{"_id":"5c6af5fcbdec2273934e1fa6","slug":"cattle-raising-exercise-in-gosadian-after-getting-money-in-farrukhabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"धनराशि मिलते ही गोसदनों में मवेशी बढ़ाने की कवायद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धनराशि मिलते ही गोसदनों में मवेशी बढ़ाने की कवायद
Mon, 18 Feb 2019 11:44 PM IST
मनोज कुमार
farrukhabad
farrukhabad
Published by: मनोज कुमार
Updated Mon, 18 Feb 2019 11:44 PM IST
विज्ञापन
cow
मुख्यमंत्री के फरमान के बावजूद अन्ना मवेशियों पर काबू नहीं पाया जा सका। अधिकांश आश्रय स्थल खाली पड़े हैं। गांव से लेकर शहर तक गोवंश आवारा घूम रहे हैं जिससे लोग परेशान हैं। शासन से मिली भरणपोषण की धनराशि का आवंटन होते ही गोसदनों व अस्थाई आश्रय स्थलों में अन्ना मवेशियों की संख्या बढ़ाने की कवायद होने लगी है। रविवार मध्य रात पालिका कर्मचारी अन्ना मवेशी पकड़ते दिखाई दिए।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में अन्ना पशुओं के आतंक से लोग परेशान हैं। मुख्यमंत्री ने गत माह ही अन्ना मवेशियों को पकड़ने का फरमान जारी किया था। इसके लिए 26 गोसदनों का भी निर्माण कराया गया। जबकि करीब 350 अस्थाई गोवंश आश्रम स्थल बनाए गए। कुछ दिन मवेशियों को पकड़ने के लिया अभियान चलाया गया। इसमें 6000 से अधिक मवेशी भी पकड़े गए। चारा पानी की व्यवस्था नगरपालिका व ग्राम पंचायतों को सौंपी गई। दो सप्ताह में ही अभियान ठंडा पड़ने के साथ आश्रय स्थलों में बंद गोवंश भी छोड़ दिए गए।
वहीं, करीब एक दर्जन मवेशी चारा आदि की व्यवस्था न होने से मर भी गए। शासन से मवेशियों के भरण-पोषण के लिए एक करोड़ रुपये जनपद को मिले। एक मवेशी के लिए 30 रुपये प्रति दिन के हिसाब से धन आवंटन की गाइड लाइन भी दी गई। इसके बाद नगरपालिका व 45 ग्राम पंचायतों के आश्रय स्थलों को 43 लाख 56 हजार रुपये आवंटित किए गए। अब आश्रय स्थलों में मवेशियों की संख्या बढ़ाने की कवायद चल रही है।
विज्ञापन
मध्य रात भोलेपुर स्थित हनुमान मंदिर के पास नगरपालिका के कर्मचारी अन्ना गोवंश पकड़कर डीसीएम में भर रहे थे। पालिका कर्मियों ने बताया कि एक दर्जन गोवंश पकड़े गए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. राजकिशोर ने बताया कि करीब 2250 मवेशियों के दो माह के भरण पोषण के लिए धनराशि आवंटित की गई है। अन्ना मवेशियों की धरपकड़ का अभियान चलाया जाएगा।
विज्ञापन
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में अन्ना पशुओं के आतंक से लोग परेशान हैं। मुख्यमंत्री ने गत माह ही अन्ना मवेशियों को पकड़ने का फरमान जारी किया था। इसके लिए 26 गोसदनों का भी निर्माण कराया गया। जबकि करीब 350 अस्थाई गोवंश आश्रम स्थल बनाए गए। कुछ दिन मवेशियों को पकड़ने के लिया अभियान चलाया गया। इसमें 6000 से अधिक मवेशी भी पकड़े गए। चारा पानी की व्यवस्था नगरपालिका व ग्राम पंचायतों को सौंपी गई। दो सप्ताह में ही अभियान ठंडा पड़ने के साथ आश्रय स्थलों में बंद गोवंश भी छोड़ दिए गए।
विज्ञापन
वहीं, करीब एक दर्जन मवेशी चारा आदि की व्यवस्था न होने से मर भी गए। शासन से मवेशियों के भरण-पोषण के लिए एक करोड़ रुपये जनपद को मिले। एक मवेशी के लिए 30 रुपये प्रति दिन के हिसाब से धन आवंटन की गाइड लाइन भी दी गई। इसके बाद नगरपालिका व 45 ग्राम पंचायतों के आश्रय स्थलों को 43 लाख 56 हजार रुपये आवंटित किए गए। अब आश्रय स्थलों में मवेशियों की संख्या बढ़ाने की कवायद चल रही है।
विज्ञापन
मध्य रात भोलेपुर स्थित हनुमान मंदिर के पास नगरपालिका के कर्मचारी अन्ना गोवंश पकड़कर डीसीएम में भर रहे थे। पालिका कर्मियों ने बताया कि एक दर्जन गोवंश पकड़े गए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. राजकिशोर ने बताया कि करीब 2250 मवेशियों के दो माह के भरण पोषण के लिए धनराशि आवंटित की गई है। अन्ना मवेशियों की धरपकड़ का अभियान चलाया जाएगा।