कारोबारियों ने एसाइड में नहीं दिखाई दिलचस्पी

Farrukhabad Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। जरी और वस्त्र उद्योग के विकास को बनी एसाइड योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है। योजना के तहत आवेदन की आखिरी तारीख 10 अगस्त थी, किंतु किसी भी कारोबारी समूहों ने आवेदन नहीं किया। पेंच योजना के संचालन में आर्थिक हक को लेकर फंसा है। कारोबारी जिला उद्योग केंद्र को कार्यदायी संस्था मानने को तैयार नहीं हैं। वे सामूहिक सुविधा केंद्र के हाथों योजना का क्रियान्वयन चाहते हैं, किंतु शासन ने इसे तवज्जो नहीं दी। इस पर फैसला नए महा उद्योग प्रबंधक के आने के बाद ही हो सकता है।
जिले में जरी और वस्त्र छपाई का तगड़ा कारोबार है। इसके विकास को अरसे से योजना की मांग हो रही थी। इस पर सूबे की सरकार ने सामूहिक सुविधा केंद्र के जरिए विकास का खाका तैयार किया है। योजना समूह के जरिए क्रियान्वित होनी है। इसमें 60 लाख 66 हजार की रकम समूह इकाई को जमा करनी होगी, जो बतौर जमानत कार्यदायी संस्था के पास जमा रहेगी। 2 करोड़ 75 लाख रुपए केंद्र सरकार देगी। कार्यदायी संस्था जिला उद्योग केंद्र ने योजना में सहभागिता के लिए 10 अगस्त तक आवेदन मांगे थे, किंतु किसी भी क ारोबारी ने आवेदन नहीं किया। मामला आर्थिक हक को लेक र उलझ गया है।
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित गोयल का कहना है कि कार्यदायी संस्था समूह इकाई को बनाने की मांग की गई थी, किंतु शासन ने तवज्जो नहीं दी। उनका कहना है कि जिला उद्योग केंद्र को मानीटरिंग का काम दिया जाना चाहिए। जरी उद्योग विकास समिति प्रोजेक्ट रकम जमा करने को अभी भी तैयार है, किंतु शर्त मानने पर ही कारोबारी आगे आएंगे।
इन हालातों में योजना वापस जा सकती है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक एचडी राम का प्रमोशन के बाद तबादला हो गया है। यह पद अभी खाली है। विभाग के जनसूचना अधिकारी आरके कटियार कहते हैं कि नए महाप्रबंधक के आने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। यह योजना लाल सराय के पास 1100 स्क्वायर जमीन पर चालू होगी। 700 स्क्वायर में पक्का निर्माण होगा। इसमें कमरे बनेंगे। यहां डिजाइन और पैकेजिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। आधुनिक स्तर की प्रिंटिंग और डिजाइन स्क्रीन लगेंगी। कारोबारी यहां से बाजार की मांग के अनुरूप डिजाइन ले सकेंगे। इन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजार देने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।
जरदोजी से जुडे़ हैं एक लाख कारीगर
फर्रुखाबाद। जिले में जरदोजी का बड़ा कारोबार है। करीब 200 कारखाने चल रहे हैं। जिले भर में लगभग एक लाख कारीगर जरी का काम करते हैं। 40 हजार कारीगर शहरी क्षेत्र में हैं। इनमें से 80 फीसदी महिलाएं हैं। जरी के आइटम सीरिया, लेबनान, दुबई और लंदन तक जाते हैं।
फर्रुखाबाद। एसाइड योजना पर अमल होने से कारीगरों का भी भला हो जाएगा। अभी बड़ी संख्या में कारखाने अपंजीकृत हैं। ऐसे में कारीगरों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। योजना से जुड़ जाने से इन्हें पंजीकरण कराना होगा, इन्हें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 का संशोधन भी मानना पड़ेगा। इसके मुताबिक प्रतिमाह अकुशल श्रमिकों को 2600 रुपए अर्द्धकुशल श्रमिकों को 2964 और कुशल श्रमिकों को 3290 रुपए देने होंगे। साथ महंगाई भत्ता भी देना पड़ेगा।

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