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फटी टाट फट्टी पर बैठने को मजबूर बच्चे
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कमालगंज के प्राथमिक विद्यालय पूरनपुर में बिछी फटी चटाई।
- फोटो : FARRUKHABAD
कंपोजिट ग्रांट मद में स्कूलों को धनराशि मिलने के बावजूद बच्चों को बैठने के लिए साफसुथरी टाट फट्टी भी नसीब नहीं हो रही है। कई परिषदीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं को फटी टाट फट्टी पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि कुछ छात्र प्लास्टिक की बोरी पर ही बैठ जाते हैं।
परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 2018-2019 से कंपोजिट ग्रांट मद में बड़ी धनराशि दी जाती है। सौ बच्चों तक 25000 और 200 बच्चों तक 50 हजार रुपये सामान्य आवश्यकताओं के लिए दिए जाते हैं। शुक्रवार को प्राथमिक विद्यालय पूरनपुर में बच्चे फटी चटाई पर बैठे थे।
एक कमरे में तो आगे बिछी फटी चटाई के बाद प्लास्टिक की 2 बोरियां पड़ी थीं। हेड मास्टर मनोज कुमार का कहना था कि पिछले वर्ष कंपोजिट ग्रांट 25 हजार मिली थी। इस वर्ष अभी नहीं मिली। प्राथमिक विद्यालय कतरौली में भी टाट फट्टी जर्जर व फटी बिछी थीं।
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परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 2018-2019 से कंपोजिट ग्रांट मद में बड़ी धनराशि दी जाती है। सौ बच्चों तक 25000 और 200 बच्चों तक 50 हजार रुपये सामान्य आवश्यकताओं के लिए दिए जाते हैं। शुक्रवार को प्राथमिक विद्यालय पूरनपुर में बच्चे फटी चटाई पर बैठे थे।
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एक कमरे में तो आगे बिछी फटी चटाई के बाद प्लास्टिक की 2 बोरियां पड़ी थीं। हेड मास्टर मनोज कुमार का कहना था कि पिछले वर्ष कंपोजिट ग्रांट 25 हजार मिली थी। इस वर्ष अभी नहीं मिली। प्राथमिक विद्यालय कतरौली में भी टाट फट्टी जर्जर व फटी बिछी थीं।
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