फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Back breaking workmanship

कारखानेदारों की कमर तोड़ रही कारीगरी

Wed, 06 Jan 2016 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद Updated Wed, 06 Jan 2016 11:44 PM IST
विज्ञापन
Back breaking workmanship
फर्रुखाबाद। फर्रुखाबादी लहंगा तैयार करवाने में कारखानेदारों की कमर कारीगरी तोड़ रही है। एक लहंगा की कारीगरी छह हजार से 25 हजार रुपये पड़ रही है। इतनी महंगी कारीगरी के चलते फर्रुखाबादी लहंगा महंगा पड़ता है। इसी का फायदा उठाकर सूरत में मशीनों से तैयार करवाए जा रहे लहंगों ने जरदोजी बाजार में पैठ बनानी शुरू कर दी है।
विज्ञापन


शहर के कई कारखानेदारों के पास एक-एक साल से लहंगा का स्टॉक पड़ा है लेकिन इनकी डिमांड ही बाहरी मंडियों में नहीं हो रही है। इसके चलते कारखानेदार मजबूरी में औने-पौने दामों में ही लहंगा बेचने को मजबूर हैं। बाहर की मंडियों में धूम मचाने वाले फर्रुखाबादी लहंगा की डिमांड पिछले एक साल में गिरी है। सूरत में मशीन से तैयार होने वाले लहंगे के चलते फर्रुखाबादी लहंगा की मांग घटी है।
विज्ञापन


कारीगर पहले नफरी के हिसाब से काम करते थे लेकिन अब कारीगर ठेके पर काम कर रहे हैं। प्रति कारीगर एक-एक दिन में तीन से चार सौ रुपये की मजदूरी ले रहा है। कारीगरी महंगी होने से फर्रुखाबादी लहंगा महंगा पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सूरत का लहंगा जहां 6 हजार से 15 हजार रुपये में मिल जाता है।

वहीं, फर्रुखाबादी लहंगा 12000 से 90 हजार रुपये में पड़ता है। यही वजह है कि बाजार में सूरत के लहंगों की डिमांड बढ़ गई है। सूरत के लहंगे की डिमांड बढ़ने से पंजाब, दिल्ली, लुधियाना, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद की मंडियों में फर्रुखाबादी लहंगे की डिमांड नहीं हो रही है। इसका असर कारखानेदारों पर पड़ रहा है। कारखानेदारों के यहां लाखों रुपये लागत के लहंगे स्टॉक में पड़े हैं। कारखानेदार औने-पौने दाम में ही फर्रुखाबादी लहंगा बेचकर कारीगरी निकालने की जद्दोजहद में लगे हैं।

40 हजार से 80 हजार रुपये की रेंज में उनके पास 10 लहंगे बिकने के लिए रखे हैं। यह लहंगे उन्होंने पिछले साल बनवाए थे। सूरत के लहंगों की डिमांड के चलते दिल्ली, मुंबई और पंजाब से आर्डर ही नहीं मिल रहे हैं। अब तो 20-20 हजार रुपये में ही लहंगे बिक जाएं तो बेच दें। फर्रुखाबादी लहंगा की कारीगरी काफी महंगी पड़ रही है। एक लहंगा 10 से 15 दिन में तैयार होता है। इसमें कारीगरी करीब 20 से 25 हजार रुपये बैठ जाती है। अब तो कारीगर दिहाड़ी के हिसाब से लहंगा बनाते हैं। लहंगा की एक कली बनाने में कारीगर तीन से चार सौ रुपये की दिहाड़ी लेता है।- मुदस्सिर खां (जरदोजी कारखानेदार)


तीन से 10 किलो का बनता लहंगा
फर्रुखाबादी लहंगा तीन से लेकर 10 किलो तक का बनता है। फर्रुखाबादी लहंगा में खाका की डिजाइन पर हाथ से आरी, टिकी, कोरा, दपका, मोती आदि की सिलाई का कार्य होता है। कारखानेदारों का कहना है कि सूरत के लहंगे का तोड़ यह है कि आरी के लहंगे पर सिर्फ घुंडी-कुटकी का ही काम करवाया जाए। इससे लहंगा की लागत कम आएगी और लहंगा खूबसूरत भी लगेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed