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अपने ही बने हैं जान के दुश्मन
Farrukhabad
Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
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मोहम्मदाबाद। थानाक्षेत्र के नगला बिदाहा में रह रहे भाई बहन का मुसीबत साथ नहीं छोड़ रही है। पहले तो जल्लाद पिता ने कार में ही उनकी दो बहनों और मां को जिंदा जला डाला और संरक्षण देने के बाद अब ताऊ का परिवार उन्हें प्रताड़ित करने लगा है। पत्नी और दो बेटियों की हत्या के मामले में पिता जेल में बंद है। बेसहारा हुई बहन सुधा अपने भाई पंकज को लेकर पुलिस की चौखट पर नाक रगड़ रही है और न्याय की गुहार लगा रही है लेकिन पुलिस है कि उत्पीड़न के इस गंभीर मामले को भी साधारण तरीके से लेकर उन्हें टरका रही है। सुधा को आशंका है कि उनकी जमीन और संपत्ति हड़पने के लिए ताऊ का परिवार प्रताड़ित कर रहा है।
ग्राम नगला बिदाहा निवासी कु. सुधा यादव उर्फ अनुपम ने बताया कि उसके पिता अमर सिंह यादव पुलिस में सिपाही हैं। करीब सात साल पहले उनकी तैनाती कानपुर के स्वरूप नगर थाने में थी। बताया कि बड़ी बहन ममता की शादी के लिए खरीददारी करने को पूरा परिवार 29 अप्रैल 2005 को मारूति कार से छिबरामऊ बाजार गया था। पिता अमर सिंह के अलावा मां उर्मिला देवी, भाई बहनों में सुधा, ममता, पूजा और पंकज साथ में थे। सुधा के मुताबिक बाजार से लौटते समय उधरनपुर गांव के समीप कालीनदी पुल पर पिता ने गाड़ी रोक दी। कार में सभी को बंद करके आग लगी दी। किसी तरह कार की खिड़की का शीशा तोड़कर उसमें जल रहे लोग चीखे चिल्लाए तो आसपास से गुजर रहे लोगों ने बचाया। तब तक पिता वहां से निकल भागा था। इस घटना में सभी झुलसे हुए लोगों को राहगीरों ने अस्पताल पहुंचाया था। वहीं से छिबरामऊ कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई थी। सभी को अस्पताल ले जाए जाने में पुलिस कर्मियों ने मदद की थी। इलाज के दौरान मां उर्मिला और दो बहनों ममता व पूजा की मौत हो गई थी। सुधा और पंकज की जान बच गई थी। इस घटना के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था और पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर पिता अमर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तब से अमर सिंह जेल में ही है। उधर घटना के बाद सुधा और उसके भाई पंकज को ताऊ ताई के परिवार ने अपने संरक्षण में लिया था। लेकिन घर के बगल में ही छप्पर डालकर सुधा पंकज के साथ रह रही है।
सुधा के मुताबिक कुछ दिनों तक तो सब ठीकठाक चलता रहा फिर ताऊ के लड़के उन्हें प्रताड़ित करने लगे। बताया कि पिछले दिनों बकरी बांधने के मामले में उलाहना देने पर ताऊ सर्वेश और उनके पुत्र विपिन ने सुधा के साथ मारपीट भी की। जिसमें पुलिस ने महज एनसीआर ही लिखकर मामले को टाल दिया था। अब पुलिस की कार्रवाई से सुधा और पंकज संतुष्ट नहीं है। कहा है कि उनकी संपत्ति और जमीन हड़पने के लिए ताऊ का परिवार षडयंत्र रच रहा है। लेकिन पुलिस आरोपियों की ही मदद कर रही है। सुधा का कहना है कि पुलिस पर से उसका भरोसा उठ गया है इसलिए अब प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से ही न्याय दिलाए जाने की गुहार लगाएगी।
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नहीं छोड़ूंगी जमीन और मकान
