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महंगाई पर भारी पड़ी आस्था, बाजार गुलजार
Farrukhabad
Updated Sat, 27 Sep 2014 05:32 AM IST
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फर्रुखाबाद। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 25 सितंबर से हो रहा है। इसके चलतेबुधवार को बाजार में भीड़ रही। महंगाई की मार के बाद भी खरीददारी करने के लिए सुबह से शाम तक दुकानों पर लोग उमड़े।
नवरात्र का शुभारंभ गुरुवार से हो रहा है। इसके चलते एक दिन पहले आस्थावानों ने कलश स्थापना व मां का पूजन-अर्चन करने के लिए खरीदारी की। रेलवे रोड, नेहरू रोड, आवास-विकास, पक्कापुल, साहबगंज चौराहा, आवास-विकास और बढ़पुर की बाजारों में पंसारी की दुकानों और फल की ठेलियों पर भीड़ उमड़ी। मिट्टी का कलश 10 से 50 रुपये और नारियल 20 से 30 रुपए तक बिका। लहंगा पटका और चुनरी की भी खूब बिक्री हुई। व्रत रखने वाले लोगों ने गोला, मखाना, किशमिश, मूंगफली के दाने, सेब, पेठा और छुहारा की खरीददारी की। नवरात्र के चलते फलों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। मठिया देवी पर फल की दुकान लगाए राकेश कुमार ने बताया कि त्योहार से फलों पर पांच से आठ रुपये तक की महंगाई आई है। सब्जी विक्रेता रामकुमार ने बताया कि हरी सब्जियों में तीन-चार रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। आलू ने तो कमर तोड़कर रख दी है। वहीं अखंड ज्योति जलाने के लिए देशी घी भी जमकर बिका। पल्ला गल्ला मंडी में देशी घी विक्रेता रामसिंह ने बताया रोज की अपेक्षा घी की डिमांड काफी ज्यादा रही। पूजन सामग्री की दुकानों पर भी महिलाओं की काफी भीड़ दिखी।
कलश स्थापना और अखंड ज्योति का महत्व
फर्रुखाबाद। नवरात्र पर कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाने का अपना महत्व होता है। इससे मनवांछित फल प्राप्त होते हैं। आचार्य योगीराज दुबे का कहना है कि कलश में सभी देवताओं का वास माना गया है। इसमें इंद्र, वरुण आदि देवताओं संग त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु व महेश) का आह्वान एवं पूजन किया जाता है। कलश के मुख में विष्णु, कंठ में महेश व कलश के निचले भाग में ब्रह्मा का निवास माना गया है। माथे में मात्रिकाओं तथा जमीन में धरती का निवास माना गया है। कलश के जल में गंगा, यमुना व सरस्वती नदियों का संगम माना गया है। कलश में चारों वेद और वेद माता गायत्री की उपस्थिति मानी गई है। नौ दिन तक घर में अखंड ज्योति जलाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है। लाल रंग का कपड़ा और एक नारियल घर के मंदिर में जरूर रखें। कलश में पांच सुपारी, शक्कर, चावल और श्रद्घानुसार सिक्का डालें।
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यह पहनें वस्त्र
मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए नौ दिनों तक अलग-अलग रंग के वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। इसके अनुसार नवरात्र के प्रथम दिन पीले रंग का कपड़ा, दूसरे दिन हरा, तीसरे दिन स्लेटी, चौथे दिन नारंगी, पांचवें दिन सफेद, छठवें दिन लाल, सातवें दिन नीला, आठवें दिन गुलाबी और नौवें दिन बैगनी रंग का वस्त्र धारण कर सकते हैं।
व्रत में यह खाएं
सिंघाड़ा आटा व कुट्टू आटा की पूड़ी, परांठा, पकौड़ी आदि, मखाना व साबूदाना की खिचड़ी, पकौड़ा, लड्डू, मखाना की रबड़ी, खीर आदि, आलू फ्राई, दही आलू, रायता, मीठा हलवा आदि। इसके अलावा फल आदि का भी सेवन कर सकते हैं।
इस तरह करें पूजन
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। ऐसा संभव न हो सके तो प्रात: काल स्नान करें। मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौं और गेहूं मिलाकर बोएं। उसी के पास पृथ्वी का पूजन करें। वेदी के स्थान पर ही कलश की स्थापना करें। कलश में रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और कलावा लपेटें। जिस जगह कलश स्थापित करें वहां रोली या हल्दी से अष्टदल कमल बनाकर उसके ऊपर कलश स्थापित करें। कलश में जल भरकर चंदन, पंच-पल्लव, दूर्वा, पंचामृत, सुपारी, साबुत हल्दी, कुश, गौशाला की मिट्टी डालें। इसके बाद कलश को वस्त्र से अलंकृत करें। इसके बाद इस पर चावल या जौ से भरे पात्र स्थापित करें फिर उस पर लाल वस्त्र लपेटे हुए नारियल को रखें। कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें।
खड़े नारियल की न करें स्थापना
