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ट्रेन से कटी 42 भेड़ें
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Mon, 25 Jul 2016 11:01 PM IST
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सहारनपुर मे कालका पसैंजर मे शव मिलने पर खडी ट्रेन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कंपिल थाना क्षेत्र के गांव नगरिया मोड़ से गुजरे रेलवे ट्रैक पर पहुंचीं 42 भेड़ें, दो बकरों और एक बकरी की कासगंज-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन से कटकर दर्दनाक मौत हो गई। ट्रैक के चारों ओर पशुओं के कटे शव देख पशु मालिक का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सूचना के बावजूद कोई भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।
थाना कंपिल क्षेत्र के गांव दीपपुर नगरिया निवासी सूरजपाल भेड़ पालन का धंधा करता है। सूरजपाल के मुताबिक सोमवार को वह अपनी आधा सैकड़ा से अधिक भेड़ों और अन्य पशुओं को लेकर चराने के लिए खेतों की ओर गया था। भेड़ें व अन्य पशु चरते-चरते नगरिया मोड़ के किनारे पहुंच गईं। मोड़ के पास से ही रेलवे ट्रैक निकला है।
भेड़ें व अन्य पशु चरते-चरते ट्रैक पर पहुंच गए और सूरजपाल को इसकी भनक नहीं लगी। इसी दौरान कासगंज से चलकर लखनऊ जाने वाली पैसेंजर ट्रेन उधर से धड़धड़ाते हुए गुजरी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेन इतनी तेज गति से थी के ट्रैक पर मौजूद पशु कटते हुए ट्रैक के किनारे गिरते चले गए। पशुओं को ट्रैक से हटने का मौका ही नहीं मिला और ट्रेन पशुओं को काटते हुए कायमगंज रेलवे स्टेशन की ओर रवाना हो गई।
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उधर, पशुओं की आवाज सुनकर सूरजपाल जब ट्रैक पर पहुंचा तो चारों ओर भेड़ों, बकरियों के कटे हुए रक्तरंजित शव बिखरे हुए पड़े थे। इस दौरान मौके पर काफी संख्या में ग्रामीण की भीड़ एकत्र हो गई। पशुओं को कटा देख सूरजपाल दहाड़े मारकर रोने लगा। उसका कहना था कि उसकी 42 भेड़ें, दो बकरियां और एक बकरे की ट्रेन से कटकर मौत हो गई।
एक भेड़ जख्मी हुई है और पांच भेड़ें जिंदा बची हैं। उसने बताया कि उसका लगभग तीन लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। इस दौरान घटना की जानकारी स्थानीय लेखपाल और कानूनगो को दी गई लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। उधर, पैसेंजर ट्रेन के चालक ने कायमगंज रेलवे स्टेशन पर घटना की सूचना दी। इस पर घटनास्थल पर पहुंचे रेलवे के मेट ने मरी पड़ी भेड़ों को ट्रैक से हटवाया।
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थाना कंपिल क्षेत्र के गांव दीपपुर नगरिया निवासी सूरजपाल भेड़ पालन का धंधा करता है। सूरजपाल के मुताबिक सोमवार को वह अपनी आधा सैकड़ा से अधिक भेड़ों और अन्य पशुओं को लेकर चराने के लिए खेतों की ओर गया था। भेड़ें व अन्य पशु चरते-चरते नगरिया मोड़ के किनारे पहुंच गईं। मोड़ के पास से ही रेलवे ट्रैक निकला है।
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भेड़ें व अन्य पशु चरते-चरते ट्रैक पर पहुंच गए और सूरजपाल को इसकी भनक नहीं लगी। इसी दौरान कासगंज से चलकर लखनऊ जाने वाली पैसेंजर ट्रेन उधर से धड़धड़ाते हुए गुजरी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेन इतनी तेज गति से थी के ट्रैक पर मौजूद पशु कटते हुए ट्रैक के किनारे गिरते चले गए। पशुओं को ट्रैक से हटने का मौका ही नहीं मिला और ट्रेन पशुओं को काटते हुए कायमगंज रेलवे स्टेशन की ओर रवाना हो गई।
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उधर, पशुओं की आवाज सुनकर सूरजपाल जब ट्रैक पर पहुंचा तो चारों ओर भेड़ों, बकरियों के कटे हुए रक्तरंजित शव बिखरे हुए पड़े थे। इस दौरान मौके पर काफी संख्या में ग्रामीण की भीड़ एकत्र हो गई। पशुओं को कटा देख सूरजपाल दहाड़े मारकर रोने लगा। उसका कहना था कि उसकी 42 भेड़ें, दो बकरियां और एक बकरे की ट्रेन से कटकर मौत हो गई।
एक भेड़ जख्मी हुई है और पांच भेड़ें जिंदा बची हैं। उसने बताया कि उसका लगभग तीन लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। इस दौरान घटना की जानकारी स्थानीय लेखपाल और कानूनगो को दी गई लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। उधर, पैसेंजर ट्रेन के चालक ने कायमगंज रेलवे स्टेशन पर घटना की सूचना दी। इस पर घटनास्थल पर पहुंचे रेलवे के मेट ने मरी पड़ी भेड़ों को ट्रैक से हटवाया।