कहा। उनके जाने के बाद बच्चा रोने लगा। परेशान मां व पिता ने कई बार ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स और अन्य कर्मियों से डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा, मगर शाम पांच बजे तक कोई देखने नहीं पहुंचा।
शुक्रवार को दोपहर करीब ढाई बजे बचा खून चढ़ा दिया गया। कुछ ही देर में बच्चा बुरी तरह रोने लगा। इस पर बच्चे के मामा कुलदीप ने स्टाफ नर्स को बताया। काफी देर बाद पहुंची स्टाफ नर्स ने खून चढ़ाना बंद कर दिया। बच्चे की मां ने जैसे ही गले लगाया, तो वह चुप हो गया। दीपांशु के पिता अरुण ने बताया कि दो दिन में जो भी दवाएं दी गईं, वह बाजार से मंगवाईं।
यहां कोई सुनने वाला नहीं है। गुरुवार को जिलाधिकारी न कहते, तो बच्चे को भर्ती भी नहीं किया जाता। शाम पांच बजे एक महिला कर्मचारी ने कहा कि बच्चा तो यहां से रेफर हो चुका है। पिता ने कहा कि सुबह से किसी ने नहीं बताया। बच्चे का जीवन बचाना है, तो कुछ भी करेंगे। इसके बाद बच्चे को निजी अस्पताल लेकर चले गए।
सीएमएस को नहीं पता कहां है बच्चा
लोहिया पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने कहा कि बच्चे को डॉ. विवेक सक्सेना और डॉ. कैलाश दुल्हानी देख रहे हैं। ब्लड चढ़ाने की बात बताई गई थी। अब बच्चा कहां है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

बना दी थी रेफर स्लिप
बच्चे का इलाज कर रहे महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कैलाश दुल्हानी ने बताया कि बच्चे को सुबह 9 बजे देखने गए थे। वह एनीमिया और निमोनिया से पीड़ित है। उसकी रेफर स्लिप बना दी थी। अब परिजन ले गए या नहीं कहा नहीं जा सकता।
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