{"_id":"5de40ba68ebc3e549c3379f9","slug":"cultural-farrukhabad-news-knp5294710182","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीराम की बरात में छतों से बरसे पुष्प, आरती उतारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीराम की बरात में छतों से बरसे पुष्प, आरती उतारी
विज्ञापन
मेरापुर कसबा में निकली राम बरात में शामिल झांकी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : FARRUKHABAD
संकिसा। गांव मेरापुर में चल रही श्रीराम कथा में भगवान राम की भव्य बरात निकाली गई। इसमें दर्जनों झांकियों में देव प्रतिमाओं की आरती उतारी गई। भक्तों ने छतों से फूलों की वर्षा की। इससे पूर्व कथाव्यास आचार्य शंभूनाथ महाराज ने श्रीराम विवाद तक की कथा का मनोहारी वर्णन किया।
राम सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन शाम करीब सात बजे भव्य बरात का शुभारंभ हुआ। कथाव्यास आचार्य शंभूनाथ ने वेद मंत्रोच्चार के साथ भगवान का पूजन किया। इसके बाद बरात मुख्य मार्गों से निकाली गई। बरात में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, शंकर-पार्वती एवं हनुमान समेत कई झांकियां शामिल थीं। आसपास गांवों के महिला-पुरुषों ने नयनाभिराम झांकियों पर फूलों की वर्षा करके आरती भी उतारी। गांव के प्राचीन श्रीरामशाला मंदिर में जनकपुरी बनाई गई, जहां पर बरातियों को जलपान की व्यवस्था की गई।
इससे पूर्व व्यास जी ने राम विवाह की चर्चा करते हुए बताया कि जब भगवान राम कुछ बड़े हुए तो गुरु विश्वामित्र राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए मांग लिया। गुरु विश्वामित्र राम लक्ष्मण को अपने साथ ले जा रहे थे, तो उन्होंने रास्ते में ताड़का सहित कई राक्षसों का वध किया। गुरु विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को जनकपुरी के सीता स्वयंवर में ले गए। वहां लक्ष्मण ने जनकपुरी को देखने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने धनुष यज्ञ तक की कथा का वर्णन किया। आयोजन में समिति के सभी पदाधिकारी, बुजुर्ग, महिला-पुरुषों, युवाओं का खासा सहयोग रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
राम सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन शाम करीब सात बजे भव्य बरात का शुभारंभ हुआ। कथाव्यास आचार्य शंभूनाथ ने वेद मंत्रोच्चार के साथ भगवान का पूजन किया। इसके बाद बरात मुख्य मार्गों से निकाली गई। बरात में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, शंकर-पार्वती एवं हनुमान समेत कई झांकियां शामिल थीं। आसपास गांवों के महिला-पुरुषों ने नयनाभिराम झांकियों पर फूलों की वर्षा करके आरती भी उतारी। गांव के प्राचीन श्रीरामशाला मंदिर में जनकपुरी बनाई गई, जहां पर बरातियों को जलपान की व्यवस्था की गई।
विज्ञापन
इससे पूर्व व्यास जी ने राम विवाह की चर्चा करते हुए बताया कि जब भगवान राम कुछ बड़े हुए तो गुरु विश्वामित्र राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए मांग लिया। गुरु विश्वामित्र राम लक्ष्मण को अपने साथ ले जा रहे थे, तो उन्होंने रास्ते में ताड़का सहित कई राक्षसों का वध किया। गुरु विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को जनकपुरी के सीता स्वयंवर में ले गए। वहां लक्ष्मण ने जनकपुरी को देखने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने धनुष यज्ञ तक की कथा का वर्णन किया। आयोजन में समिति के सभी पदाधिकारी, बुजुर्ग, महिला-पुरुषों, युवाओं का खासा सहयोग रहा।
विज्ञापन