मनरेगा मजदूरों को पैसा मिला नहीं, वेबसाइट पर भुगतान पूरा

Farrukhabad Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। लघु सिंचाई विभाग में मनरेगा से हुए कामाें में गड़बड़झाला सामने आया है। विभागीय अभियंता ने मजदूरों को बिना भुगतान किए ही मनरेगा की वेबसाइट पर भुगतान होना दिखा दिया। आडिट में यह खुलासा होने के बाद डीडीओ प्रह्लाद सिंह ने अवर अभियंता के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभागीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है।
लघु सिंचाई विभाग में मनरेगा के तहत दिसंबर 2009 से अप्रैल 2012 तक कराए गए काम में मनमानी की गई। यह काम अवर अभियंता जितेंद्र कुमार की देखरेख में हुए हैं। कायमगंज ब्लाक में तालाब के काम में श्रमिकों को भुगतान नहीं किया गया। सरमन के खेत में तालाब की खुदाई हुई। यह मस्टर रोल 92309 से 92320 पर यह दर्ज हैं। श्रमिकों को 2,17,440 रुपए का भुगतान नहीं हुआ है। मोहद्दीनगर में कृपाराम के खेत में तालाब की ख्ुादाई हुई। इसका 1,36,800 रुपए का भुगतान नहीं हुआ। सूरज पाल के खेत में समतलीकरण के 68,363 रुपए का भुगतान भी अभी तक लटका है। नत्थूलाल के खेत के समतलीकरण के काम का 96,580 रुपए का भी मजदूरों को भुगतान नहीं किया गया। झब्बू सिंह के खेत के समतलीकरण का 98,640 रुपए का भुगतान भी लटका है। इंद्रजीत के खेत के समतलीकरण का 2,08,560 व 31,320 रुपए का भुगतान मजदूरों को नहीं हुआ। सुखवीर के खेत का भी मनरेगा से समतलीकरण हुआ था। इसका 31,320 व 55,920 रुपए का भुगतान भी नहीं हो पाया है। मनरेगा के नियमों के तहत एक सप्ताह में मजदूरों को भुगतान होना चाहिए। विपरीत परिस्थितियों में भी अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान का निर्देश है। इसके बाद भी विभिन्न कार्यों का महीनों से भुगतान अटका हुआ है। इसके बावजूद मनरेगा की वेबसाइट पर आनलाइन फीडिंग में भुगतान होना दिखा दिया गया। इसका खुलासा होने के बाद डीडीओ प्रह्लाद सिंह ने महकमे के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी है। इस बारे में एई श्रीचंद गुप्ता का कहना है कि अभी कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। मामले की जानकारी नहीं है।

गहरी बोरिंग के मजदूरों को भी भुगतान नहीं
फर्रुखाबाद। लघु सिंचाई विभाग की योजनाआें में कई जगह सुराख हैं। पिछले साल कायमगंज व शमसाबाद ब्लाकों में मनरेगा से हुई बोरिगों के मजदूरों को भी मजदूरी नहीं दी गई। इसकी भी जांच कराई जा रही है।
वर्ष 2011-2012 में कायमगंज को 550 बोरिंगों का लक्ष्य मिला था। इतना ही लक्ष्य शमसाबाद ब्लाक का था। कायमगंज को 12 लाख 56 हजार व शमसाबाद ब्लाक को 30 लाख के करीब धन आवंटित हुआ था। एक बोरिंग पर सामान्य जाति के लिए 7 हजार व अनुसूचित जाति के लिए 10 हजार का अनुदान है। आवंटित रकम में से 60 फीसदी मजदूरी व 40 फीसदी मैटेरियल पर खर्च होनी थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी तक मजदूरों को मजदूरी नहीं दी गई। धन खातों में पड़ा है। एई श्रीचंद गुप्ता का कहना है कि मामले की जानकारी की जा रही है।

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