फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   After crop destroyed MANREGA also broken hope

फसल बर्बादी के बाद मनरेगा ने भी तोड़ी आस

Fri, 17 Apr 2015 11:48 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Fri, 17 Apr 2015 11:48 PM IST
विज्ञापन
After crop destroyed MANREGA also broken hope
ओलावृष्टि और बरसात से फसल की बर्बादी ने किसानों को तोड़ दिया है। परिवार
विज्ञापन
का भरण-पोषण करने का संकट भी है। बटाई पर फसल करने वाले मनरेगा जाबकार्ड धारक किसानों को आस थी कि कम से कम गांव में ही मजदूरी तो मिल जाएगी। इससे परिवार का भरण-पोषण तो हो सकेगा। यह आस भी टूटती नजर आ रही है। अधिकतर गांवों में मनरेगा के तहत कार्य नहीं हो रहे है। कहीं-कहीं तो वर्षों से ग्रामीणों को जाबकार्ड होने के बावजूद मनरेगा से काम ही नहीं मिला है।

जिन्हें मिला भी उनका एक-एक साल से भुगतान खाते में नहीं आया है। फसल बर्बाद होने और मनरेगा के तहत कार्य न मिलने से किसानों के सामने परिवार के भरण पोषण का संकट बढ़ने लगा है। ऐसे में किसान अब शहर की ओर पलायन करने को मजबूर है। अमर उजाला ने ब्लाकवार मनरेगा की हकीकत की पड़ताल करवाई तो मनरेगा का कड़वा सच सामने आया।

मनरेगा का काम नहीं, ढूंढ रहे मजदूरी
कमालगंज के लोहिया ग्राम जीरागौर के मनरेगा मजदूर इमरान, मेराज, रईस, राशिद, शमी मोहम्मद, चांद मियां, मुकीम, सुमेर सिंह का कहना है कि वह बटाई पर खेती करते है लेकिन बरसात से फसल बर्बाद हो गई है। अब मनरेगा योजना के जॉब कार्ड पर काम नहीं मिलता। मनरेगा का भुगतान भी 120 से 140 रुपये ही खाते में आता है। जाब कार्ड सेक्रेटरी और प्रधान अपने पास रखते हैं। तीन माह से काम नहीं मिला है। आरोप लगाया कि प्रधान अपने चहेते जाब कार्ड धारकों को

ज्यादा काम देते हैं। इस बार बरसात से फसल बर्बाद हो गई है और मनरेगा के तहत काम भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण करने के लिए जहां मजदूरी मिलेगी, वहां करेंगे। मजदूरी के लिए वह लोग गांव में स्थित भट्ठों, भवन निर्माण कार्य में मजदूरी करने के लिए ठेकेदारों से संपर्क कर रहे हैं। अगर गांव में काम न मिला तो शहर जाएंगे। परिवार का तो पेट पालना ही है।

यहां तो सालों से नहीं मिला काम
अमृतपुर तहसील क्षेत्र के गांव माखन नगला निवासी विनोद कुमार ने बताया कि उनका जाबकार्ड बना है लेकिन तीन-चार साल से काम नहीं मिल रहा है। एक एकड़ खेत में गेहूं की फसल की थी जो बर्बाद हो गई है। मनरेगा की मजदूरी का सहारा था लेकिन प्रधान कह देते हैं कि मनरेगा से काम हो ही नहीं रहा है। विनोद कुमार कहते हैं कि गांव या फिर भट्ठों पर

मजदूरी करके बच्चों का पेट पालेंगे। चपरा गांव के मदनपाल जाटव कहते हैं कि छह साल पहले जाबकार्ड बना था। शुरू में दो-तीन दिन ही काम मिला। अमैयापुर के अनिल कुमार ने बताया कि जाबकार्ड है लेकिन काम नहीं। एक बीघा खेत में

खड़ी गेहूं की फसल भी बर्बाद हो गई है। गांव में मजदूरी करके बच्चों का पेट भर रहे हैं। राकेशचंद्र निवासी बड़ागांव परतापुर का कहना है कि जाबकार्ड बने करीब तीन साल हो गए लेकिन काम आज तक नहीं मिला है। सात बीघा खेत में खड़ी आलू और गेहूं की फसल भी बर्बाद हो चुकी है। गांव में ही मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

