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Farrukhabad News: लोहिया में हड्डी व जोड़ दर्द के 92 मरीजों को नहीं मिला इलाज
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया जिला अस्पताल में सोमवार को मरीजों की भरमार रही। दो आर्थो सर्जन तैनात होने के बावजूद एक भी नहीं थे। लिहाजा दूरदराज से आए हड्डी व जोड़ दर्द से कराहने वाले 92 मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। ओपीडी में करीब 880 मरीज पहुंचे। इनमें सर्वाधिक मेडिसिन के 277 मरीज थे।
लोहिया अस्पताल में आने वाले हड्डी व जोड़ दर्द के मरीजों को अच्छे इलाज के लिए शासन ने दो डॉक्टरों की तैनाती की है। रविवार अवकाश के बाद प्रत्येक सोमवार को मरीजों की भीड़ बढ़ती है। इसके बावजूद ओपीडी में आर्थो के एक भी डॉक्टर नहीं थे। डॉ. रिषिकांत वर्मा वीआईपी ड्यूटी और डॉ. नीरज वर्मा दिव्यांग बोर्ड में लगा दिए। दोनों ही डॉक्टरों की बाहरी ड्यूटी होने की वजह से ओपीडी में हड्डी व जोड़ दर्द से परेशान मरीज कई-कई घंटे भटकने के बाद बिना दवाई लिए ही लौटने को मजबूर हो गए।
ओपीडी में कार्डियोलॉजी के 96, दांत के 28, कुष्ठ के 35, चेस्ट रोगों के 119, मेडिसिन के 277, बच्चे 56, सर्जन के 50 मरीज समेत करीब 880 मरीज पहुंचे। ऑनलाइन पंजीकरण से लेकर पर्चा काउंटर, फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट के यहां खासी भीड़ रही। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि जिले के अफसरों की ओर से जिसकी ड्यूटी लगेगी, उसे वहां जाना पड़ेगा। ऐसे में मरीजों को दिक्कत होती है। कल हर हाल में एक आर्थो सर्जन अस्पताल में मिलेंगे।
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चेस्ट फिजीशियन के कमरे में धक्का-मुक्की
चेस्ट फिजीशियन डॉ. ध्रुवराज सिंह के यहां मरीजों की लाइनें लगी रहीं। दोपहर में इमरजेंसी में वार्ड में भर्ती मरीज को देखने जाना पड़ा। इस दौरान लाइन में लगे मरीजों ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। काफी शोरगुल के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने समझा बुझाकर शांत किया। मरीजों घंटों से लाइन में लगने के बावजूद दवाई न मिलने की बात कही।
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लोहिया अस्पताल में आने वाले हड्डी व जोड़ दर्द के मरीजों को अच्छे इलाज के लिए शासन ने दो डॉक्टरों की तैनाती की है। रविवार अवकाश के बाद प्रत्येक सोमवार को मरीजों की भीड़ बढ़ती है। इसके बावजूद ओपीडी में आर्थो के एक भी डॉक्टर नहीं थे। डॉ. रिषिकांत वर्मा वीआईपी ड्यूटी और डॉ. नीरज वर्मा दिव्यांग बोर्ड में लगा दिए। दोनों ही डॉक्टरों की बाहरी ड्यूटी होने की वजह से ओपीडी में हड्डी व जोड़ दर्द से परेशान मरीज कई-कई घंटे भटकने के बाद बिना दवाई लिए ही लौटने को मजबूर हो गए।
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ओपीडी में कार्डियोलॉजी के 96, दांत के 28, कुष्ठ के 35, चेस्ट रोगों के 119, मेडिसिन के 277, बच्चे 56, सर्जन के 50 मरीज समेत करीब 880 मरीज पहुंचे। ऑनलाइन पंजीकरण से लेकर पर्चा काउंटर, फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट के यहां खासी भीड़ रही। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि जिले के अफसरों की ओर से जिसकी ड्यूटी लगेगी, उसे वहां जाना पड़ेगा। ऐसे में मरीजों को दिक्कत होती है। कल हर हाल में एक आर्थो सर्जन अस्पताल में मिलेंगे।
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चेस्ट फिजीशियन के कमरे में धक्का-मुक्की
चेस्ट फिजीशियन डॉ. ध्रुवराज सिंह के यहां मरीजों की लाइनें लगी रहीं। दोपहर में इमरजेंसी में वार्ड में भर्ती मरीज को देखने जाना पड़ा। इस दौरान लाइन में लगे मरीजों ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। काफी शोरगुल के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने समझा बुझाकर शांत किया। मरीजों घंटों से लाइन में लगने के बावजूद दवाई न मिलने की बात कही।