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जीपीएस रिपोर्ट एंबुलेंस सेवा की खोल देगी पोल
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फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग के तमाम दावों के बावजूद एंबुलेंस सेवा में सुधार नहीं हो रहा है। शून्य सीरीज की छह एंबुलेंस दिन में मात्र एक मरीज लाकर उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। टायर न होेने से जहानगंज की एंबुलेंस 15 दिन से खड़ी है। वहीं जज कालोनी में लगी एंबुलेंस लोकल के मरीज ही ला रही है। एंबुलेंस संगठन के अध्यक्ष डीजल की समस्या बता रहे हैं। ऐसे में जिलाधिकारी एंबुलेंस सेवा की हकीकत जानने के लिए जीपीएस रिपोर्ट भी चेक करा सकते हैं। फिलहाल उन्होंने एंबुलेंस को सामने मंगवाकर देखने की बात कही है।
अमर उजाला ने 25 अगस्त के अंक में टायर-डीजल की कमी से 21 एंबुलेंस ठप, शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस मामले को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने गंभीरता से लिया। उन्होंने सीएमओ को जांच करने के निर्देश दिए। सीएमओ ने जिलाधिकारी को जो जांच आख्या सौंपी, उसमें उन्होंने टायर की समस्या को अल्पकालिक करार दिया। एएलएस (इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस टायर के अभाव में आठ दिन से खड़ी थी।
सोमवार को उसमें टायर डाले गए। जबकि सीएमओ ने पहले ही टायर बदलने संबंधी रिपोर्ट सौंप दी। इसी तरह जहानगंज की एक एंबुलेंस 71 हजार किमी चलकर 15 दिन से खड़ी है। जज कालोनी में लगी एंबुलेंस 65 हजार किमी चलकर स्थानीय मरीजों को लाकर रीडिंग बढ़ा रही है। ऐसे में मरीजों को आटो, टेंपो और बाइक से अस्पताल पहुचाया जा रहा है।
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लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी से रेफर मरीजों को भी एंबुलेंस कई बार नहीं मिल पाती। कंडम हो चुकीं शून्य सीरीज की छह-सात एंबुलेंस चल रही हैं। इनकी रीडिंग चार-चार लाख किमी हो चुकी है। इनमें सीटें, स्ट्रेचर, खिड़कियां समेत सब कुछ जर्जर है। मोहम्मदाबाद की एक गाड़ी एक महीने में 20 दिन खड़ी रहती है। अभी भी कई दिन से खड़ी है।
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अमर उजाला ने 25 अगस्त के अंक में टायर-डीजल की कमी से 21 एंबुलेंस ठप, शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस मामले को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने गंभीरता से लिया। उन्होंने सीएमओ को जांच करने के निर्देश दिए। सीएमओ ने जिलाधिकारी को जो जांच आख्या सौंपी, उसमें उन्होंने टायर की समस्या को अल्पकालिक करार दिया। एएलएस (इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस टायर के अभाव में आठ दिन से खड़ी थी।
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सोमवार को उसमें टायर डाले गए। जबकि सीएमओ ने पहले ही टायर बदलने संबंधी रिपोर्ट सौंप दी। इसी तरह जहानगंज की एक एंबुलेंस 71 हजार किमी चलकर 15 दिन से खड़ी है। जज कालोनी में लगी एंबुलेंस 65 हजार किमी चलकर स्थानीय मरीजों को लाकर रीडिंग बढ़ा रही है। ऐसे में मरीजों को आटो, टेंपो और बाइक से अस्पताल पहुचाया जा रहा है।
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लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी से रेफर मरीजों को भी एंबुलेंस कई बार नहीं मिल पाती। कंडम हो चुकीं शून्य सीरीज की छह-सात एंबुलेंस चल रही हैं। इनकी रीडिंग चार-चार लाख किमी हो चुकी है। इनमें सीटें, स्ट्रेचर, खिड़कियां समेत सब कुछ जर्जर है। मोहम्मदाबाद की एक गाड़ी एक महीने में 20 दिन खड़ी रहती है। अभी भी कई दिन से खड़ी है।