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बूंदाबांदी ने आलू किसानों की बढ़ाई धड़कन
farrukhabad
Updated Wed, 14 Nov 2018 11:29 PM IST
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आलू की फसल।
- फोटो : अमर उजाला
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एकाएक बदले मौसम और बूंदाबांदी ने आलू किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अगर बरसात हो गई तो आलू की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। इसके साथ ही सरसों और खेतों में कटी धान की फसल भी बरबाद हो जाएगी। हालांकि इस बूंदाबांदी से गेहूं और सरसों समेत अन्य फसलों को लाभ होगा। किसानों का कहना है कि बूंदाबांदी से आलू की पैदावार पर करीब 10 से 15 प्रतिशत का असर पड़ने का अनुमान है।
जिले में सबसे ज्यादा आलू की खेती होती है। इस बार जनपद में 38 हजार हेक्टेयर भूमि में आलू की बुवाई हुई है। मंगलवार देर रात अचानक बदले मौसम ने आलू किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि गेहूं, सरसों और मटर आदि फसल के लिए बूंदाबांदी व बरसात लाभदायक है। एकाएक मौसम में ठंडक बढ़ने से किसान परेशान हैं। क्योंकि कई किसानों की धान की कटी फसल भी खेत में ही अभी पड़ी है।
किसान रामबहादुर राजपूत ने बताया कि बूंदाबांदी होने से नए आलू की पैदावार में करीब 15 से 20 प्रतिशत कमी आएगी। यदि बरसात हो गई तो आलू काफी बर्बाद हो जाएगा। खेतों में कटी धान की फसल भी सड़ जाएगी। हालांकि 10 प्रतिशत असर बूंदाबांदी से भी धान की फसल पर पड़ेगा।
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किसान महेशचंद्र का कहना है कि बूंदाबांदी से आलू की फसल पर असर पड़ना लाजिमी है। अगर बरसात हो गई तो आलू की बेल सड़ जाएगी, जिससे हम लोगों को काफी नुकसान होगा।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि बूंदाबांदी गेहूं, सरसों, मटर और मसूर की फसल के लिए काफी लाभदायक है। यदि बरसात हो जाती है तो और भी ज्यादा लाभ इन फसलों को होगा। उन्होंने बताया कि इन दिनों फसलों के लिए तापमान कम होना काफी अच्छा माना जाता है और बूंदाबांदी से तापमान कम हुआ है। आलू की फसल को बूंदाबांदी से कोई खास नुकसान नहीं होगा।
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जिले में सबसे ज्यादा आलू की खेती होती है। इस बार जनपद में 38 हजार हेक्टेयर भूमि में आलू की बुवाई हुई है। मंगलवार देर रात अचानक बदले मौसम ने आलू किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि गेहूं, सरसों और मटर आदि फसल के लिए बूंदाबांदी व बरसात लाभदायक है। एकाएक मौसम में ठंडक बढ़ने से किसान परेशान हैं। क्योंकि कई किसानों की धान की कटी फसल भी खेत में ही अभी पड़ी है।
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किसान रामबहादुर राजपूत ने बताया कि बूंदाबांदी होने से नए आलू की पैदावार में करीब 15 से 20 प्रतिशत कमी आएगी। यदि बरसात हो गई तो आलू काफी बर्बाद हो जाएगा। खेतों में कटी धान की फसल भी सड़ जाएगी। हालांकि 10 प्रतिशत असर बूंदाबांदी से भी धान की फसल पर पड़ेगा।
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किसान महेशचंद्र का कहना है कि बूंदाबांदी से आलू की फसल पर असर पड़ना लाजिमी है। अगर बरसात हो गई तो आलू की बेल सड़ जाएगी, जिससे हम लोगों को काफी नुकसान होगा।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि बूंदाबांदी गेहूं, सरसों, मटर और मसूर की फसल के लिए काफी लाभदायक है। यदि बरसात हो जाती है तो और भी ज्यादा लाभ इन फसलों को होगा। उन्होंने बताया कि इन दिनों फसलों के लिए तापमान कम होना काफी अच्छा माना जाता है और बूंदाबांदी से तापमान कम हुआ है। आलू की फसल को बूंदाबांदी से कोई खास नुकसान नहीं होगा।