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अब चिंतामणि तालाब की खुदाई

Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
Farrukhabad
Farrukhabad Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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शमसाबाद। नगलानान के ऐतिहासिक चिंतामणी तालाब के पौराणिक महत्व का पता लगाने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व एवं इतिहास विभाग की टीम ने वहां खुदाई शुरू कर दी है। टीम का अनुमान है कि तालाब करीब चार सौ वर्ष पुराना हो सकता है।
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गांव नगलानान में लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व एवं प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. डीपी तिवारी के निर्देशन में टीम के सदस्य अमित सिंह व प्रशांत बाबू ने ऐतिहासिक चिंतामणी तालाब में खुदाई का काम शुरू करवाया। तीस अप्रैल से शुरू किए गए उत्खनन कार्य में तालाब में बारह फिट गहरा गड्ढा खुदवाया गया है। लेकिन अभी तक टीम को वहां से कोई भी ऐतिहासिक महत्व की वस्तु नहीं मिली है। टीम के सदस्य अमित सिंह ने बताया कि तालाब चार सौ वर्ष पुराना प्रतीत होता है। खुदाई के दौरान जो भी चीजें प्रमाण के रूप में मिलेंगी उनसे ही इसके पौराणिक महत्व के बारे में सही जानकारी मिल पाएगी। तालाब की चाहरदीवारी छोटी इंटों से बनी है। तालाब के उत्तर दक्षिण दो कोठरी बनी है और चारों कोनो पर गुंबद बने हैं।
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ग्रामीण शिवकुमार, कमलेश चतुर्वेदी, जगदीश पाठक, सुरेश मिश्रा ने बताया कि 18 साल पहले तक तालाब में पानी भरा रहता था। मान्यता है कि इसमें नहाने से चर्म रोग दूर हो जाते थे। धीरे-धीरे इसका पानी खत्म होता चला गया। पहले तालाब में पास ही स्थित बंबे से पानी भर दिया जाता था। ग्रामीणों ने बताया कि तालाब की पश्चिमी दीवार पर उर्दू लिपि में कुछ लिखा था। वर्ष 2008 में पूर्व प्रधान शोभित गंगवार ने तालाब की मरम्मत एवं गेट बनवाते समय उस पर प्लास्टर करवा दिया था।
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