कलश के ऊपर नारियल को खड़ा न रखें। इससे पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती। शास्त्रों में कहा गया है कि नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्घि होती है और ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं। पूरब की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है। नारियल का मुख सदैव साधक अपनी तरफ रखे।
देवी के नौ मंत्र
पहली देवी शैलपुत्री जी का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु प्रकृतिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। वंदे वांछित लाभाय चंदार्धकृतशेखराम्, वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।
दूसरी देवी ब्रह्मचारिणी जी का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु सृष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। करपद्माभ्याम अक्षमालाकमण्डलु देवि, प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
तीसरी देवी चंद्रघंटा का मंत्र
पिंडजप्रवरारूढ़ा चंडकोपास्त्रतैर्युता, प्रसादं तुनते मह्यां चंद्रघंटेति विश्रुता।
चौथी देवी कूष्मांडा का मंत्र
सुरा संपूर्ण कलश रुधिराप्लुतमेव च, दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे।
पांचवीं देवी स्कंदमाता का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया, शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।
छठी देवी कात्यायनी का मंत्र
चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना, कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानव घातिनी। या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
सातवीं देवी मां कालरात्रि का मंत्र
ऊं एें ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै, एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लंबोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी, वामपादोल्लसल्लोहलता कंटक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङकरी।
आठवीं देवी मां महागौरी का मंत्र
श्वेतवृषे समारूढ़ा श्वेतांबरधरा शुचि:, महागौरी शुभम् दद्यान्महादेवप्रमोददा।
नौवीं देवी मां सिद्घिदात्री जी का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। नमस्तेस्तु महामाया श्रीपीठे सुरपूजिते, शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते।
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नवरात्र का शुभारंभ गुरुवार से हो रहा है। इसके चलते एक दिन पहले आस्थावानों ने कलश स्थापना व मां का पूजन-अर्चन करने के लिए खरीदारी की। रेलवे रोड, नेहरू रोड, आवास-विकास, पक्कापुल, साहबगंज चौराहा, आवास-विकास और बढ़पुर की बाजारों में पंसारी की दुकानों और फल की ठेलियों पर भीड़ उमड़ी। मिट्टी का कलश 10 से 50 रुपये और नारियल 20 से 30 रुपए तक बिका। लहंगा पटका और चुनरी की भी खूब बिक्री हुई। व्रत रखने वाले लोगों ने गोला, मखाना, किशमिश, मूंगफली के दाने, सेब, पेठा और छुहारा की खरीददारी की। नवरात्र के चलते फलों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। मठिया देवी पर फल की दुकान लगाए राकेश कुमार ने बताया कि त्योहार से फलों पर पांच से आठ रुपये तक की महंगाई आई है। सब्जी विक्रेता रामकुमार ने बताया कि हरी सब्जियों में तीन-चार रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। आलू ने तो कमर तोड़कर रख दी है। वहीं अखंड ज्योति जलाने के लिए देशी घी भी जमकर बिका। पल्ला गल्ला मंडी में देशी घी विक्रेता रामसिंह ने बताया रोज की अपेक्षा घी की डिमांड काफी ज्यादा रही। पूजन सामग्री की दुकानों पर भी महिलाओं की काफी भीड़ दिखी।
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कलश स्थापना और अखंड ज्योति का महत्व
फर्रुखाबाद। नवरात्र पर कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाने का अपना महत्व होता है। इससे मनवांछित फल प्राप्त होते हैं। आचार्य योगीराज दुबे का कहना है कि कलश में सभी देवताओं का वास माना गया है। इसमें इंद्र, वरुण आदि देवताओं संग त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु व महेश) का आह्वान एवं पूजन किया जाता है। कलश के मुख में विष्णु, कंठ में महेश व कलश के निचले भाग में ब्रह्मा का निवास माना गया है। माथे में मात्रिकाओं तथा जमीन में धरती का निवास माना गया है। कलश के जल में गंगा, यमुना व सरस्वती नदियों का संगम माना गया है। कलश में चारों वेद और वेद माता गायत्री की उपस्थिति मानी गई है। नौ दिन तक घर में अखंड ज्योति जलाने से घर की नकारात्मकता दूर होती है। लाल रंग का कपड़ा और एक नारियल घर के मंदिर में जरूर रखें। कलश में पांच सुपारी, शक्कर, चावल और श्रद्घानुसार सिक्का डालें।