वक्त की मारी सुधा इतनी मुसीबत आने के बाद भी जमीन छोड़ने पर राजी नहीं है। कहती है कि नियती उसके साथ इससे बुरा क्या कर सकती है। लेकिन जमीन और मकान नहीं छोड़ेगी। न्याय पाकर ही दम लेगी। रोते हुए सुधा ने बताया कि भाई पंकज सीधा साधा है मेहनत मजदूरी करके गुजारा करने के लिए कह रहा है लेकिन वह मुख्यमंत्री से जरूर मिलेगी और न्याय की गुहार लगाएगी।
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ग्राम नगला बिदाहा निवासी कु. सुधा यादव उर्फ अनुपम ने बताया कि उसके पिता अमर सिंह यादव पुलिस में सिपाही हैं। करीब सात साल पहले उनकी तैनाती कानपुर के स्वरूप नगर थाने में थी। बताया कि बड़ी बहन ममता की शादी के लिए खरीददारी करने को पूरा परिवार 29 अप्रैल 2005 को मारूति कार से छिबरामऊ बाजार गया था। पिता अमर सिंह के अलावा मां उर्मिला देवी, भाई बहनों में सुधा, ममता, पूजा और पंकज साथ में थे। सुधा के मुताबिक बाजार से लौटते समय उधरनपुर गांव के समीप कालीनदी पुल पर पिता ने गाड़ी रोक दी। कार में सभी को बंद करके आग लगी दी। किसी तरह कार की खिड़की का शीशा तोड़कर उसमें जल रहे लोग चीखे चिल्लाए तो आसपास से गुजर रहे लोगों ने बचाया। तब तक पिता वहां से निकल भागा था। इस घटना में सभी झुलसे हुए लोगों को राहगीरों ने अस्पताल पहुंचाया था। वहीं से छिबरामऊ कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई थी। सभी को अस्पताल ले जाए जाने में पुलिस कर्मियों ने मदद की थी। इलाज के दौरान मां उर्मिला और दो बहनों ममता व पूजा की मौत हो गई थी। सुधा और पंकज की जान बच गई थी। इस घटना के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था और पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर पिता अमर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तब से अमर सिंह जेल में ही है। उधर घटना के बाद सुधा और उसके भाई पंकज को ताऊ ताई के परिवार ने अपने संरक्षण में लिया था। लेकिन घर के बगल में ही छप्पर डालकर सुधा पंकज के साथ रह रही है।
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सुधा के मुताबिक कुछ दिनों तक तो सब ठीकठाक चलता रहा फिर ताऊ के लड़के उन्हें प्रताड़ित करने लगे। बताया कि पिछले दिनों बकरी बांधने के मामले में उलाहना देने पर ताऊ सर्वेश और उनके पुत्र विपिन ने सुधा के साथ मारपीट भी की। जिसमें पुलिस ने महज एनसीआर ही लिखकर मामले को टाल दिया था। अब पुलिस की कार्रवाई से सुधा और पंकज संतुष्ट नहीं है। कहा है कि उनकी संपत्ति और जमीन हड़पने के लिए ताऊ का परिवार षडयंत्र रच रहा है। लेकिन पुलिस आरोपियों की ही मदद कर रही है। सुधा का कहना है कि पुलिस पर से उसका भरोसा उठ गया है इसलिए अब प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से ही न्याय दिलाए जाने की गुहार लगाएगी।
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नहीं छोड़ूंगी जमीन और मकान
वक्त की मारी सुधा इतनी मुसीबत आने के बाद भी जमीन छोड़ने पर राजी नहीं है। कहती है कि नियती उसके साथ इससे बुरा क्या कर सकती है। लेकिन जमीन और मकान नहीं छोड़ेगी। न्याय पाकर ही दम लेगी। रोते हुए सुधा ने बताया कि भाई पंकज सीधा साधा है मेहनत मजदूरी करके गुजारा करने के लिए कह रहा है लेकिन वह मुख्यमंत्री से जरूर मिलेगी और न्याय की गुहार लगाएगी।