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Farrukhabad News: झूठा मुकदमा कराने पर अदालत ने ग्रामीण को किया तलब
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फर्रुखाबाद। झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप में दायर परिवाद में अपर सिविल जज (जू.डि.)/न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कौशिक ने पवन कुमार को तलब किया है। न्यायालय ने परिवादी और दो गवाहों के बयान व अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर प्रथमदृष्टया अपराध बनना माना है। अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी।
मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के हमीरपुर निवासी संतोष कुमार तिवारी ने गांव के ही पवन कुमार के खिलाफ परिवाद दायर किया। आरोप लगाया कि पवन ने उनके और परिजन के खिलाफ जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और जमीन पर कब्जे संबंधी झूठी शिकायतें पुलिस और न्यायालय में कीं। पुलिस जांच में आरोपों को असत्य बताए जाने के बाद संबंधित वाद न्यायालय से खारिज हो गया। परिवादी का कहना है कि शिकायतों के कारण उन्हें कई बार थाने जाना पड़ा। इससे गांव और समाज में उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। वह पुरोहित का काम करते हैं।
विवाद के बाद लोगों ने उनसे पंडिताई कराना बंद कर दिया, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ। न्यायालय ने पूर्व में अनुसूचित जाति/जनजाति न्यायालय से पारित आदेश का भी अवलोकन किया। न्यायालय ने कहा कि तलबी के स्तर पर केवल यह देखा जाना है कि प्रस्तुत साक्ष्यों से प्रथमदृष्ट्या अपराध बनता है या नहीं। उपलब्ध मौखिक और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर पवन कुमार को धारा 356 बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 मानहानि से संबंधित है।) में तलब करने के पर्याप्त आधार पाए गए। अन्य आरोपों के संबंध में इस स्तर पर पर्याप्त प्रामाणिक साक्ष्य नहीं मिले। परिवादी को सात दिन के भीतर आवश्यक पैरवी और गवाहों की सूची दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
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मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के हमीरपुर निवासी संतोष कुमार तिवारी ने गांव के ही पवन कुमार के खिलाफ परिवाद दायर किया। आरोप लगाया कि पवन ने उनके और परिजन के खिलाफ जातिसूचक गाली-गलौज, मारपीट और जमीन पर कब्जे संबंधी झूठी शिकायतें पुलिस और न्यायालय में कीं। पुलिस जांच में आरोपों को असत्य बताए जाने के बाद संबंधित वाद न्यायालय से खारिज हो गया। परिवादी का कहना है कि शिकायतों के कारण उन्हें कई बार थाने जाना पड़ा। इससे गांव और समाज में उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। वह पुरोहित का काम करते हैं।
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विवाद के बाद लोगों ने उनसे पंडिताई कराना बंद कर दिया, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ। न्यायालय ने पूर्व में अनुसूचित जाति/जनजाति न्यायालय से पारित आदेश का भी अवलोकन किया। न्यायालय ने कहा कि तलबी के स्तर पर केवल यह देखा जाना है कि प्रस्तुत साक्ष्यों से प्रथमदृष्ट्या अपराध बनता है या नहीं। उपलब्ध मौखिक और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर पवन कुमार को धारा 356 बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 मानहानि से संबंधित है।) में तलब करने के पर्याप्त आधार पाए गए। अन्य आरोपों के संबंध में इस स्तर पर पर्याप्त प्रामाणिक साक्ष्य नहीं मिले। परिवादी को सात दिन के भीतर आवश्यक पैरवी और गवाहों की सूची दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
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