जेसीबी से डाली जा रही मिट्टी
कंपिल के गांव निजामुद्दीनपुर निवासी कुंवरबहादुर, दीप सिंह, करन सिंह, राजकुमार, सर्वेश कुमार, महेश कुमार, सोबरन, शेर सिंह, रूपलाल, अजंट सिंह, प्रदीप कुमार और माया देवी का कहना है कि उनके पास जाबकार्ड हैं लेकिन एक साल से काम नहीं मिला है। गांव में दो बार मनरेगा के तहत विकास कार्य हुए लेकिन उनको काम नहीं दिए गए। गिरधारी नगला में

मनरेगा के तहत एक माह पहले मिट्टी डाली गई थी। आरोप है कि प्रधान ने जेसीबी से मिट्टी डलवा दी। बताया कि उन लोगों ने खेत में तंबाकू, गेहूं की फसल की थी। बरसात और ओलावृष्टि से फसल भी खराब हो गई है। मनरेगा मजदूरी से आसरा था लेकिन इसके तहत भी काम नहीं मिल रहा है। आरोप लगाया कि प्रधान ने अपात्रों के भी जाबकार्ड बनाकर खाते

खोल दिए हैं। माया देवी ने बताया कि उन्होंने 42 दिन मनरेगा के तहत काम किया था लेकिन अभी तक मजदूरी का पैसा नहीं आया है। प्रधान से शिकायत कई बार कर चुकी हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि उन लोगों को मनरेगा के तहत कार्य दिलवाया जाए।

मिल रहा मनरेगा के तहत कार्य
नवाबगंज के गांव कड़िऊली निवासी रामशरन, राजाराम, बाबा और आनंद कुमार का कहना है कि उन लोगों के जाबकार्ड हैं। फरवरी-मार्च में मनरेगा के तहत काम किया था। उसका भुगतान भी हो गया है। उन लोगों का गेहूं इस बार खेत में बर्बाद हो गया है। मनरेगा मजदूरी से ही बच्चों का भरण-पोषण करेंगे। प्रधान राजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि मनरेगा के तहत

कार्य कराए जा रहे हैं। कोई भी जाबकार्ड धारक काम मांगने आ रहा है उसे मनरेगा के तहत कार्य दिया जा रहा है। गांव ढर्राशादी नगर के लखपत, उदयपाल और अखिलेश कुमार आदि का कहना है कि इस बार बरसात में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। मनरेगा के तहत मजदूरी करेंगे। फरवरी में मनरेगा तहत कार्य किया था, जिसकी मजदूरी भी मिल गई है।

शहर की ओर पलायन करने को मजबूर
शमसाबाद के गांव दलेलगंज निवासी श्रीपाल ने बताया कि एक बीघा खेत में गेहूं की फसल की थी। फसल तो बर्बाद हो गई है। मनरेगा जाबकार्ड है पर काम नहीं मिल रहा है। मजदूरी के लिए दिल्ली या कानपुर जाएंगे। परिवार का पेट तो भरना ही है। कमलेश कुमार निवासी कुइंयाखेड़ा का कहना है कि सवा बीघा खेत में गेहूं की फसल की थी। बरसात में कटी पड़ी गेहूं

की फसल नष्ट हो गई। जाबकार्ड है लेकिन महीने में सिर्फ एक बार ही काम मिलता है। ऐसे में बच्चों का पेट कैसे भरेगा। परिवार को लेकर लखनऊ या कानपुर चले जाएंगे। वहीं पर मेहनत मजदूरी करेंगे। इंद्रपाल, सुखवीर, गिरीशचंद्र, उदयवीर और रजनेश निवासी दलेलगंज का कहना है कि फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। प्रधान के पास जाबकार्ड बनवाने गए थे लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। आरोप लगाया कि प्रधान अपने चहेतों के जाबकार्ड बना रहे हैं। अब जब गांव में काम नहीं मिल रहा है तो शहर जाना मजबूरी है।

15 दिन काम मिला पर मजदूरी नहीं
मोहम्मदाबाद के गांव मौधा के मनरेगा जॉबकार्ड धारक बलराम सिंह, रमेश बाल्मीकि, रामनिवास बाल्मीकि, श्याम गोपाल, राम आसरे और उमाशंकर का कहना है कि पिछले सत्र में मनरेगा योजना के तहत 15 दिन काम मिला था। मजदूरी समय से नही मिली। परिवार के सदस्यों का पेट भरने को वह मजदूरी पर फसल की कटाई करते है। इस बार बरसात होने के

कारण फसल बर्बाद हो गई। गांव में फसल कटाई का काम मिलने की उम्मीद समाप्त हो गई है। इस कारण परिवार के सदस्यों का पालन पोषण करने के लिए  शहर में मजदूरी करने जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed