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बेमौसम बारिश ने तोड़े किसानों के अरमान

Sun, 16 Feb 2014 05:30 AM IST
Farrukhabad
Farrukhabad Updated Sun, 16 Feb 2014 05:30 AM IST
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फर्रुखाबाद। दो दिन पहले आई परदेशी हवाओं ने किसानों की जेब पर कैंची चला दी है। बूंदाबांदी से किसानों के चेहरे की रंगत उड़ा दी है। अभी दो दिन तक मौसम के मिजाज में बदलाव की संभावना नहीं है। ऐसे में गेहूं छोड़ बाकी सभी फसलों के खराब होने का डर है। ऐसे में किसानों की मुसीबत बढ़ना तय है। साथ ही फसल खराबी की वजह से महंगाई भी बढ़ सकती है। बारिश ने सर्दी के तेवर तीखे कर दिए हैं। शनिवार को पारा अधिकमत 13 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम पांच डिग्री सेल्सियस रहा। पेश है बारिश के बाद के हालात की पड़ताल करती रिपोर्ट-
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पूर्वी हवाओं का रुख बदलने पर साफ होगा मौसम
फर्रुखाबाद। मौसम का मिजाज एकाएक बदल गया है। दो दिन से रुक-रुक कर बारिश का दौर चल रहा है। इससे पारे में गिरावट हुई है। शनिवार को अधिकतम तापमान 13 एवं न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस रहा।
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गुरुवार शाम से शुरू हुई बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। शुक्रवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। देर रात कहीं बारिश, तो कहीं-कहीं छिटपुट ओले भी पड़े हैं। शनिवार सुबह होते ही किसान खेतों पर पहुंच गए और खेतों से पानी निकासी की व्यवस्था की। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। दोपहर में कुछ पल के लिए हल्की सी धूप हुई, लेकिन यह धूप मंद गति से चल रही सर्द हवाओं के चलते बेअसर रही। लोग गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। शहर में आम दिनों की अपेक्षा भीड़भाड़ भी कम रही। हर कोई सर्दी से बचने की जुगत में लगा नजर आया। विभिन्न स्थानों पर लोग अपने स्तर पर अलाव भी जलाए बैठे नजर आए। बद्री विशाल डिग्री कालेज के भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. केके खरे के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बारिश हुई है। तिब्बत के पठार से लेकर हिमालय पर बर्फबारी का दौर जारी है। ऐसे में अभी भी ओले पड़ने की आशंका है। दो दिन बाद पूर्वी हवाओं के रुख बदलने के बाद मौसम साफ हो सकता है।
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गेहूं छोड़ बाकी फसलों को नुकसान
फर्रुखाबाद। बेमौसम की बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहा तो किसानों को आलू, चना एवं सब्जी की खेती में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गुरुवार एवं शुक्रवार को हुई बारिश के बाद गेहूं की फसल को फायदा मिलने के साथ दलहनी, तिलहनी एवं सब्जी की खेती पर विपरीत असर पड़ना तय है। किसान विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञ डा. सुशील कुमार यादव के मुताबिक यह पानी आलू की मिट्टी को सख्त बना देगा। ऐसे में आलू के दाने की बढ़ोत्तरी प्रभावित होगी। साथ ही जिन स्थानों पर खेत में पानी भर गया है वहां का आलू दागी हो जाएगा। इसी तरह चना, अरहर आदि फसलों के फूल प्रभावित होने की संभावना है। सरसों की अगेती फसल तैयार है। ऐसे पानी के साथ हवा चलने से फसल जमीन में गिर गई है। साथ ही जो पिछैती सरसों है, उसमें भी मौसम साफ न होने की वजह से रोग लग सकता है। तंबाकू एवं सब्जी की खेती को भी यह पानी नुकसान करेगा।

क्या करें किसान
- खेत में पानी भरने न दें। क्यारियों से तत्काल पानी निकाल दें।
- फंफूद लगने की स्थिति हो तो तुरंत मैंकोजेब का छिड़काव करें।
- कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही दवा का प्रयोग करें।

शहर से गांव तक कीचड़
फर्रुखाबाद। बेमौसम बारिश ने शहर से गांव तक कीचड़ ही कीचड़ कर दिया है। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस बारिश ने शहर में नगर पालिका परिषद की ओर से कराई जा रही सफाई व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। शहर के बांगकूंचा, गढ़ी कोहना, लिंजीगंज, मनिहारी, पल्ला बाजार आदि मोहल्लों में जगह-जगह जलभराव होने के साथ ही सड़कें कीचड़ से पट गई हैं। इससे लोगों को उसी में से होकर आना जाना पड़ रहा है। नगर पंचायत कमालगंज, मोहम्मदाबाद, शमसाबाद, कंपिल में भी सफाई व्यवस्था ध्वस्त है। हल्की सी बारिश होती हर जगह-कीचड़ की कीचड़ नजर आ रहा है। लोग उसी में से होकर आनेजाने को विवश हैं।



समूची अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित
फर्रुखाबाद। मौसम के बिगड़े रुख से समूची अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। बारिश ने आलू के साथ ही दूसरी फसलों को भी प्रभावित किया है। बद्री विशाल डिग्री कालेज के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एमएस सिद्दीकी कहते हैं कि खाद्य महंगाई कम होने से थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन बेमौसम की बारिश का असर पूर्ति-आपूर्ति पर पड़ेगा। फसल खराबी की वजह से समूचे देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। जहां तक आलू का सवाल है तो फर्रुखाबाद की अर्थव्यवस्था में आलू मेरुदंड है। आलू उत्पादन प्रभावित होने का सीधा सा मतलब है उसका दाम बढ़ना। दुखद पहलू यह है कि इसका किसानों को ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा। क्योंकि लागत अधिक होने से उनकी आर्थिक स्थित पहले ही खराब हो चुकी है। आलू के प्रभावित होने से दूसरी खाद्य पदार्थों का दाम बढ़ना भी तय है।
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