{"_id":"75332","slug":"Farrukhabad-75332-34","type":"story","status":"publish","title_hn":"अभी से परीक्षा में नकल करना सीख रहे हैं नौनिहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अभी से परीक्षा में नकल करना सीख रहे हैं नौनिहाल
Farrukhabad
Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। परिषदीय स्कूलों में साल भर गुरूजी ने पढ़ाया-लिखाया जरूर नहीं, इम्तिहानों में बच्चों को नकल करना जरूर सिखा दिया। पढ़ाई की दुर्दशा के बाद परीक्षाओं में शिक्षक ही नकल करा रहे हैं। गुरूवार से शुरू हुईं परिषदीय स्कूलों की सालाना परीक्षाओं ने साल भर की पढ़ाई लिखाई की पोल खोल दी है। कहीं ब्लैक बोर्ड पर शिक्षकों ने प्रश्नों के साथ उत्तर लिख दिए थे तो कहीं कांपी पर पूरा पेपर हल कर दिया गया था। इसके बाद भी बच्चे कांपी पर शुद्व लिखावट नहीं लिख पाए। कक्षा 5 ही नहीं, कक्षा 8 की परीक्षाओं का भी ऐसा ही हाल रहा। शिक्षकों की इस मनमानी को देखने वाला कोई नहीं था। यूं भी शिक्षकों के पास अपनी इज्जत बचाने के लिए नकल कराने के अलावा कोई चारा भी नहीं था।
जिले में 1160 प्राइमरी व 557 जूनियर स्कूल हैं। गुरूवार से हुई परीक्षाओं में नकल रोकने के बजाय गुरूजी ने खुद ही नकल करवाई। सुबह की पहली पाली में कक्षा 5 का हिंदी भाषा का पेपर था। स्कूलों को परीक्षा के लिए पेपर नहीं मिले हैं। ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखे जाने थे। शिक्षकों को शायद मालूम था कि साल भर पढ़ाई लिखाई न होने से वह उत्तर नहीं लिख पाएंगे सो उन्होंने बोर्ड पर उत्तर भी लिख डाले। बच्चे सही से नकल भी नहीं कर पाए। बोर्ड से उत्तर लिखने में भी उन्होंने हर पंक्ति में गलती की। कई जगह गुरूजी ने कांपी पर खुद ही प्रश्न लिखकर उत्तर हल कर डाले। बच्चों को इन्हें नकल करने के लिए दे दिया गया। बच्चे परीक्षा देने के लिए कांपी व किताबें भी साथ लेकर आए थे। जिन स्कूलों में ब्लैक बोर्ड का इंजताम नहीं था, वहां बच्चों ने कांपी व किताबों से नकल की। गुरूजी बैठे बैठे बतियाते रहे। कक्षा 5 ही नहीं बल्कि कक्षा 8 में की परीक्षा में भी ऐसा ही हाल रहा। सुबह की पाली में कक्षा 8 की हिंदी साहित्य, व्याकरण तथा अनिवार्य संस्कृत की परीक्षा थी। इस गोरखधंधे पर शिक्षकों का दबी जुबान से कहना था कि बच्चे फेल हो गए तो अपनी ही बदनामी होगी। ऐसे में इज्जत बचाने के लिए नकल न करवाएं तो क्या करें। स्कूलों में परीक्षा के दौरान भी हाजिरी भी पूरी नहीं रही। करीब 60 फीसदी ही परीक्षा देने पहुंचे। परिषदीय परीक्षाओं को हाकिमों ने भी तबज्जो नहीं दी। बीएसए कौशल किशोर व खंड शिक्षा अधिकारियों के कहीं भी पहुंने की सूचना नहीं है।
विज्ञापन
जिले में 1160 प्राइमरी व 557 जूनियर स्कूल हैं। गुरूवार से हुई परीक्षाओं में नकल रोकने के बजाय गुरूजी ने खुद ही नकल करवाई। सुबह की पहली पाली में कक्षा 5 का हिंदी भाषा का पेपर था। स्कूलों को परीक्षा के लिए पेपर नहीं मिले हैं। ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखे जाने थे। शिक्षकों को शायद मालूम था कि साल भर पढ़ाई लिखाई न होने से वह उत्तर नहीं लिख पाएंगे सो उन्होंने बोर्ड पर उत्तर भी लिख डाले। बच्चे सही से नकल भी नहीं कर पाए। बोर्ड से उत्तर लिखने में भी उन्होंने हर पंक्ति में गलती की। कई जगह गुरूजी ने कांपी पर खुद ही प्रश्न लिखकर उत्तर हल कर डाले। बच्चों को इन्हें नकल करने के लिए दे दिया गया। बच्चे परीक्षा देने के लिए कांपी व किताबें भी साथ लेकर आए थे। जिन स्कूलों में ब्लैक बोर्ड का इंजताम नहीं था, वहां बच्चों ने कांपी व किताबों से नकल की। गुरूजी बैठे बैठे बतियाते रहे। कक्षा 5 ही नहीं बल्कि कक्षा 8 में की परीक्षा में भी ऐसा ही हाल रहा। सुबह की पाली में कक्षा 8 की हिंदी साहित्य, व्याकरण तथा अनिवार्य संस्कृत की परीक्षा थी। इस गोरखधंधे पर शिक्षकों का दबी जुबान से कहना था कि बच्चे फेल हो गए तो अपनी ही बदनामी होगी। ऐसे में इज्जत बचाने के लिए नकल न करवाएं तो क्या करें। स्कूलों में परीक्षा के दौरान भी हाजिरी भी पूरी नहीं रही। करीब 60 फीसदी ही परीक्षा देने पहुंचे। परिषदीय परीक्षाओं को हाकिमों ने भी तबज्जो नहीं दी। बीएसए कौशल किशोर व खंड शिक्षा अधिकारियों के कहीं भी पहुंने की सूचना नहीं है।
विज्ञापन