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Farrukhabad News: लोहिया अस्पताल की ओपीडी में उमड़ी भीड़, डॉक्टर नदारद
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संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। इसके बावजूद डॉक्टर नदारद दिखे। ऐसे में मरीज घंटों भटकने के बाद यूनानी डॉक्टर से दवा लेकर जाने को मजबूर रहे। हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को बिना दवाई के ही लौटना पड़ा। इमरजेंसी में भी डॉक्टर ने दवाएं लिखकर संतुष्ट किया। भीड़ के चलते ऑनलाइन पंजीकरण काउंटर पर धक्का-मुक्की होती रही।
लोहिया अस्पताल में सोमवार को 760 मरीजों की भीड़ पहुंची। सुबह आठ बजे से पहले ही पर्चा काउंटरों पर मरीजों का पहुंचना शुरू हो गया। ऑनलाइन पंजीकरण के अलावा पर्चा काउंटरों पर मरीजों और तीमारदारों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई बार धक्का-मुक्की के दौरान अस्पताल कर्मियों, गार्डों और सुरक्षा कर्मियों ने मशक्कत के बाद लोगों को शांत किया।
सुबह करीब 11 बजे ओपीडी में न तो कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मनोज पांडेय थे और न ही बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सक्सेना व डॉ. हरेंद्र चौहान। यही नहीं पैथोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीन कुमार को अचानक इमरजेंसी ड्यूटी करनी प़ड़ी। ऐसे में सिर्फ यूनानी डॉक्टर ही मरीजों को देखकर दवाएं लिखते रहे। कार्डियोलॉजिस्ट कमरे में तैनात कर्मियों ने बताया कि वह राउंड पर हैं।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रिषिकांत वर्मा भी नहीं थे। उनकी ड्यूटी दिव्यांग बोर्ड में लगने की वजह से कमरे के बाहर बोर्ड लगा दिया गाय। हड्डी रोग से पीड़ित करीब 175 मरीज अस्पताल में पहुंचे। इन्हें बिना दवा लिए ही घर जाना पड़ा। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि डॉक्टरों की कमी है। शासन को इसकी लिखित जानकारी हर माह दी जाती है। कोशिश है कि कोई भी मरीज बिना दवा लिए अस्पताल से न लौटे।
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। इसके बावजूद डॉक्टर नदारद दिखे। ऐसे में मरीज घंटों भटकने के बाद यूनानी डॉक्टर से दवा लेकर जाने को मजबूर रहे। हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को बिना दवाई के ही लौटना पड़ा। इमरजेंसी में भी डॉक्टर ने दवाएं लिखकर संतुष्ट किया। भीड़ के चलते ऑनलाइन पंजीकरण काउंटर पर धक्का-मुक्की होती रही।
लोहिया अस्पताल में सोमवार को 760 मरीजों की भीड़ पहुंची। सुबह आठ बजे से पहले ही पर्चा काउंटरों पर मरीजों का पहुंचना शुरू हो गया। ऑनलाइन पंजीकरण के अलावा पर्चा काउंटरों पर मरीजों और तीमारदारों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई बार धक्का-मुक्की के दौरान अस्पताल कर्मियों, गार्डों और सुरक्षा कर्मियों ने मशक्कत के बाद लोगों को शांत किया।
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सुबह करीब 11 बजे ओपीडी में न तो कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मनोज पांडेय थे और न ही बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सक्सेना व डॉ. हरेंद्र चौहान। यही नहीं पैथोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीन कुमार को अचानक इमरजेंसी ड्यूटी करनी प़ड़ी। ऐसे में सिर्फ यूनानी डॉक्टर ही मरीजों को देखकर दवाएं लिखते रहे। कार्डियोलॉजिस्ट कमरे में तैनात कर्मियों ने बताया कि वह राउंड पर हैं।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रिषिकांत वर्मा भी नहीं थे। उनकी ड्यूटी दिव्यांग बोर्ड में लगने की वजह से कमरे के बाहर बोर्ड लगा दिया गाय। हड्डी रोग से पीड़ित करीब 175 मरीज अस्पताल में पहुंचे। इन्हें बिना दवा लिए ही घर जाना पड़ा। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि डॉक्टरों की कमी है। शासन को इसकी लिखित जानकारी हर माह दी जाती है। कोशिश है कि कोई भी मरीज बिना दवा लिए अस्पताल से न लौटे।