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Farrukhabad News: अस्पतालों में आयुर्वेदिक दवाएं नहीं, आयुष डॉक्टर कर रहे एलोपैथिक इलाज
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फर्रुखाबाद। सीएमओ के अधीन संचालित सीएचसी व पीएचसी में आयुष डॉक्टरों की तैनाती है, लेकिन यहां आयुर्वेदिक दवाएं नहीं हैं। एक वर्ष से दवाओं की खरीद भी नहीं हो सकी। आयुष डॉक्टरों से एलोपैथिक इलाज कराया जा रहा है।
कोरोना महामारी के बाद लोगों का आयुर्वेद पर विश्वास बढ़ा है। पेट संबंधी बीमारी हो या जोड़ों का दर्द, अक्सर मरीज आयुर्वेदिक दवाओं की मांग करते हैं। सरकार का भी आयुर्वेद पर जोर है। सीएमओ के अधीन संचालित सीएचसी व पीएचसी पर 14 आयुष डॉक्टरों के अलावा दो होम्योपैथिक व चार यूनानी डॉक्टरों की तैनाती है। प्रतिवर्ष आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद के लिए शासन से अलग से बजट दिया जाता है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद पर अधिक ध्यान नहीं दे रहे हैं।
एक वर्ष पूर्व खरीदी गई आयुर्वेदिक दवाएं अधिकांश अस्पतालों में खत्म हो चुकी हैं। कुछ अस्पतालों में 30 दवाओं के सापेक्ष कम मात्रा में कुछ दवाएं ही बची हैं। इससे आयुष डॉक्टर अब अस्पतालों में एलोपैथिक इलाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब विभाग आयुष डॉक्टरों की तैनाती कर रहा है तो आयुर्वेदिक दवाएं भी अस्पताल में उपलब्ध होनी चाहिए। जब अस्पताल में ही दवा नहीं होगी तो वह मरीज को कहां से उपलब्ध कराएंगे। इस वित्तीय वर्ष के साढ़े छह माह बीतने के बावजूद आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद भी नहीं की गई।
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दवा खरीद के लिए शासन से नहीं मिला बजट
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि अस्पतालों में आयुर्वेदिक दवाओं की उपलब्धता के बारे में वह जानकारी करेंगे। उन्हें जानकारी दी गई है कि अभी शासन से बजट नहीं मिला है। इससे आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद नहीं की जा सकी है। बजट मिलते ही दवाओं की खरीद कर अस्पतालों में पहुंचाया जाएगा।
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कोरोना महामारी के बाद लोगों का आयुर्वेद पर विश्वास बढ़ा है। पेट संबंधी बीमारी हो या जोड़ों का दर्द, अक्सर मरीज आयुर्वेदिक दवाओं की मांग करते हैं। सरकार का भी आयुर्वेद पर जोर है। सीएमओ के अधीन संचालित सीएचसी व पीएचसी पर 14 आयुष डॉक्टरों के अलावा दो होम्योपैथिक व चार यूनानी डॉक्टरों की तैनाती है। प्रतिवर्ष आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद के लिए शासन से अलग से बजट दिया जाता है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद पर अधिक ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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एक वर्ष पूर्व खरीदी गई आयुर्वेदिक दवाएं अधिकांश अस्पतालों में खत्म हो चुकी हैं। कुछ अस्पतालों में 30 दवाओं के सापेक्ष कम मात्रा में कुछ दवाएं ही बची हैं। इससे आयुष डॉक्टर अब अस्पतालों में एलोपैथिक इलाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब विभाग आयुष डॉक्टरों की तैनाती कर रहा है तो आयुर्वेदिक दवाएं भी अस्पताल में उपलब्ध होनी चाहिए। जब अस्पताल में ही दवा नहीं होगी तो वह मरीज को कहां से उपलब्ध कराएंगे। इस वित्तीय वर्ष के साढ़े छह माह बीतने के बावजूद आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद भी नहीं की गई।
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दवा खरीद के लिए शासन से नहीं मिला बजट
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि अस्पतालों में आयुर्वेदिक दवाओं की उपलब्धता के बारे में वह जानकारी करेंगे। उन्हें जानकारी दी गई है कि अभी शासन से बजट नहीं मिला है। इससे आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद नहीं की जा सकी है। बजट मिलते ही दवाओं की खरीद कर अस्पतालों में पहुंचाया जाएगा।