{"_id":"5ce58e82bdec220785346e7c","slug":"155854815012-farrukhabad-news151","type":"story","status":"publish","title_hn":"किशोर की हत्या में दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
किशोर की हत्या में दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास
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विशेष अदालत एससी-एसटी के न्यायाधीश सैय्यद सरवर हुसैन रिजवी ने किशोर की हत्या व दूसरे युवक को घायल करने के मुकदमे में दो अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 40-40 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया है।
शहर कोतवाली के मोहल्ला मदारबाड़ी निवासी सुरेश चंद्र जाटव की मोहल्ला नरकसा निवासी मंजीत राजपूत व गुर्री उर्फ मनोज राजपूत से मुकदमे की रंजिश चल रही थी। 29 सितंबर 2011 को सुरेश चंद्र जाटव, पुत्र रोहित(17), पत्नी कमला, पुत्री पूजा व पारिवारिक भतीजे बृजेश के साथ मेला देखने जा रहे थे।
रात करीब 12 बजे डा. विवेक दीक्षित के घर के नजदीक बाइक से मंजीत राजपूत व गुर्री उर्फ मनोज व एक अन्य युवक आया। तीनों लोगों ने उसे और उसके परिवार वालों को घेर कर गाली देनी शुरू कर दी। विरोध करने पर तमंचा निकाल कर फायरिंग की।
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इससे पुत्र रोहित के पेट में और भतीजे बृजेश के हाथ में गोली लग गई। शोर होने पर आसपास के लोग वहां आ गए। इससे तीनों हमलावर वहां से भाग गए। दोनों घायलों को लोहिया अस्पताल लेकर गए। वहां डाक्टर ने रोहित को मृत घोषित कर दिया।
सुरेश चंद्र जाटव ने तीनों हमलावरों के खिलाफ हत्या, जान लेवा हमला और एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज कराया। विवेचक सीओ ने जांच कर अदालत में मंजीत राजपूत, गुर्री उर्फ मनोज और एक किशोर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। किशोर आरोपी की पत्रावली सुनवाई को किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।
अन्य दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमे में हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनूप कुमार तिवारी ने दलीले पेश कीं। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों को हत्या, जान लेवा हमला व एससी-एसटी एक्ट के जुर्म में दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
किशोर की हत्या में दो को आजीवन कारावास
दोनों पर 40-40 हजार रुपये किया गया जुर्माना
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शहर कोतवाली के मोहल्ला मदारबाड़ी निवासी सुरेश चंद्र जाटव की मोहल्ला नरकसा निवासी मंजीत राजपूत व गुर्री उर्फ मनोज राजपूत से मुकदमे की रंजिश चल रही थी। 29 सितंबर 2011 को सुरेश चंद्र जाटव, पुत्र रोहित(17), पत्नी कमला, पुत्री पूजा व पारिवारिक भतीजे बृजेश के साथ मेला देखने जा रहे थे।
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रात करीब 12 बजे डा. विवेक दीक्षित के घर के नजदीक बाइक से मंजीत राजपूत व गुर्री उर्फ मनोज व एक अन्य युवक आया। तीनों लोगों ने उसे और उसके परिवार वालों को घेर कर गाली देनी शुरू कर दी। विरोध करने पर तमंचा निकाल कर फायरिंग की।
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इससे पुत्र रोहित के पेट में और भतीजे बृजेश के हाथ में गोली लग गई। शोर होने पर आसपास के लोग वहां आ गए। इससे तीनों हमलावर वहां से भाग गए। दोनों घायलों को लोहिया अस्पताल लेकर गए। वहां डाक्टर ने रोहित को मृत घोषित कर दिया।
सुरेश चंद्र जाटव ने तीनों हमलावरों के खिलाफ हत्या, जान लेवा हमला और एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज कराया। विवेचक सीओ ने जांच कर अदालत में मंजीत राजपूत, गुर्री उर्फ मनोज और एक किशोर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। किशोर आरोपी की पत्रावली सुनवाई को किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।
अन्य दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमे में हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनूप कुमार तिवारी ने दलीले पेश कीं। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों को हत्या, जान लेवा हमला व एससी-एसटी एक्ट के जुर्म में दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
किशोर की हत्या में दो को आजीवन कारावास
दोनों पर 40-40 हजार रुपये किया गया जुर्माना