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यह पहनें वस्त्र
मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए नौ दिनों तक अलग-अलग रंग के वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। इसके अनुसार नवरात्र के प्रथम दिन पीले रंग का कपड़ा, दूसरे दिन हरा, तीसरे दिन स्लेटी, चौथे दिन नारंगी, पांचवें दिन सफेद, छठवें दिन लाल, सातवें दिन नीला, आठवें दिन गुलाबी और नौवें दिन बैगनी रंग का वस्त्र धारण कर सकते हैं।
व्रत में यह खाएं
सिंघाड़ा आटा व कुट्टू आटा की पूड़ी, परांठा, पकौड़ी आदि, मखाना व साबूदाना की खिचड़ी, पकौड़ा, लड्डू, मखाना की रबड़ी, खीर आदि, आलू फ्राई, दही आलू, रायता, मीठा हलवा आदि। इसके अलावा फल आदि का भी सेवन कर सकते हैं।
इस तरह करें पूजन
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। ऐसा संभव न हो सके तो प्रात: काल स्नान करें। मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौं और गेहूं मिलाकर बोएं। उसी के पास पृथ्वी का पूजन करें। वेदी के स्थान पर ही कलश की स्थापना करें। कलश में रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और कलावा लपेटें। जिस जगह कलश स्थापित करें वहां रोली या हल्दी से अष्टदल कमल बनाकर उसके ऊपर कलश स्थापित करें। कलश में जल भरकर चंदन, पंच-पल्लव, दूर्वा, पंचामृत, सुपारी, साबुत हल्दी, कुश, गौशाला की मिट्टी डालें। इसके बाद कलश को वस्त्र से अलंकृत करें। इसके बाद इस पर चावल या जौ से भरे पात्र स्थापित करें फिर उस पर लाल वस्त्र लपेटे हुए नारियल को रखें। कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें।
खड़े नारियल की न करें स्थापना
कलश के ऊपर नारियल को खड़ा न रखें। इससे पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती। शास्त्रों में कहा गया है कि नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्घि होती है और ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं। पूरब की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है। नारियल का मुख सदैव साधक अपनी तरफ रखे।
देवी के नौ मंत्र
पहली देवी शैलपुत्री जी का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु प्रकृतिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। वंदे वांछित लाभाय चंदार्धकृतशेखराम्, वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।
दूसरी देवी ब्रह्मचारिणी जी का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु सृष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। करपद्माभ्याम अक्षमालाकमण्डलु देवि, प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
तीसरी देवी चंद्रघंटा का मंत्र
पिंडजप्रवरारूढ़ा चंडकोपास्त्रतैर्युता, प्रसादं तुनते मह्यां चंद्रघंटेति विश्रुता।
चौथी देवी कूष्मांडा का मंत्र
सुरा संपूर्ण कलश रुधिराप्लुतमेव च, दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे।
पांचवीं देवी स्कंदमाता का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया, शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।
छठी देवी कात्यायनी का मंत्र
चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना, कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानव घातिनी। या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
सातवीं देवी मां कालरात्रि का मंत्र
ऊं एें ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै, एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लंबोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी, वामपादोल्लसल्लोहलता कंटक भूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङकरी।
आठवीं देवी मां महागौरी का मंत्र
श्वेतवृषे समारूढ़ा श्वेतांबरधरा शुचि:, महागौरी शुभम् दद्यान्महादेवप्रमोददा।
नौवीं देवी मां सिद्घिदात्री जी का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। नमस्तेस्तु महामाया श्रीपीठे सुरपूजिते, शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते।