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बाढ़ से कटान रोकने को लगे 9000 पौधे बह गए
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कटान रोकने के लिए लगे 9000 पौधे बहे
अमृतपुर। गंगा में आने वाली बाढ़ से कटान रोकने के लिए दो वर्ष पूर्व लगाए गए 9000 पौधे बह गए हैं। देखरेख में लापरवाही के चलते 15 गांवों में एक भी बांस तैयार नहीं हो सका। गांव के लोगों का कहना है कि बांस के पौधे लगाने के नाम पर खानापूरी की गई थी।
गंगा व रामगंगा की बाढ़ से गांवों की कटान रोकने के लिए वर्ष 2018-19 में 9000 बांस के पौधे लगाने की योजना बनी थी। इसके लिए तटवर्ती 15 गांव चयनित कर प्रत्येक में 600 पौधे मनरेगा से लगाने का लक्ष्य दिया गया था। प्रत्येक ग्राम पंचायत से 12 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से 7200 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
इससे गांव आसमपुर, बलीपट्टी रानीगांव, कंचनपुर सबलपुर, अलादपुर भटौली, भाऊपुर चौरासी, सुंदरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, फखरपुर, चाचूपुर जटपुरा, नगरिया जवाहर, पट्टीदारापुर, कड़हर, किराचन, कुड़री सारंगपुर, परतापुर कला में कुल 9000 बांस के पौधों की खरीद पर एक लाख 8 हजार रुपये खर्च किए गए।
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गड्ढा खुदाई व पौधे लाने के भाड़े पर अलग से हजारों रुपये खर्च हुए। अब स्थिति ये है कि ग्राम प्रधानों व सचिवों की लापरवाही के चलते सभी गांवों में पौधे गायब हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 600 पौधों की गिनती तो फाइलों में की गई, मौके पर 100-50 ही लगाए गए। हालात यह हैं कि कुछ गांवों में दो-चार पौधे दिख रहे हैं वह भी सूखे।
खंड विकास अधिकारी गगनदीप सिंह ने बताया है कि उन्हें बांस के पौधे लगाए जाने की जानकारी नहीं है। कब और कितने पौधे किस गांव में लगाए गए हैं, इसकी जांच कराई जाएगी।
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अमृतपुर। गंगा में आने वाली बाढ़ से कटान रोकने के लिए दो वर्ष पूर्व लगाए गए 9000 पौधे बह गए हैं। देखरेख में लापरवाही के चलते 15 गांवों में एक भी बांस तैयार नहीं हो सका। गांव के लोगों का कहना है कि बांस के पौधे लगाने के नाम पर खानापूरी की गई थी।
गंगा व रामगंगा की बाढ़ से गांवों की कटान रोकने के लिए वर्ष 2018-19 में 9000 बांस के पौधे लगाने की योजना बनी थी। इसके लिए तटवर्ती 15 गांव चयनित कर प्रत्येक में 600 पौधे मनरेगा से लगाने का लक्ष्य दिया गया था। प्रत्येक ग्राम पंचायत से 12 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से 7200 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
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इससे गांव आसमपुर, बलीपट्टी रानीगांव, कंचनपुर सबलपुर, अलादपुर भटौली, भाऊपुर चौरासी, सुंदरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, फखरपुर, चाचूपुर जटपुरा, नगरिया जवाहर, पट्टीदारापुर, कड़हर, किराचन, कुड़री सारंगपुर, परतापुर कला में कुल 9000 बांस के पौधों की खरीद पर एक लाख 8 हजार रुपये खर्च किए गए।
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गड्ढा खुदाई व पौधे लाने के भाड़े पर अलग से हजारों रुपये खर्च हुए। अब स्थिति ये है कि ग्राम प्रधानों व सचिवों की लापरवाही के चलते सभी गांवों में पौधे गायब हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 600 पौधों की गिनती तो फाइलों में की गई, मौके पर 100-50 ही लगाए गए। हालात यह हैं कि कुछ गांवों में दो-चार पौधे दिख रहे हैं वह भी सूखे।
खंड विकास अधिकारी गगनदीप सिंह ने बताया है कि उन्हें बांस के पौधे लगाए जाने की जानकारी नहीं है। कब और कितने पौधे किस गांव में लगाए गए हैं, इसकी जांच कराई जाएगी।